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अप्रैल से पहले ही EPFO ने दे दी ये खुशखबरी, लौट आई तगड़ी पेंशन वाली ये सुविधा

नए बदलाव में ईपीएफओ ने साफ किया है कि यह कोई नई योजना नहीं है, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधान की बहाली है. वह कर्मचारी जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले हायर पेंशन का ऑप्शन चुना था, लाभ उठा सकते हैं.

प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है. दरअसल, एम्पलाइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) ने हायर पेंशन से जुड़ा पुराना प्रावधान फिर से बहाल कर दिया है. इसके तहत कुछ कर्मचारियों को आप अपनी वास्तविक बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता के आधार पर पेंशन में ज्यादा योगदान करने का ऑप्शन दोबारा मिल सकेगा.

1 सितंबर 2014 से पहले कर्मचारियों के पास यह ऑप्शन था, लेकिन वे पेंशन योगदान तय वेतन सीमा के बजाय अपनी वास्तविक सैलरी के आधार पर करें. खासकर पीएसयू कर्मचारियों ने इस सुविधा का फायदा उठाया था. लेकिन 2014 में सरकार ने पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15000 रुपये तय कर दी. इसके साथ ही न्यूनतम महीने मासिक पेंशन 1000 रुपये निर्धारित की गई और अधिकतम पेंशन करीब 7500 रुपये तक सीमित हो गई. इसके बाद वास्तविक सैलरी के आधार पर अधिक ज्यादा योगदान का ऑप्शन प्रभावी रूप से बंद हो गया.

अब हुआ है क्या बदलाव?

नए बदलाव में ईपीएफओ ने साफ किया है कि यह कोई नई योजना नहीं है. बल्कि पहले से मौजूद प्रावधान की बहाली है. अब वह कर्मचारी जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले हायर पेंशन का ऑप्शन चुना था, फिर से अपनी मूल सैलरी के आधार पर योगदान कर सकेंगे. हालांकि, यह सुविधा सभी सदस्यों पर लागू नहीं होगी. सिर्फ वही कर्मचारी इसका फायदा उठा सकेंगे, जिन्होंने पहले से यह ऑप्शन चुना था और जिनके नियोक्ता भी ज्यादा योगदान देने के लिए सहमत हो. इसमें 2014 के बाद वाले कर्मचारी जिनकी सैलरी इस सीमा से ज्यादा है, वह अपनी पेंशन योगदान को वास्तविक मूल सैलरी पर आधारित नहीं कर सकते हैं. जिससे उनके संभावित पेंशन लाभ सीमित हो जाते हैं.

क्या है EPF और EPS का मौजूदा नियम?

वर्तमान नियमों के अनुसार, कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी और डीए का 12 प्रतिशत ईपीएफ में जमा करते हैं. नियोक्ता के हिस्से में से 8.33 प्रतिशत राशि एम्पलाइज पेंशन स्कीम में जाती है, जबकि बाकी 3.67 प्रतिशत पीएफ खाते में जमा होती है. वहीं पेंशन का कैलकुलेशन पेंशन योग्य सैलरी पर होती है जो फिलहाल 15000 रुपये की सीमा से बंधी है. इसी कारण ज्यादातर कर्मचारियों को सीमित पेंशन मिलती है. 

किसे मिलेगा इन बदलावों का फायदा?

बताया जा रहा है कि यह बहाली मुख्य रूप से संगठित क्षेत्र या पीएसयू के उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, जिन्होंने 2014 से पहले हायर पेंशन का ऑप्शन अपनाया था. नए कर्मचारी या उन लोगों को इसका लाभ अपने आप नहीं मिलेगा, जिनके योगदान तय वेतन सीमा पर ही होता रहा है. वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार यह कदम 2014 में सैलरी सीमा तय होने के बाद से चल रही उलझनों को कुछ हद तक दूर करेगा. हालांकि यह भी माना जा रहा है कि इसका असर सीमित संख्या में ही लोगों पर देखने को मिलेगा. 

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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