नए श्रम कानून का बड़ा फैसला, 2 बच्चों तक हर महीने 1000 तक का क्रेच अलाउंस पाएंगे कर्मचारी
Creche Allowance: नए लेबर कोड में सरकार की ओर से कामकाजी माता-पिता के लिए बड़ा इंतजाम किया गया है. जिन कामकाजी पेरेंट्स के बच्चों की उम्र 6 साल से कम है, उन्हें 500 रुपए का क्रेच अलाउंस दिया जाएगा.

New Labour Rule: केंद्र सरकार के नए लेबर कोड में ऐसे कर्मचारियों को बड़ी राहत दी गई है, जो बाल बच्चेदार हैं. सरकार अब कर्मचारियों के बच्चों को क्रेच के सुविधा देने की योजना पर काम कर रही है. हालांकि नए लेबर कोड में यह नियम लागू किया गया है कि कर्मचारियों के बच्चों को क्रेच की सुविधान नहीं मिलने पर 500 रुपए हर महीने दिए जाएंगे.
दरअसल कुछ परिवार ऐसे होते हैं, जहां माता-पिता दोनों ही काम पर जाते हैं. ऐसे में उनकी बच्चों की देखभाल में परेशानी आती है. कर्मचारियों की इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार क्रेच सुविधा उपलब्ध कराने जा रही है.
कंपनियों और संस्थानों में हर एक कर्मचारी को इस नए नियम का फायदा उठाने का मौका मिलेगा. क्रेच अलाउंस का लक्ष्य बच्चों की सही देखभाल है. इस नए नियम के अनुसार, कम से कम 500 रुपए हर महीने बच्चे के लिए दिए जाएंगे. इस नियम के लाभार्थी सबसे ज्यादा विधवा महिलाएं या सिंगल पैरेंट होंगे.
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क्रेच अलाउंस नियम क्या है?
नए लेबर कोड के रूल 37(Viii)(b) के अनुसार अगर कोई महिला कर्मचारी विधवा है या सिंगल पैरेंट है और उनके बच्चों की उम्र 6 साल से कम है तो कंपनी उनके बच्चों को क्रेच सुविधा देगी. सरकार ने साफ कहा है कि हर बच्चे को 500 रुपए का अलाउंस हर महीने किया जाएगा. बताया जा रहा है कि आगे चलकर केंद्र सरकार इस राशि में बदलाव भी ला सकती है.
आपको बता दें कि किसी कर्मचारी या मजदूर के दो बच्चे हैं तो उनको ये अलाउंस दिया जाएगा. अगर दूसरी बार मां बनने पर महिला के जुड़वां बच्चे होते हैं और बच्चों कि संख्या दो से ज्यादा हो जाती है, फिर भी वो नए नियम का लाभ उठा सकेंगे.
कौनसी कंपनी के लिए ये नियम लागू होगा?
ये नियम Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSHWC) Central Rules 2026 के अंतर्गत लागू किया गया है. ये रेलवे, ऑयल सेक्टर, एयर ट्रांसपोर्ट सर्विसेज, टेलीकॉम सेक्टर, खदोनें, बैंक और इंश्योरेंस कंपनियां जैसो में लागू है.
कर्मचारियों के लिए एक और जरूरी सूचना
एक्सपर्ट्स के अनुसार केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों के कर्मचारियों के लिए यह नियम बनाया गया है. इस नियम से माता पिता कर्मचारियों को काफी हद तक राहत मिलेगी.
























