जितना चलो उतना भरो, टोल प्लाजा होंगे खत्म! अब सैटेलाइट से कटेगा पैसा
केंद्र सरकार 2028-29 तक कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर सैटेलाइट आधारित टोल प्रणाली शुरू करने की तैयारी में है. इससे वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और तय दूरी के हिसाब से भुगतान करना होगा.

अगर आप भी हाईवे पर सफर करते समय टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी लाइनों से परेशान रहते हैं, तो आने वाले समय में टोल चुकाने का तरीका बदल सकता है. केंद्र सरकार देश के कुछ राष्ट्रीय राजमार्गों पर सैटेलाइट आधारित टोल वसूली व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है. इस नए सिस्टम के तहत अब वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी. इसके बजाय, अब हाईवे पर तय की गई दूरी के हिसाब से टोल वसूला जाएगा. सरकार का टारगेट 2028-29 तक चुनिंदा राष्ट्रीय राजमार्गों पर इस सिस्टम की शुरुआत करना है.
फिलहाल देश में टोल वसूली के लिए FASTag का इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन अब नई व्यवस्था लागू होने के बाद टोल पेमेंट का तरीका बदल सकता है. हालांकि, इसके लिए तकनीकी तैयारियां पूरी करना और सैटेलाइट के जरिए वाहनों की निगरानी करने वाली सिस्टम को मजबूत बनाना जरूरी होगा.
क्या है सैटेलाइट आधारित टोल वसूली सिस्टम?
सैटेलाइट आधारित टोल वसूली सिस्टम को ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) या GPS तकनीक की मदद से वाहन लोकेशन और हाईवे पर तय की गई दूरी का पता लगाया जा सकता है. इस सिस्टम में वाहन चालकों को पारंपरिक टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि इसके आधार पर वाहन चालक से उतनी ही दूरी का टोल लिया जा सकेगा, जितनी दूरी उसने टोल के दायरे वाले हाईवे पर तय की है.
हालांकि, इसके लिए वाहनों में खास डिवाइस लगाने की जरूरत पड़ सकती है. यह व्यवस्था मौजूदा FASTag और मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम के साथ लागू करने की योजना है.
IIT कानपुर को मिली बड़ी जिम्मेदारी
केंद्र सरकार इस तकनीक को देश में लागू करने की तैयारी पर काम कर रही है. इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इस तनिक पर शोध करने और भरोसेमंद व्यवस्था तैयार करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की जिम्मेदारी दी है.
इस केंद्र के जरिए सैटेलाइट आधारित टोल वसूली तकनीक पर शोध किया जाएगा और इसे भारत की जरूरतों के मुताबिक विकसित करने पर काम होगा. हालांकि, इसके लिए मंत्रालय पूरी फंडिंग करेगा.
सैटेलाइट टोल सिस्टम से क्या होंगे फायदे?
- टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारों से राहत मिल सकती है.
- टोल चुकाने के लिए गाड़ी रोकने की जरूरत कम होगी.
- तय दूरी के हिसाब से शुल्क की वसूली की जाएगी.
- टोल प्लाजा से जुड़े बुनियादी ढांचे की जरूरत घट सकती है.
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