सूर्य सरोवर योजना क्या है, सोलर लगने से किसको मिलेगा सस्ती बिजली का फायदा?
Floating Solar Project: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना को मंजूरी दी है. आइए जानते हैं तालाबों और जलाशयों पर 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं से सस्ती बिजली कैसे मिलेगी.

PM Surya Sarovar Yojana: अगर आप भी सस्ती और पर्यावरण अनुकूल बिलजी पाना चाहते हैं, तो केंद्र सरकार की नई प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) आपके बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है. इस योजना के तहत देशभर के तालाबों, झीलों और बड़े जलाशयों पर तैरता हुए सोलर पैनल लगाए जाएंगे, इसके जरिए अब बड़े पैमाने पर बिजली का उत्पाद किया जाएगा. इससे न सिर्फ अब हरित ऊर्जा का उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि बिजली की लगत कम होगी. अब केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत देश में 5,000 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं विकसित की जाएंगी
क्या है प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना?
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना के तहत अब जलाशयों और अन्य जल निकायों की सतह पर बड़े पैमाने पर तैरते हुए सोलर पैनल को लगाए जाएंगे. इन पैनलों से बनने वाली बिजली को राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ा जाएगा, जिससे विभिन्न राज्यों में स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और लोगों की बिजली पर निर्भरता कम होगी.
किसे मिलेगी सस्ती बिजली का फायदा?
घरेलू उपभोक्ता: सोलर ऊर्जा की हिस्सादरी बढ़ने से बिजली बिलिंग की लागत काफी हद तक अब कम हो सकती है. इसका सबसे ज्यादा फायदा आम घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली के रूप में मिलने की उम्मीद है.
SBI की 'हर घर लखपति' स्कीम में निवेश कर बनाएं लाखों का फंड, जानें पूरी डिटेल
किसान और कृषि क्षेत्र: जलाशयों यानी तालाबों और झीलों के आसपास उत्पादित बिजली का इस्तेमाल सिंचाई और कृषि कार्यों में आसानी से किया जा सकता है. इससे अब किसानों को काफी राहत महसूस हो सकती है.
उद्योग और स्थानीय क्षेत्र: नहरों, जलाशयों, औद्योगिक क्षेत्र और तालाबों के आसपास स्थित उद्योगों और स्थानीय इलाकों को किफायती बिलजी की उपलब्धता बढ़ेगी. खासकर इससे कम लागत वाली बिलजी उपलब्ध होगी, जिससे यह योजना काफी मददगार साबित हो सकती है.
कितना होगा निवेश?
- इस योजना में कुल खर्च करीब 5,070 करोड़ रुपये है.
- प्रति मेगावाट परियोजना पर 1 करोड़ रुपये तक की केंद्रीय सहायता दी जाएगी.
- कुल निवेश 28,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है.
- इसके परियोजनाओं को 2026-27 से 2030-31 के बीच तक मंजूरी दी जाएगी.
क्यों खास है यह योजना?
- जमीन की कमी जैसी परेशानियां अब कम होगी.
- जलाशयों के पानी का वाष्पीकरण कम होगी.
- नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में बढ़ावा होगा.
- राज्यों को पीक डिमांड के समय बिजली में मदद मिलेगी.
शो के लिए छत पर गाड़ी खड़ी करने पर चालान कटता है? यहां से मिल सकता है नोटिस
























