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Voter List Verification: EC के दावे पर सवाल, 31 दिन या 2 साल? फर्जी वोटर पर घमासान | Bihar elections
बिहार में मतदाता सूची सत्यापन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस हुई है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से फर्जी वोटरों को हटाने के लिए अभियान शुरू किया है। इस प्रक्रिया की अवधि और आवश्यक दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि "बेबुनियाद आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा। वर्ष 2003 में 31 दिनों में ही हुआ था सत्यापन"। विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई है और पूछा है कि पिछली बार दो साल लगे थे तो इस बार दो महीने में यह कैसे संभव है। तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। बहस के दौरान यह भी मुद्दा उठा कि आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों को क्यों नहीं माना जा रहा है, जबकि लोगों के पास ये उपलब्ध हैं। कुछ लोगों ने यह भी चिंता व्यक्त की कि जो लोग काम के लिए बाहर हैं या जिनके पास मांगे गए दस्तावेज नहीं हैं, उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। इस अभियान को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह गरीबों, पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों को चुनावी प्रक्रिया से दूर करने की साजिश है।
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