करोड़पति बनने का 'अर्ली बर्ड' फॉर्मूला, जितनी जल्दी शुरुआत, उतनी कम मंथली SIP की जरूरत
Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए ₹1 करोड़ का फंड बनाना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसके लिए सही समय पर निवेश शुरू करना सबसे जरूरी है. जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे उतना कम निवेश करना पड़ेगा.

- देर होने पर SIP बढ़ाएं, नियमित निवेश करें।
Retirement Planning: आज की बिजी लाइफ में अक्सर लोग सोचते हैं कि रिटायरमेंट की प्लानिंग बाद में कर लेंगे, लेकिन यह एक छोटी सी गलती आगे चलकर बड़ी दिक्कत बन सकती है. अगर आप भी सोचते हैं कि 1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड बनाना मुश्किल है, लेकिन सच यह है कि सही समय पर शुरुआत करके आप अपना लक्ष्य आसानी से हाासिल कर सकते हैं. बस इसके लिए सही जानकारी और प्लानिंग का होना जरूरी है.
सबसे बड़ा फर्क इस बात से पड़ता है कि आप इन्वेस्टमेंट की शुरुआत कब करते हैं. अगर आप जल्दी इन्वेस्टमेंट शुरू करते हैं तो कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है और वहीं अगर आप देर से करते हैं तो हर महीने ज्यादा रकम इन्वेस्ट करनी पड़ती है. यही कारण है कि समय पर शुरुआत करना बेहद जरूरी है.
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जल्दी शुरुआत करने के फायदे क्या है?
मान लीजिए आपका लक्ष्य 1 करोड़ का फंड बनाना है और आपको औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है, जैसा कि लंबे समय में इक्विटी म्यूचुअल फंड में देखा गया है. अगर कोई व्यक्ति 20 साल की उम्र में इन्वेस्ट शुरू करता है तो वह लगभग 25 साल में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है. इसके लिए हर महीने करीब 6 हजार से 7 हजार इ्न्वेस्ट करना होगा. यह रकम काफी आसान और मैनेज करने लायक होती है.
देरी का क्या होगा असर समझें
5 साल की देरी ( 25 साल की उम्र में शुरुआत)
- इन्वेस्ट अवधि- 20 साल
- हर महीने इन्वेस्ट- 10 हजार से 11 हजार
- क्या होगा असर- SIP लगभग डेढ़ गुना बढ़ जाएगी
10 साल की देरी ( 30 साल की उम्र में शुरुआत)
इन्वेस्ट अवधि- 15 साल
हर महीने इन्वेस्ट- 18 हजार से 20 हजार
क्या होगा असर- इन्वेस्ट रकम लगभग 3 गुना बढ़ जाएगी
15 साल की देरी ( 35 साल की उम्र में शुरुआत)
- इन्वेस्ट अवधि- 10 साल
- हर महीने इन्वेस्ट- 40 हजार से 45 हजार
- क्या होगा असर- लक्ष्य हासिल करना काफी मुश्किल हो सकता है.
कंपाउंडिंग का असर कैसे काम करता है?
बात करें कंपाउंडिंग की तो यह शुरुआत में ज्यादा असर नहीं दिखाती है. शुरुआती सालों में रिटर्न धीमा लगता है, लेकिन जैसे-जैसे टाइम बढ़ता है, ग्रोथ तेजी से बढ़ती है. वहीं जो लोग जल्दी इन्वेस्ट करना शुरू करते है तो उन्हें सबसे ज्यादा फायदा मिलता है. वहीं देर से शुरुआत करने वाले लोग इस बड़े ग्रोथ वाले हिस्से को मिस कर देते हैं.
देरी की कीमत सिर्फ पैसों में नहीं पड़ती
देर से इन्वेस्ट करने पर सिर्फ ज्यादा पैसा ही नहीं लगाना पड़ता है, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ता है, क्योंकि हर महीने 20-40 हजार रुपये इन्वेस्ट करना आसान बात नहीं है और खासकर तब जब घर का खर्च हो, बच्चों की पढ़ाई और बाकी की जिम्मेदारियां हो.
अगर देर हो गई है तो क्या करें?
अगर आपने देर से शुरुआत की है तो घबराने की जरूरत नहीं है. अब आपको कुछ जरूरी कदम उठाने चाहिए जैसे...
- हर साल अपनी SIP को 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक बढ़ाएं, इसे स्टेप-अप SIP कहते हैं.
- इन्वेस्टमेंट में नियमितता बनाए रखें.
- जरूरत के हिसाब से इक्विटी में थोड़ा ज्यादा इन्वेस्ट करें.
मतलब साफ है कि 1 करोड़ का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल नहीं है. इसके लिए आपको सिर्फ जल्दी शुरुआत करनी होगी.
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Source: IOCL
























