Train News: क्या आप यह जानते हैं क्यों रेलवे ट्रैक पर छोड़ा जाता है गैप? जानिए इसके पीछे की असली वजह
Indian Railway: आपमें से बेहद ही कम लोगों को इस बारे में जानकारी होगी कि, रेलवे ट्रैक पर गैप क्यों छोड़ा जाता है. तो आइए इस खबर में जानते हैं इसके पीछे के फिजिक्स के बारे में.

Railway Track Gaps: आपमें से ज्यादातर लोगों ने भारतीय रेलवे में सफर करते समय इस बात पर जरूर ध्यान दिया होगा कि आखिर रेलवे ट्रैक पर दो पटरियों के जॉउंट के बीच थोड़ा सा गैप क्यों छोड़ा जाता है. असल में यह ट्रेन यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक खास तरह से इंजीनियरिंग डिजाइन है. तो आइए इस खबर में जानते हैं कि आखिर क्यों रेलवे ट्रैक पर गैप छोड़ा जाता है.
पटरियों के बीच गैप छोड़ने का रहस्य?
दरअसल, रेलवे पटरियों के बीच गैप छोड़ने की असली वजह और कुछ नहीं बल्कि फिजिक्स का एक नियम यहां पूरी तरह से लागू होता है, जिसे दूसरे शब्द में थर्मल एक्सटेंनशन कहा जाता है. यह तो सभी जानते हैं कि रेलवे ट्रेक को स्टील से तैयार किया जाता है. जिस पर विज्ञान का मानना है कि, धातुएं गर्म होने पर अपने आप फैलना शुरू हो जाती हैं और ठंडी होने पर सिकुड़ने लगती हैं.
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ऐसे में गर्मियों के मौसम में तेज धूप और भारी ट्रेनों के गुजरने से तो पटरियों का तापमान काफी तेजी से बढ़ने लगता है, जिसकी वजह से स्टील की लंबाई में विस्तार देखने को मिलता है. तो वहीं, रेलवे पटरियों के बीच का यह गैप थर्मल एक्सपैंशन के दौरान उन्हें फैलने के लिए अलग से जगह दे देता है.
गैप न छोड़ने पर बकलिंग का हो सकता है खतरा
तो वहीं, अगर पटरियों के बीच गैप न छोड़ा जाए तो, जगह नहीं मिलने की वजह से पटरियां बीच से मुड़ सकती है, जिससे दूसरे शब्द में बकलिंग कहा जाता है. इसके अलावा, मुड़े हुए ट्रैक की वजह से ट्रेन असंतुलित होकर रेलवे पटरी से उतर भी सकती है, जिससे एक बड़ी दुर्घटना का खतरा पैदा भी हो सकता है.
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आधुनिक तकनीक और क्या है सुरक्षा के नियम?
हांलाकि, आज के समये में रेलवे में लंबी दूरी के लिए एक खास तरह के वेल्डेड ट्रैक्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है, जो खास इंजीनियरिंग तकनीकों से स्ट्रेस को बैलेंस करने का काम करता है. इतना ही नहीं, भारतीय रेलवे अब वेल्डिंग की गुणवत्ता को सुधारने के लिए मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग जैसी आधुनिक तकनीक का लगातार इस्तेमाल कर रही है, ताकि रेल सफर को पूरी तरह से पहले के मुताबिक ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सके.
Source: IOCL

























