मिट्टी में कितना पानी? बिना खेत गए ऐसे लगाएं पता, किसान के काम आएगा तरीका
सिंचाई से पहले मिट्टी में मौजूद नमी का पता लगाना जरूरी है. किसान कुछ आसान तरीकों और डिजिटल साधनों की मदद से बिना बार-बार खेत जाए मिट्टी की नमी की जानकारी ले सकते हैं.

फसल के लिए पानी जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि खेत में जरूरत के हिसाब से ही सिंचाई की जाए. ज्यादा पानी देने से पानी और बिजली दोनों की ही बर्बादी होती है, जबकि कम पानी मिलने पर फसल के बढ़ने पर भी असर हो सकता है. ऐसे में किसानों के लिए यह जानना जरूरी होता है कि खेत की मिट्टी में पहले से कितनी नमी मौजूद है. आज मिट्टी की नमी जांचने के लिए कुछ ऐसे तरीके मौजूद हैं, जिनकी मदद से किसान बार-बार खेत में जाकर मिट्टी देखने के बजाय आसानी से इसकी जानकारी ले सकते हैं.
मिट्टी में नमी मापने वाला सेंसर लगाएं
खेत में मिट्टी नमी सेंसर लगाया जाता है. यह सेंसर मिट्टी के अंदर की नमी को मापता है और उसकी जानकारी मोबाइल या दूसरे डिवाइस पर भेज देता है. इससे किसान को यह समझने में मदद मिलती है कि मिट्टी में पानी की जरूरत है या अभी सिंचाई की जरूरत है. बड़े खेतों में यह तरीका खास तौर पर बहुत उपयोगी होता है.
मोबाइल पर मिल सकती है मिट्टी की जानकारी
कुछ स्मार्ट खेती वाले सिस्टम सेंसर से मिलने वाली जानकारी को मोबाइल ऐप से जोड़ देते हैं. किसान अपने फोन पर मिट्टी की नमी का लेवल देख सकता है और उसी के हिसाब से सिंचाई का फैसला कर सकता है. इससे हर बार खेत तक जाकर मिट्टी की जांच करने की जरूरत बहुत कम हो जाती है . हालांकि इसके लिए सेंसर और उसके सिस्टम को सही लगाना जरूरी है.
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सिंचाई का फैसला सिर्फ ऊपर की मिट्टी देखकर न करें
कई बार खेत की ऊपरी मिट्टी सूखी दिखाई देती है, लेकिन अंदर की मिट्टी में पर्याप्त नमी मौजूद हो सकती है. इसलिए केवल ऊपर से मिट्टी देखकर तुरंत पानी देना सही नहीं होता. फसल की जड़ों की गहराई के आसपास कितनी नमी है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है. किसान मिट्टी की नमी जांचने वाले उपकरण से इसकी सही जानकारी ले सकते हैं.
मौसम की जानकारी से भी मिलेगी मदद
सिंचाई का फैसला लेते समय बारिश और मौसम का भी ध्यान में रखना चाहिए. अगर आने वाले समय में अच्छी बारिश की संभावना है और खेत में पहले से नमी है, तो तुरंत सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ती. मौसम की जानकारी को मिट्टी की नमी के आंकड़ों के साथ देखकर पानी देने का फैसला सही होता है.
जरूरत के हिसाब से पानी देने पर बचेगी लागत
मिट्टी में नमी की सही जानकारी होने से किसान फसल को जरूरत के हिसाब से पानी दे सकते हैं. इससे बिना वजह होने वाली सिंचाई कम हो सकती है और पानी, बिजली या डीजल की लागत भी बच सकती है. साथ ही फसल को जरूरत से ज्यादा पानी मिलने से होने वाली परेशानी से भी बचाया जा सकता है
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