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गाय-भैंस के गोबर से होगी कमाई, सरकार की इस योजना में मिलेगी मदद

Gobardhan Scheme: सरकार और NDDB के बायोगैस प्रोजेक्ट्स की मदद से पशुपालक अब गोबर बेचकर एक्स्ट्रा इनकम कर सकते हैं. इससे डेयरी बिजनेस का मुनाफा बढ़ेगा तो खेतों के लिए फ्री में जैविक खाद भी मिलेगी.

Gobardhan Scheme: अब वह जमाना गया जब गाय-भैंस के गोबर को सिर्फ गंदगी या उपले बनाने के काम में लिया जाता था. आज के दौर में गोबर कचरा नहीं. बल्कि किसानों के लिए काला सोना बन चुका है. सरकार की नई पहल और एनडीडीबी (NDDB) के प्रोजेक्ट्स की मदद से अब पशुपालक गोबर बेचकर भी अपनी जेब गरम कर सकते हैं.

इस योजना का मुख्य उद्देश्य डेयरी बिजनेस को और भी ज्यादा प्रॉफिटेबल बनाना है. जिससे किसानों की इनकम सिर्फ दूध तक सीमित न रहे. अगर आपके पास भी पशु हैं. तो तैयार हो जाइए क्योंकि अब आपके आंगन में पड़ा गोबर भी आपको नोट कमाकर देने वाला है. जान लीजिए कैसे मिलता है इसमें फायदा. 

गोबर से बायोगैस

नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) अब देश के अलग-अलग हिस्सों में 6 बड़े बायोगैस प्लांट लगाने की तैयारी में है. इस योजना के तहत पशुपालकों से गोबर खरीदा जाएगा. जिसका इस्तेमाल बायोगैस बनाने में होगा. यह तकनीक न केवल पर्यावरण के लिए अच्छी है.

बल्कि किसानों के लिए कमाई का एक परमानेंट सोर्स भी है. जब ये प्लांट पूरी तरह एक्टिव हो जाएंगे. तो आस-पास के गांवों के पशुपालकों को अपना गोबर कहीं फेंकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सरकार का यह कदम क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकने वाला साबित होगा.

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बायोगैस के साथ मिलेगा जैविक खाद 

इस योजना का फायदा सिर्फ गैस बनाने तक ही नहीं है. बायोगैस प्लांट से निकलने वाली स्लरी (बचा हुआ हिस्सा) एक बहुत ही पावरफुल जैविक खाद के रूप में काम करती है. किसान इस खाद का इस्तेमाल अपने खेतों में कर सकते हैं. जिससे रासायनिक खाद का भारी-भरकम खर्चा बचेगा.

इससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी और फसलों की पैदावार भी नेचुरल तरीके से बढ़ेगी. यानी एक तरफ गोबर बेचकर कैश कमाई और दूसरी तरफ खेती के लिए फ्री में प्रीमियम क्वालिटी की ऑर्गेनिक खाद. यह मॉडल किसानों की लागत को कम करने और मुनाफे को डबल करने का सबसे बेहतरीन तरीका है.

गांव के किसानों को होगा फायदा

गोबर से कमाई की यह स्कीम डेयरी फार्मिंग की सूरत बदलने वाली है. अक्सर छोटे किसानों को लगता था कि पशुपालन में खर्चा ज्यादा और बचत कम है. लेकिन अब गोबर की बिक्री उनकी डेली इनकम में इजाफा करेगी. इससे न केवल गांवों में साफ-सफाई बढ़ेगी.

बल्कि बायोगैस के जरिए रसोई गैस की निर्भरता भी कम होगी. सरकार की इस मदद से अब युवा भी डेयरी और एग्री-बिजनेस की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. अगर आप भी अपने पशुओं के गोबर का सही मैनेजमेंट सीख लें. तो यह सरकारी स्कीम आपकी तकदीर बदल सकती है और डेयरी बिजनेस को सुपर-हिट बना सकती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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