IRCTC से 333 रुपए में बुक किया कमरा, नहीं मिला वेस्टर्न टॉयलेट, 20000 का हर्जाना भरेगा रेलवे
चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर 333 रुपये में विश्राम कक्ष बुक करने वाले 72 वर्षीय यात्री को बताई गई सुविधा नहीं मिली. इस मामले में चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने मुआवजा 3,000 से बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया.

अगर आप भी ट्रेन से सफर के दौरान रेलवे स्टेशन पर IRCTC के जरिए रिटायरिंग रूम बुक करते हैं, तो रेलवे से जुड़ा यह मामला आपके लिए फायदेमंद हो सकती है. चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर एक बुजुर्ग यात्री ने 333 रुपए में कमरा बुक किया था, लेकिन वहां उन्हें बुकिंग के दौरान बताई गई सुविधा नहीं मिली. इसके बाद उन्हें रिफंड के लिए भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. जिसके बाद उन्हें उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
यह मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा, जहां यात्री को मिलने वाले मुआवजे की रकम 3,000 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए कर दी गई. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है और उपभोक्ता आयोग ने क्यों यह आदेश दिया.
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश के मुताबिक, 72 साल के बुजुर्ग भारतेंदु सूद ने 12 मई 2024 के लिए IRCTC के माध्यम से चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन पर रिटायरिंग रूम बुक किया था. यात्री ने बुकिंग के समय ऑनलाइन पोर्टल पर कमरे में वेस्टर्न टॉयलेट होने की जानकारी दी गई थी, जिसे देखकर उन्होंने रूम बुक किया. उम्र और शारीरिक परेशानी के कारण उनके लिए वेस्टर्न टॉयलेट होना जरूरी था.
हालांकि, मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें वेस्टर्न टॉयलेट के बजाय इंडियन टॉयलेट मिला. यह देखकर यात्री ने कमरे का इस्तेमाल नहीं किया और चाबी वापस कर दी. इसके बावजूद उन्हें बुकिंग के 333 रुपए वापस नहीं मिले. बाद में रिफंड देने से भी इनकार कर दिया गया.
IRCTC और रेलवे ने क्या दी दलील?
IRCTC ने कहा कि वह और रेलवे अलग-अलग संस्थाएं हैं. उसके मुताबिक, रिटायरिंग रूम का रखरखाव और वहां मौजूद सुविधाओं की जिम्मेदारी रेलवे की है. वहीं, रेलवे ने भी जिम्मेदारी लेने से इनकार किया.
हालांकि, जिला उपभोक्ता आयोग ने 2 मार्च 2026 को 333 रुपए की बुकिंग रकम 9% सालाना ब्याज के साथ लौटाने और मानसिक परेशानी, उत्पीड़न व मुकदमेबाजी के लिए 3,000 रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था.
उपभोक्ता आयोग ने मुआवजा बढ़ाकर 20,000 रुपये क्यों किया?
राज्य उपभोक्ता आयोग ने माना कि यात्री को बुकिंग के समय बताई गई सुविधा नहीं मिली और रिफंड के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी. आयोग के मुताबिक, उपभोक्ता को हुई परेशानी की भरपाई केवल वास्तविक आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं होनी चाहिए. इसी आधार पर पहले दिए गए 3,000 रुपये के मुआवजे को बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दिया गया.
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