घर पर भी उगाया जा सकता है जीरा, जान लीजिए प्रोसेस
दाल और सब्जी में रोज पड़ने वाला जीरा अब बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बालकनी के एक छोटे से गमले में इसे उगाने का एक ऐसी आसान तरीका जान लें जिससे घर पर ही मिल जाएगा एकदम शुद्ध ऑर्गेनिक जीरा.

- जीरा उगाने को बीज रातभर पानी में भिगोकर तैयार करें.
- सही जल निकासी वाले गमले में रेतीली दोमट मिट्टी इस्तेमाल करें.
- पौधे को धूप दें, कम पानी और कुछ वक्त बाद सूखने पर जीरा काटें.
भारतीय रसोई में पकवान को स्वादिष्ट बनाने के लिए कई चीजें जरूरी होती है. जिनमें जीरा भी एक बहुत जरूरी चीज है. जीरे का तड़का दाल या सब्जी के स्वाद को दोगुना कर देता है. इसकी खुशबू की खाने को लजीज बना देती है. जीरे को आप घर की छत पर भी आसानी से उगा सकते है. बाजार में मिलने वाले मिलावटी मसालों से बेहतर है कि घर पर ही शुद्ध ऑर्गेनिक चीजें उगाईं जाएं.
बहुत से लोगों को लगता है कि मसालों की खेती घर के गमले में करना मुश्किल काम है. लेकिन सही जानकारी हो तो यह बेहद आसान साबित होता है. थोड़ी सी धूप, सही मिट्टी और अच्छी क्वालिटी के बीज के साथ आप अपने घर पर ही ताजा जीरा हासिल कर सकते हैं. अगर आप भी अपने किचन गार्डन में कुछ नया और काम का ट्राय करना चाहते हैं. तो फिर जान लीजिए जीरा उगाने का यह आसान सा तरीका.
ऐसे करें शुरुआत
घर पर जीरा उगाने के लिए सबसे पहले आपको सही बीजों का चुनाव करना होगा. आप चाहें तो रसोई में रखे साबुत, बिना टूटे और मोटे दानों वाले जीरे का इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर किसी बीज भंडार से अच्छी वैरायटी के बीज ले आएं. बीजों को तेजी से अंकुरित करने के लिए एक रात पहले हल्के गुनगुने पानी में भिगोकर रख दें. ऐसा करने से बीजों का बाहरी छिलका नरम हो जाता है और अंकुरण का प्रोसेस दोगुना तेज हो जाता है.
सुबह पानी छानकर बीजों को किसी सूती कपड़े पर 10 मिनट के लिए फैला दें जिससे एक्सट्रा चिपचिपापन खत्म हो जाए. इसके बाद इन बीजों को मिट्टी की ऊपरी सतह पर हल्की दूरी बनाकर छिड़कें. ध्यान रहे कि बीजों को बहुत गहराई में नहीं दबाना है बस आधी इंच मिट्टी की हल्की परत से ढक देना है. कम से कम 7 से 10 दिनों के भीतर छोटे हरे पौधे मिट्टी से बाहर झांकने लगते हैं.

सही गमला कैसे चुनें?
जीरे के पौधे को सही ग्रोथ देने के लिए वेल-ड्रेंड मिट्टी सबसे ज्यादा जरूरी होती है. क्योंकि जड़ों में पानी रुकते ही पौधा सड़ने लगता है. इसके लिए 10 से 12 इंच का चौड़ा गमला चुनें. जिसके तली में ड्रेनेज होल ठीक से बने हों. मिट्टी का मिश्रण तैयार करते समय 50% सामान्य दोमट मिट्टी, 30% गोबर की सड़ी खाद और 20% रेत मिलाएं. रेत मिलाने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और एक्सट्रा पानी तुरंत बाहर निकल जाता है.
गमले में मिट्टी भरने के बाद पहले उसे हल्का नम कर लें. फिर बीजों को ऊपर बिखेरें. स्प्रे बोतल की मदद से पानी का हल्का छिड़काव करें जिससे बीज अपनी जगह से न हिलें. जीरे की जड़ें नाजुक होती हैं. इसलिए ठोस और चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल करने से बिल्कुल बचें वरना पौधे की बढ़वार रुक जाएगी.
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ऐसे मिलेगा एकदम शुद्ध जीरा
जीरे के पौधे को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी धूप चाहिए होती है. इसलिए गमले को घर की बालकनी या फिर छत के खुले हिस्से में रखें. पानी देते समय खास सावधानी बरतें जब गमले की ऊपरी मिट्टी सूखी दिखे. तभी हल्का पानी दें. ज्यादा नमी से फंगस लगने का डर रहता है. जिससे बचाव के लिए महीने में एक बार नीम के तेल का हल्का स्प्रे कर सकते हैं.

करीब दो महीने बाद पौधे में नन्हे सफेद और हल्के गुलाबी फूल आने शुरू हो जाते हैं. इसके कुछ हफ्तों बाद फूल सूखकर दानों में बदलने लगते हैं. जब पौधे का रंग हरा से भूरा होने लगे और बीज सूख जाएं. तो समझें कटाई का सही वक्त आ गया है. पौधों को नीचे से काटकर दो दिन धूप में सुखाएं और फिर अपने हाथों से मसलकर जीरा अलग कर लें.
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