वोटर लिस्ट की लड़ाई...'सूत्र' पर आई
सूत्रों के हवाले से ख़बर आज नहीं, बल्कि हमेशा से चलती आई है...कई बार जो ख़बर आज सामने आती है, वो सूत्रों के हवाले से कई दिन पहले चल जाती है...कई बार सूत्रों की ख़बर ग़लत भी होती है...लेकिन बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने सूत्र पर जो ज़ुबानी प्रहार किया है, वो मर्यादा तार-तार करने वाली है... दरअसल बिहार में वोटर लिस्ट की समीक्षा को लेकर कल चुनाव आयोग के सूत्रों के हवाले से ये ख़बर आई कि बिहार में बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी मतदाता बन गए हैं जो बांग्लादेशी, रोहिंग्या और नेपाल के हैं...इसको लेकर जब तेजस्वी यादव से सवाल पूछा गया तो उन्होंने सूत्र की तुलना मूत्र से कर दी...ऐसा भी नहीं है कि उनकी ज़ुबान फिसल गई क्योंकि उन्होंने अपने इस बयान को आज फिर दोहराया है... आख़िर विपक्ष के नेता जैसे पद पर रहते हुए तेजस्वी की ये कैसी भाषा है...क्या कोई ख़बर सूत्र के हिसाब से ग़लत साबित हो जाए तो उसकी तुलना आप मूत्र से करेंगे...क्या इसके लिए वो इससे बेहतर शब्द नहीं चुन सकते थे...आज तेजस्वी की इस भाषा को लेकर बीजेपी और जेडीयू आक्रामक हैं...इसे भाषाई लंपटता बता रहे हैं... आज महादंगल में बात तेजस्वी की भाषा की...क्या चुनाव के दौरान तेजस्वी विरोधी पार्टियों के बदले मीडिया के ख़िलाफ़ अभियान चलाएंगे...सवाल ये भी कि क्या घुसपैठियों को लेकर चुनाव आयोग के सूत्रों का दावा सही है...सवाल ये भी कि चुनाव आयोग ख़ुद सामने आकर क्यों नहीं बयान देता...और सवाल ये भी कि वोटर लिस्ट का मुद्दा कब सुलझेगा
























