UP में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस हुई कम, रेंट एग्रीमेंट बनवाना पड़ेगा सस्ता
उत्तर प्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस कम हो गई है. मकान मालिकों और किराएदारों को हस्ताक्षर करने से पहले उत्तर प्रदेश स्टाम्प और पंजीकरण विभाग से शुल्कों की पुष्टि कर लेनी चाहिए.

उत्तर प्रदेश सरकार ने मकान मालिकों और किरायेदारों को बड़ी राहत देते हुए रेंट एग्रीमेंट यानी किराया समझौते और लीज डीड पर लगने वाले स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क में भारी कटौती की है. नई व्यवस्था के तहत 10 साल तक के लीज समझौतों के लिए फीस के नए स्लैब तय किए गए हैं, जिससे लागत में लगभग 80% तक की कमी आई है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने औपचारिक दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए 10 साल तक के पट्टों के लिए फीस के फॉर्मेट में संशोधन किया है. स्टाम्प और पंजीकरण विभाग ने 12 अक्टूबर को संशोधित दरों पर एक अधिसूचना जारी की थी.
रेंट एग्रीमेंट पर होगी बंपर बचत
अब सालाना 2 लाख रुपए तक के किराए वाले 1 साल के एग्रीमेंट पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस मिलाकर कुल खर्च लगभग 2000 रुपए हो गया है, जो पहले करीब 10 हजार रुपए तक बैठता था. सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य लोगों को बिना मौखिक या शॉर्ट-टर्म एग्रीमेंट के कानूनी रूप से वैध और रजिस्टर्ड रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे किराएदार-मकान मालिक के बीच विवादों को कम किया जा सके.
| औसत वार्षिक किराया श्रेणी | 1 साल तक की अवधि | 1 से 5 साल की अवधि | 5 से 10 साल की अवधि |
| 2 लाख रुपए तक | 1000 रुपए | 2000 रुपए | 4000 रुपए |
| 2 लाख से 6 लाख रुपए तक | 3000 रुपए | 6000 रुपए | 8000 रुपए |
| 6 लाख से 10 लाख रुपए तक | 4500 रुपए | 10000 रुपए | 13000 रुपए |
औपचारिक दस्तावेजीकरण हुआ किफायती
दरअसल पहले बड़ी लागत के कारण लोग अनौपचारिक व्यवस्थाओं पर निर्भर थे, लेकिन अब संशोधित दरों से औपचारिक दस्तावेजीकरण किफायती हो गया है. इन औपचारिक समझौतों में किराया, सुरक्षा जमा, अवधि और समाप्ति की शर्तें तय की जाती हैं, जो विवादों के समय दोनों पक्षों के लिए मददगार साबित होती हैं.
किरायेदारों और मकान मालिकों के लिए जरूरी बातें
- किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले उत्तर प्रदेश स्टाम्प और पंजीकरण विभाग की वेबसाइट या कार्यालय से लागू शुल्कों की पूरी जानकारी जरूर ले लें.
- किराए की राशि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य सभी शर्तों को समझौते में बिल्कुल स्पष्ट रूप से दर्ज करें.
- याद रखें कि केवल पंजीकरण करा लेने मात्र से मकान मालिक को अपने-आप बेदखली या बकाया किराए की वसूली की गारंटी नहीं मिल जाती. इसके लिए कानून द्वारा तय की गई उचित प्रक्रिया का ही पालन करना होगा.
- किराए या अन्य शुल्कों के लेन-देन की सभी भुगतान रसीदें अपने पास सुरक्षित रखें.
समझौते की एक हस्ताक्षरित प्रति अपने रिकॉर्ड के लिए जरूर अपने पास रखें.






















