शराब पीकर अगर चीखे-चिल्लाए तो क्या दर्ज होगा केस? होई कोर्ट पहुंच गया मामला
शराब पीकर सार्वजनिक जगह पर तेज आवाज में चिल्लाना अकेले में आपराधिक मामला नहीं माना जायगा. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि अश्लीलता या अनुचित व्यवहार के बिना FIR नहीं बनती और केस रद्द कर दिया.

शराब पीकर अकसर लोग हंगामा काटने लगते हैं. सरे आम चिल्लाने लगते हैं या फिर मारपीट पर उतारु हो जाते हैं. एक ऐसा ही केस महाराष्ट्र के पिंपरी इलाके से सामने आया है, जहां दो लोग शराब के नशे में एक दूसरे पर चिल्लाने लगे और पुलिस ने दोनों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कर लिया. पढ़ें पूरा मामला क्या है.
यह मामला महाराष्ट्र के पिंपरी पुलिस थाने क्षेत्र का है. दो व्यक्ति शराब के नशे में एक दूसरे से ऊंची आवाज में बात कर रहे थे, जिसके कारण वहां आसपास कि शांति भंग हो रही थी. इसके बाद पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 85(1) के तहत केस दर्ज कर लिया.
इस मामले की सुनवाई बॅाम्बे हाई कोर्ट में हुई. कोर्ट ने इस केस को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ तेज आवाज में चिल्लाना अपराध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि पुलिस अब तक कोई ऐसा सबूत पेश नहीं कर पाई है, जिससे यह साबित होता हो कि उन दोनों व्यक्तियों ने किसी अन्य व्यक्ति को परेशान किया है. दोनों व्यक्तियों के खिलाफ केवल ऊंची आवाज में बात करना अपराध घोषित नहीं हो जाता.
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हाई कोर्ट के जस्टिस मिलिंद एन. जाधव ने मामले की सुनवाई कर आदेश सुनाते हुए कहा कि शराब का केवल सेवन कर लेने से कोई कानूनी अपराध नहीं माना जा सकता है. किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए व्यवहार में अनुचित आधार का होना अधिक अनिवार्य है. कोर्ट ने यह भी कहा कि अश्लीलता, नैतिक रुप से अव्यवस्थित या आपत्तिजनक व्यवहार और अन्य गंभीर गतिविधि का आरोप नहीं लगाया जा सकता. केवल आवाज को ऊंचा कर लेना किसी भी नियमों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता.
कोर्ट ने दोनों लोगों के खिलाफ दर्ज सभी केसों को खारिज कर दिया. हालांकि कोर्ट ने दोनों पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और ये राशि किसी एनजीओ को देने का आदेश दिया.
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