Hydrogen Train: 120 किमी घंटा की टॉप स्पीड, 682 सीटें, कैसी है देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन? जानें खासियतें
Indian Railways: 17 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा के जींद से भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे. यह जींद-सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी तय करेगी.

India First Hydrogen Train: भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई और हरित शुरुआत होने जा रही है. प्रधानमंत्री मोदी 17 जुलाई को देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरियाणा के जींद से हरी झंडी दिखाएंगे. इस ट्रेन को 17 जुलाई को हरियाणा के जिंद-सोनीपत सेक्शन पर खास उद्घाटन सेवा के रूप में चलाया जाएगा. इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों जैसे, जापान, अमेरिका, कनाडा और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेन अभी इस्तेमाल में हैं. जिंद से सोनीपत के बीच चलने वाले पहली हाइड्रोजन ट्रेन2 घंटे में कुल 89 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और इसके रास्ते में कुल 12 स्टेशन पड़ेंगे;
Origin Station: जिंद सिटी
- 1. पांडु पिंडारा
- 2. ललित खेड़ा
- 3. भांभेवा
- 4. ईशापुर खेड़ी
- 5. बुटाना
- 6. खंडराई
- 7. गोहाना
- 8.रभड़ा
- 9. लाठ
- 10. मोहाना
- 11. बरवसनी
- 12. सोनीपत
अब आपको बताते हैं कि ट्रेन संख्या 74010 जोकि जींद रेलवे स्टेशन से सुबह 7:40 बजे रवाना होगी और सुबह 9:40 बजे सोनीपत रेलवे स्टेशन पहुंचेगी. इसके अलावा ट्रेन संख्या 74009, सोनीपत रेलवे स्टेशन से सुबह 10:40 बजे रवाना होगी जबकि दोपहर 1:00 बजे, जींद पहुंचेगी.
अब आपको बता दें कि पहली हाइड्रोजन ट्रेन की क्या खासियत है ? इस ट्रेन में कुल 10 कोच होंगे जिनमें 682 सीटें होंगी और पूरी ट्रेन की यात्री क्षमता लगभग 2,600 के करीब होगी. हालांकि इस ट्रेन की अधिकतम गति 120 किमी/घंटा है जिसका ट्रायल भी सफलतापूर्वक कर लिया गया है लेकिन ट्रेन की ऑपरेशनल स्पीड 75 किमी/घंटा रखी गई जिसकी अनुमति रेलवे बोर्ड से दी गई है. ट्रेन की पॉवर कैपेसिटी 2400 किलोवाट होगी जिसमें 1200 किलोवाट हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रणाली का इंजन लगाया गया है.
पहली हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत:
- कुल कोच: 10
- कुल सीटें: 682
- कुल यात्री क्षमता: लगभग 2,600
- परिचालन गति: 75 किमी/घंटा
- अधिकतम गति: 120 किमी/घंटा
वैसे तो हाइड्रोजन ट्रेन, जिसे ‘हाइड्रेल’ या ‘H-ट्रेन’ भी कहा जाता है, नॉन एलेक्ट्रिफाइड रेल रूट्स पर डीजल इंजनों का एक हरित और स्वच्छ विकल्प मानी जाती है, क्योंकि इससे कोई प्रदूषण नहीं होता. इसके संचालन के पीछे की तकनीक ये है कि इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल केमिकल रिएक्शन के जरिए से बिजली पैदा करते हैं लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में CO2 यानि कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन नहीं होता और सिर्फ पानी की भाप निकलती है.
हालांकि फिलहाल आम लोगों को इस ट्रेन से यात्रा करने में थोड़ा सा इंतजार करना पड़ेगा क्यों कि रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 17 जुलाई को ट्रेन उद्घाटन के लिए खास सेवा के रूप में संचालित होगी. नियमित यात्री सेवा कब शुरू होगी, इसका निर्णय अभी फिलहाल नहीं लिया गया है.
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