राजकीय सम्मान से हुआ नाना का अंतिम संस्कार, किन्हें ऐसे देते हैं अंतिम विदाई?
Nana Patekar Funeral: नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया. इसी बीच आइए जानते हैं कि राजकीय सम्मान किसे दिया जाता है और क्या होती है इसकी प्रक्रिया.

- राजकीय अंतिम संस्कार संवैधानिक पदों, राष्ट्र सेवा का सम्मान।
- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल व विशिष्ट नागरिक इसके पात्र।
- इसमें तिरंगा, गार्ड ऑफ ऑनर, तोप सलामी मुख्य हैं।
- यह सम्मान स्वतः नहीं मिलता, सरकार निर्णय करती है।
Nana Patekar Funeral: पुणे के पास डोंजे गांव में नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया. इससे भारत में राजकीय अंतिम संस्कार से जुड़े नियमों और परंपराओं पर ध्यान गया है. ऐसी विदाई सम्मान का एक आधिकारिक तरीका है जो कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों, खास हस्तियों और उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने देश की सेवा में असाधारण योगदान दिया हो या फिर अपनी जान दी हो.
हालांकि हर मशहूर व्यक्ति को अपने आप राजकीय अंतिम संस्कार नहीं दिया जाता. यह फैसला लागू प्रोटोकॉल और सरकार की मंजूरी पर ही निर्भर करता है.
राजकीय अंतिम संस्कार किसे दिया जाता है?
राजकीय अंतिम संस्कार पारंपरिक रूप से वरिष्ठ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से जुड़े होते हैं. इनमें मौजूदा और पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति शामिल हैं. लागू प्रोटोकॉल के मुताबिक मौजूदा राज्य राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों को भी राजकीय सम्मान मिल सकता है.
यह सम्मान उन खास नागरिकों को भी दिया जा सकता है जिन्होंने सिनेमा, साहित्य, विज्ञान, खेल, राजनीति और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में बड़ा योगदान दिया हो. ऐसे मामलों में फैसला आमतौर पर संबंधित सरकार का ही होता है और यह व्यक्ति की जनसेवा, उपलब्धियों और लागू प्रक्रियाओं पर निर्भर करता है.
ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सशस्त्र बलों और पुलिस के जवानों को भी आधिकारिक या फिर सैन्य सम्मान मिल सकता है. सटीक व्यवस्था उनकी मौत के हालात और संबंधित सेवा के नियमों पर निर्भर करती है.

मशहूर हस्तियों को राजकीय सम्मान क्यों दिया जाता है?
राजकीय सम्मान समाज या फिर देश के प्रति किसी व्यक्ति के योगदान को मान्यता देते हैं. जहां संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को स्थापित प्रोटोकॉल के तहत ऐसे सम्मान मिल सकते हैं वहां दूसरे लोगों पर उनकी असाधारण उपलब्धियों या फिर जनसेवा की वजह से विचार किया जा सकता है.
कलाकारों और अभिनेताओं के मामले में सिनेमा और संस्कृति में उनका योगदान एक वजह हो सकता है. समाज सेवा, परोपकार और वंचित समुदायों की सेवा पर भी विचार किया जा सकता है. हालांकि सिर्फ शोहरत ही किसी को राजकीय अंतिम संस्कार के लिए अपने आप योग्य नहीं बनाती.

राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान क्या होता है?
व्यक्ति के ओहदे और सरकार के फैसले के आधार पर राजकीय अंतिम संस्कार में कई आधिकारिक समारोह शामिल हो सकते हैं.
पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटना
जब प्रोटोकॉल लागू होता है तो ताबूत या फिर पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज लपेटा जाता है. अंतिम संस्कार से पहले तिरंगे को हटा दिया जाता है और निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक परिवार को सौंप दिया जाता है.
गार्ड ऑफ ऑनर
सम्मान के तौर पर पुलिस या फिर सशस्त्र बलों के जवान गार्ड ऑफ ऑनर दे सकते हैं. इस समारोह का स्वरूप मृतक के पद और सरकार द्वारा तय की गई व्यवस्था पर निर्भर करता है.
गन सैल्यूट
कुछ राजकीय या फिर सैन्य अंतिम संस्कारों में औपचारिक गन सैल्यूट शामिल किया जा सकता है. हर मामले में राउंड की संख्या एक जैसी नहीं होती और यह लागू प्रोटोकॉल पर निर्भर होती है.
राजकीय शोक क्या है?
राजकीय शोक सरकार द्वारा किसी प्रमुख नेता या फिर किसी दूसरे प्रतिष्ठित व्यक्ति की मृत्यु के बाद घोषित शोक की एक आधिकारिक अवधि होती है. इस दौरान सरकार के निर्देश के मुताबिक तय जगह पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाकर फहराया जा सकता है.
आदेश के आधार पर घोषित अवधि के दौरान आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रमों को रद्द या फिर सीमित भी किया जा सकता है. राजकीय शोक और राजकीय अंतिम संस्कार आधिकारिक सम्मान के ही रूप हैं. लेकिन उनमें एक बड़ा फर्क है. सरकार राजकीय अंतिम संस्कार की सभी व्यवस्थाएं किए बिना भी राजकीय शोक की घोषणा कर सकती हैं.
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क्या राजकीय अंतिम संस्कार का अधिकार अपने आप मिल जाता है?
हालांकि स्थापित प्रोटोकॉल में कुछ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को शामिल किया गया है लेकिन दूसरे प्रमुख नागरिकों को अपने आप राजकीय अंतिम संस्कार का अधिकार नहीं मिल जाता. यह सम्मान दिया जाएगा या फिर नहीं, यह उनके योगदान, नियम और संबंधित सरकार के फैसले पर निर्भर होता है.
इस वजह से राजकीय अंतिम संस्कार सिर्फ एक औपचारिक विदाई से काफी ज्यादा है. यह जनसेवा, राष्ट्रीय योगदान या फिर बलिदान की आधिकारिक मान्यता है. परिस्थिति और सरकार द्वारा पालन किए जाने वाले प्रोटोकॉल के आधार पर हर व्यक्ति के लिए इसकी व्यवस्था अलग-अलग हो सकती है.
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