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Sweep-In FD: इमरजेंसी फंड को Sweep-In FD में डालने से पहले जान लें फायदे-नुकसान, वरना मुश्किल समय में फंस जाएगा काम

Sweep-In FD: क्या इमरजेंसी फंड को Sweep-In FD में रखना सही है? इससे जुड़े सभी सवालों के जवाब, इसकी लिक्विडिटी, ब्याज, फायदे, नुकसान और किन लोगों के लिए ये सही ऑप्शन है, आप यहां से समझ सकते हैं.

Sweep-In FD: अचानक नौकरी चली जाए, मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या कोई बड़ा खर्च सामने आ जाए, ऐसे समय में इमरजेंसी फंड ही सबसे बड़ा सहारा बनता है. यही वजह है कि हमेशा 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह देते हैं. लेकिन जब यह पैसा लंबे समय तक सेविंग अकाउंट में पड़ा रहता है, तो कई लोगों को लगता है कि कम ब्याज मिल रहा है. ऐसे में Sweep-In FD ही पैसों को सेव करने के लिए बेस्ट लगता है. लेकिन इसके भी कुछ फायदे और नुकसान हैं.

क्या होती है Sweep-In FD?

Sweep-In FD एक ऐसी सुविधा है जिसमें आपके सेविंग अकाउंट में तय सीमा से अधिक रकम अपने-आप फिक्स्ड डिपॉजिट में ट्रांसफर हो जाती है. अगर बाद में खाते में पैसे की जरूरत पड़ती है, तो बैंक FD से आवश्यक राशि निकालकर आपके खाते में जमा कर देता है. इस तरह पैसा FD जैसा ब्याज भी कमाता है और जरूरत पड़ने पर उपलब्ध भी रहता है. 

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Sweep-In FD के फायदे- 

1. सामान्य सेविंग अकाउंट की तुलना में Sweep-In FD पर बेहतर ब्याज मिलता है. इससे इमरजेंसी फंड पर कुछ कमाई हो सकती है. 

2. जरूरत पड़ने पर बैंक FD का केवल उतना हिस्सा तोड़ता है जितनी रकम चाहिए होती है. बाकी पैसा FD में बना रहता है और उस पर ब्याज मिलता रहता है. 

3. अलग से FD मैनेज करने की जरूरत नहीं है. पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक होती है. आपको बार-बार FD खोलने या बंद करने की चिंता नहीं करनी पड़ती. 

Sweep-In FD के नुकसान-

1. कुछ बैंकों में रिवर्स स्वीप तुरंत हो जाता है, जबकि कुछ जगह न्यूनतम राशि या अन्य शर्तें लागू हो सकती हैं. इसलिए सुविधा पर पूरी तरह निर्भर होने से पहले नियम समझना जरूरी है. 

2. अगर FD का हिस्सा बार-बार टूटता है, तो बैंक प्रीमैच्योर विदड्रॉल के नियम लागू कर सकता है. इससे ब्याज कम मिल सकता है. 

3. इमरजेंसी फंड का फायदा तो खासतौर से सुरक्षा और तुरंत उपलब्धता है, न कि ज्यादा रिटर्न. इसलिए केवल ब्याज के लालच में पूरा फंड Sweep-In FD में डालना सही फैसला नहीं माना जाता. 

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क्या करना चाहिए?

इमरजेंसी फंड को एक ही जगह रखने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में बांटना बेहतर रहता है. इसलिए 1-2 महीने के खर्च के बराबर रकम सेविंग अकाउंट में रखें और बाकी हिस्सा Sweep-In FD में डाल सकते हैं. इससे जरूरत पड़ने पर तुरंत नकदी भी मिलेगी और कुछ रिटर्न भी कमाया जा सकेगा. Sweep-In FD उन लोगों के लिए अच्छा ऑप्शन है जो अपने इमरजेंसी फंड पर थोड़ा बेहतर रिटर्न चाहते हैं, लेकिन इसके साथ मिलने वाली शर्तों और लिक्विडिटी को भी समझना जरूरी है. याद रखें, इमरजेंसी फंड का पहला काम पैसा बढ़ाना नहीं, बल्कि मुश्किल समय में तुरंत मदद करना है. 

About the author सृष्टि

'एबीपी नेटवर्क' में सीनियर कॉपी-एडिटर के तौर पर काम कर रहीं सृष्टि का डिजिटल मीडिया में 4 सालों से अधिक का अनुभव है.बिजनेस, एंटरटेनमेंट, धर्म, लाइफस्टाइल और यात्रा सेक्शन में लेखन, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है.सीसीएसयू से मास कम्युनिकेशन में स्नातक कर चुकीं सृष्टि ने अपने करियर की शुरुआत नवभारत टाइम्स के साथ की थी, जिसके बाद वो 2.5 साल तक टाइम्स नाउ नवभारत का हिस्सा भी रहीं.फाइनेंस के साथ फिल्मी कीड़ा होना न केवल इनका पेशा बल्कि हिस्सा है.

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