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Fertilizer: टेंशन न लें किसान, अब गांव गांव समय से पहुंचेगा खाद, रेल मंत्रालय संग इस स्टेट गवर्नमेंट की ये है योजना

Fertilizer: रेलों की लेटलतीफी का नुकसान स्टेटों का उठाना पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट ने रेल मंत्रालय से रेलों का समय सही करने की मांग की है. जिससे समय पर किसान को उर्वरक मिल सके.

Fertilizer Uses: रबी का सीजन चल रहा है. किसानों ने फसलों की बुवाई शुरू कर दी है. देश में बड़ी संख्या में रकबा गेहूं का होता है. इसके अलावा दलहन, तिलहन व अन्य फसलें होती हैं. धान रबी और खरीफ दोनों सीजन की फसल हैं. हालांकि धान प्रॉडक्शन का 80 फीसदी हिस्सा खरीफ सीजन का है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से कई स्टेट में समय से खाद पहुंचने में परेशानी हो रही है. इसके पीछे रेलों की लेटलतीफी होना सामने आया है. अब इस स्टेट गवर्नमेंट ने किसानों की समस्या हल करने के लिए ये कदम उठाए हैं. 

उत्तर प्रदेश सरकार ने रेल मंत्रालय से मांगी राहत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की. दरअसल, स्टेट में रेलों से पहुंचने वाला डीएपी और यूरिया बहुत देरी से पहुंच रहा है. अधिकारियों के मुताबिक, डीएपी और यूरिया खाद की ढुलाई में बंदरगाह से स्टेशन तक 8-10 दिन लगते हैं. कई स्टेशन पर बैन होने के कारण यूरिया की सप्लाई ही रोक दी गई है. उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर मिनिस्टर ने केंद्रीय रेल मंत्री से राहत मांगी. 

140 लाख हेक्टेयर में होती है रबी की फसल

उत्तर प्रदेश में लगभग 140 हेक्टेयर में रबी की फसल और गन्ने का रकबा करीब 26 लाख हेक्टेयर है. उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है. यहां रबी की फसल और गन्ना भरपूर होता है. इनकी बेहतर उपज के लिए किसान यूरिया का इस्तेमाल करते हैं. स्टेट में रबी सीजन की बुवाई शुरू कर दी गई है. स्टेट में फास्फेटिक उर्वरकों की मांग बढ़ गई है. ऐसे में किसान को समय पर फर्टिलाइजर मिलना जरूरी है. समय पर फर्टिलाइजर न मिलने पर किसानों के सामने परेशानी होती है. 

बंदरगाहों पर इतना फर्टिलाइजर पड़ा

बंदरगाहो से फर्टिलाइजर रेलवे स्टेशन पहुंचाया जाता है. यहां से अलग अलग स्टेट को भेज दिया जाता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूर्वी बंदरगाह, कीनाडा, कृष्णापटनम, गंगावरम, वाई जैक और पारादीप से रेक की कमी के सप्लाई बेहद स्लो है. नवंबर में इन पूर्वी बंदरगाहों से 149,800 मिलियन टन डीएपी उर्वरक आवंटन में से केवल 82,143 मिलियन टन की आपूर्ति 27 नवंबर, 2022 तक की जा सकी. 67657 मिलियन टन उर्वरक बंदरगाहोें पर पड़ा है. बेहतर सप्लाई के लिए हर दिन 10 से 12 रैक की मांग की गई है. इससे सप्लाई बेहतर हो सकती है. स्टेट में भी फर्टिलाइजर समय से पहुंच जाएगा. 

Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. किसान भाई, किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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