NANO Fertilizer: खाद संकट का समाधान बनेगा नैनो उर्वरक, किसानों के लिए कितना फायदेमंद आयात घटाने का यह विकल्प?
NANO Fertilizer: खरीफ सीजन की तैयारी के बीच उर्वरकों की उपलब्धता एक बार फिर चर्चा में है. केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देश को 390.54 लाख उर्वरकों की जरूरत है.

NANO Fertilizer: देश में उर्वरकों की बढ़ती मांग, कच्चे माल की महंगी की होती कीमतों और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिशें के बीच नैनो उर्वरक एक नए ऑप्शन के तौर पर उभर रहे हैं. सरकार और सहकारी संस्था इसे कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली तकनीक मान रही है. हालांकि उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ने के बावजूद यह तकनीक अभी पारंपरिक उर्वरकों का पूर्ण ऑप्शन नहीं बन सकी. किसानों के बीच सीमित स्वीकार्यता और उपयोग से जुड़ी चुनौतियों के कारण इसकी पहुंच अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि खाद्य संकट का समाधान नैनो उर्वरक कैसे बनेगा और आयात निर्भरता घटाने की दिशा में यह कैसा बड़ा ऑप्शन है.
खरीफ सीजन में देश को 390.54 लाख टन उर्वरक की जरूरत
खरीफ सीजन की तैयारी के बीच उर्वरकों की उपलब्धता एक बार फिर चर्चा में है. केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देश को 390.54 लाख उर्वरकों की जरूरत है. इसके मुकाबले अभी 200.47 लाख टन का स्टॉक उपलब्ध है, जो कुल आवश्यकता का करीब 51 प्रतिशत है. सामान्य वर्षों में मई-जून के दौरान यह स्तर लगभग 33 प्रतिशत रहता है. इससे साफ है कि इस बार अग्रिम भंडारण और बेहतर प्रबंधन के कारण स्थिति बेहतर है. लेकिन देश को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए अब भी घरेलू उत्पादन और आयात दोनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. ऐसे में नैनो उर्वरकों को भविष्य की पत्नी के रूप में देखा जा रहा है. वहीं वर्तमान में देश में चार प्लांट से नैनो उर्वरकों का उत्पादन हो रहा है. इनकी कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 29 करोड़ बोतलों तक पहुंच चुकी है. यह क्षमता लगभग 13.50 लाख टन पारंपरिक उर्वरकों के बराबर मानी जा रही है. इसके बावजूद देश की कुल उर्वरक खपत में नैनो उर्वरकों की हिस्सेदारी अभी बहुत कम है.
क्या है नैनो उर्वरक की खासियत?
नैनो तकनीकी मदद से तैयार किए गए उर्वरक पौधों तक पोषक तत्वों को ज्यादा प्रभावित तरीके से पहुंचने का दावा करते हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि इससे कम मात्रा में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. नैनो उर्वरक की 500 ग्राम की एक बोतल को पारंपरिक खाद की 45 किलोग्राम की एक बोरी के बराबर प्रभावी माना जाता है. इससे परिवहन भंडारण और वितरण की लागत में कमी आने की संभावना रहती है. यही वजह है कि इसे सरकार के उर्वरक सब्सिडी बोझ को कम करने वाले ऑप्शन के रूप में भी देखा जा रहा है. चालू वित्त वर्ष में खाद सब्सिडी के लिए करीब 1.70 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो जरूरत पड़ने पर 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
ये भी पढ़ें-World Milk Day: दूध उत्पादन में भारत नंबर-1, तो दूसरे और तीसरे नंबर पर कौन?
किसानों को जागरूक करने पर जोर
नैनो उर्वरकों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इफको ने हाल ही में देशव्यापी जागरूकता अभियान शुरू किया. संस्था का मानना है कि अगर 50 प्रतिशत किसानों भी नैनो उत्पादों को अपनाता है, तो आयात पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ लॉजिस्टिक लागत और ऊर्जा खपत में भी कमी आ सकती है. इफको के अनुसार नैनो उर्वरक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए किसानों का भरोसा जीतना जरूरी है. अभी भी ज्यादातर किसान यूरिया और डीएपी जैसे पारंपरिक उर्वरकों को ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं. यही कारण है कि नई तकनीक को अपनाने की गति धीमी है.
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL























