LPG मार्केट में हड़कंप, गैस की डिमांड में भारी कमी, क्या महंगा सिलेंडर है गिरावट का कारण? जानें
LPG Demand Decline: मिडिल ईस्ट तनाव और महंगी गैस के बीच मार्च में LPG खपत में 12.8% गिरावट दर्ज की गई है. हालांकि, सालाना स्तर पर मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है.

- मध्य पूर्व तनाव से एलपीजी खपत मार्च में 12.8% गिरी।
- घरेलू गैस बिक्री 8.1% घटी, बल्क एलपीजी में 75.5% गिरावट।
- वित्तीय वर्ष में कुल खपत 6% बढ़ी, मांग मजबूत।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमतों से खपत पर दबाव।
LPG Consumption: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर देश की एलपीजी खपत पर भी नजर आने लगा हैं. सप्लाई में रुकावट ने घरेलू और व्यावसायिक दोनों तरह के ग्राहकों को प्रभावित करने का काम किया हैं. जिसके चलते मार्च में गैस की खपत में गिरावट दर्ज की गई है.
ऑफिशियल आंकड़ों की बात करें तो, मार्च महीने में एलपीजी की खपत 2.379 मिलियन टन रही. जो पिछले साल इस समय की तुलना में 2.729 मिलियन टन के मुकाबले करीब 12.8 फीसदी की गिरावट दिखाती है. आइए जानते हैं, इस विषय में विस्तार से.
क्या कहते हैं आंकड़े?
ऑफिशियल आंकड़ों के अनुसार, एलपीजी की मांग में गिरावट साफ नजर आ रही है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के मुताबिक, मार्च में घरेलू इस्तेमाल के लिए गैस की बिक्री 8.1 फीसदी घटकर 2.219 मिलियन टन रह गई. घरेलू गैस सेगमेंट में करीब 48 फीसदी कमी आई. जबकि बल्क एलपीजी की बिक्री में 75.5 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई है.
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि कुल खपत पर दबाव बना हुआ है. हालांकि, इस मामले में सरकार का कहना है कि सप्लाई में कोई कमी नहीं है और घरेलू ग्राहकों की जरूरत पूरी की जा रही हैं.
सालाना स्तर पर मांग मजबूत
पूरे वित्तीय वर्ष की बात करें तो एलपीजी की कुल खपत में करीब 6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. यह आंकड़ा करीब 33.212 मिलियन टन तक पहुंच गया है. जिससे साफ है कि लंबे समय में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. सरकार के लकड़ी और दूसरी चीजों की जगह पर साफ ऊर्जा अपनाने के नीति की वजह से भी यह तेजी देखने को मिली है.
वहीं, विमान ईंधन (ATF) की खपत में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया. जबकि पेट्रोल और डीजल की बिक्री में अच्छी बढ़त रही. जिससे इस एरिया में हो रहे ग्रोथ को समझा जा सकता है. हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज के बंद होने के कारण देश की ऊर्जा जरूरतों पर दबाव जरूर देखने को मिला हैं.
कीमतों पर दबाव
युद्ध और सप्लाई में आई रुकावटों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें बढ़ गई हैं. जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ा हैं. महंगी गैस की वजह से लोगों की खपत पर असर देखने को मिल रहा हैं.
साथ ही मांग में आई गिरावट के पीछे महंगा होता गैस एक वजह हो सकता है. हालांकि, इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी नहीं आई है.
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Source: IOCL

























