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5 एकड़ की जुताई के लिए हर दिन कितना खर्च होगा डीजल? यहां जान लीजिए हिसाब किताब

Diesel Consumption In Farming: खेत की जुताई शुरू करने से पहले खर्च का सही अंदाजा होना बेहद जरूरी है. डीजल की खपत और कुल लागत को सीधे प्रभावित करती हैं. जान लें 5 एकड़ में कितना डीजल लग जाएगा.

Diesel Consumption In Farming: खेती और किसानी में कई तरह के खर्चे होते हैं जो किसानों की लागत को बढ़ा देते हैं. ऐसा ही एक बड़ा और जरूरी खर्चा है डीजल का जिससे खेत में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनें चलती हैं. जितना ज्यादा बड़ा खेत होगा मशीनों का उतना ही ज्यादा इस्तेमाल होगा और यानी उतने ही ज्यादा डीजल की खपत भी बढ़ेगी. अगर आप अपनी 5 एकड़ जमीन पर मशीनों का इस्तेमाल करते हैं तो यह जानना इसलिए जरूरी है कि कितना डीजल लग जाएगा. 

जिससे आप अपनी फसल की कुल लागत का सही अंदाजा लगा सकें. जुताई का खर्च सिर्फ ट्रैक्टर के मॉडल पर नहीं बल्कि मिट्टी के टाइप और आप कौन सा इंप्लीमेंट यूज कर रहे हैं. इस पर भी डिपेंड करता है. तो चलिए फिर आपको बताते हैं इसका 5 एकड़ के लिए आपका कितना तेल फुंकने वाला है.

रोटावेटर से जुताई का खर्च

अगर आप अपने 5 एकड़ खेत में रोटावेटर चलाकर जुताई करने की सोच रहे हैं. तो आपको थोड़ा ज्यादा डीजल बजट लेकर चलना होगा. रोटावेटर मिट्टी को बहुत बारीक और भुरभुरा बना देता है. इसलिए ट्रैक्टर के इंजन पर काफी लोड पड़ता है. अमूमन एक 45 से 50 हॉर्सपावर का ट्रैक्टर रोटावेटर खींचने में एक घंटे में लगभग 5 से 7 लीटर डीजल आसानी से पी जाता है. 

5 एकड़ जमीन को रोटावेटर से अच्छी तरह जोतने में करीब 5 से 6 घंटे का समय आराम से लग जाता है. इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अगर आप दिनभर में यह काम निपटाते हैं. तो आपका रोजाना का डीजल खर्च करीब 25 से 35 लीटर के आसपास बैठेगा. जो मौजूदा कीमतों के हिसाब से एक बड़ा अमाउंट है. आप यूपी से हैं तो तकरीबन 96 लीटर की कीमत से 2400 से 3360 रुपये तक डीजल जल जाएगा.

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कल्टीवेटर या हैरो तकनीक से जुताई का खर्च

अगर आप शुरुआत में भारी जुताई के बजाय कल्टीवेटर या तवे वाले हैरो का इस्तेमाल करते हैं. तो आपका डीजल खर्च काफी हद तक कम हो सकता है. इस तकनीक में ट्रैक्टर के इंजन पर लोड कम पड़ता है. जिससे तेल की खपत घट जाती है. कल्टीवेटर चलाते समय एक एवरेज ट्रैक्टर एक घंटे में सिर्फ 3.5 से 4.5 लीटर डीजल ही लेता है.

कल्टीवेटर से 5 एकड़ खेत की जुताई करने में लगभग 4 से 5 घंटे का वक्त लगता है. यानी इस तरीके से अगर आप जुताई करते हैं, तो आपका पूरा दिन का डीजल खर्च 15 से 22 लीटर के बीच सिमट जाएगा यानी लगभग 1440 से 2100 रुपये तक का खर्चा आएगा. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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