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जुलाई में लगाएं यह सब्जी, महज 90 दिनों में किसानों की जेबें कर देगी फुल

Farming Tips: जुलाई में परवल की खेती शुरू करके किसान महज 90 दिनों में बंपर पैदावार ले सकते हैं. कम लागत और मचान विधि के इस्तेमाल से तैयार होने वाली यह सब्जी बाजार में हमेशा ऊंचे दामों पर बिकती है.

Farming Tips: मानसून का मौसम कई सब्जियों की खेती के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है. अगर किसान कम लागत में ऐसी फसल लगाना चाहते हैं. जिसकी बाजार में अच्छी मांग हो और जो बेहतर कमाई का मौका दे सके. तो परवल एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है. परवल एक ऐसी हरी सब्जी है जिसकी मांग बाजारों में पूरे साल बनी रहती है. 

लेकिन जुलाई में इसकी बुवाई करने का फायदा यह है कि इसे सही मात्रा में प्राकृतिक पानी मिल जाता है. जिससे पौधों का विकास बहुत तेजी से होता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इस खेती में शुरुआती लागत बहुत ही कम आती है और एक बार फसल तैयार होने के बाद बाजार में इसके बेहद शानदार दाम मिलते हैं.

सिर्फ 3 महीने की मेहनत में अच्छा मुनाफा

परवल की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बुवाई के महज 90 दिनों के भीतर यानी करीब 3 महीने में पूरी तरह तैयार होकर फल देना शुरू कर देती है. जुलाई में लगाई गई फसल जब अक्टूबर-नवंबर के आस-पास मार्केट में पहुंचती है. तो उस समय त्योहारों का सीजन होने के चलते हरी सब्जियों के दाम सातवें आसमान पर होते हैं. 

ऐसे में किसानों को परवल का थोक भाव भी बेहद अच्छा मिलता है. परवल के पौधों की लाइफ लंबी होती है. जिससे एक बार लगाने के बाद आप इससे कई महीनों तक लगातार तुड़ाई करके मोटी कमाई कर सकते हैं. कम समय में यह फसल किसानों की जेब को पूरी तरह से नोटों से भर देती है.

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परवल की खेती में इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप परवल की खेती से सबसे ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी एग्रो-टिप्स का ध्यान रखना होगा. सबसे पहले तो अपने खेत में जल निकासी का ऐसा इंतजाम रखें कि बारिश का पानी कहीं भी जमा न होने पाए. क्योंकि ज्यादा पानी से परवल की जड़ें गल सकती हैं. 

परवल की बुवाई के लिए हमेशा अच्छी नर्सरी से लाए गए ग्राफ्टेड पौधों या कटिंग का ही इस्तेमाल करें. चूंकि यह एक बेल वाली फसल है. इसलिए पौधों को मचान पर चढ़ाएं. इससे फल जमीन की कीचड़ और नमी से बचे रहते हैं. जिससे उनकी क्वालिटी एकदम चमकीली और लाजवाब होती है और मंडी में देखते ही बिक जाती है.

यह भी पढ़ें: क्या फार्महाउस की खाली जमीन पर हो सकती है आंवला की खेती? जानिए कम लागत में मोटी कमाई का फॉर्मूला

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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