बीमा खरीद रहे हो? जानिए साइबर ठगों के 5 नए और खतरनाक पैंतरे
ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदते समय फर्जी कॉल, वेबसाइट, रिन्यूअल ऑफर और पेमेंट लिंक जेसी चीजों से ठगी का खतरा हमेशा रहता है. हमेशा आधिकारिक चैनल से ही जांच करें और OTP व बैंकिंग जानकारी साझा न करें.

ऑनलाइन इंश्योरेंस खरीदना और पॉलिसी को मैनेज करना अब काफी आसान हो गया है. ग्राहक मोबाइल के जरिए पॉलिसी खरीदने, प्रीमियम जमा करने, जानकारी अपडेट करने और सर्विस रिक्वेस्ट जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन डिजिटल सुविधा बढ़ने के साथ साइबर ठगों के लिए लोगों को निशाना बनाने के नए रास्ते भी खुल गए हैं.
ठग फर्जी कॉल, मैसेज, वेबसाइट और पेमेंट लिंक के जरिए खुद को इंश्योरेंस कंपनी या सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेते हैं. कई बार उनके पास ग्राहक की पॉलिसी से जुड़ी कुछ जानकारी भी होती है, जिससे फर्जी बातचीत असली लग सकती है. ऐसे मामलों में OTP, पासवर्ड, बैंकिंग डिटेल या पॉलिसी से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा करना आपको भारी पड़ सकता है. ऐसे में समझिए ठगों से कैसे बचा जा सकता है.
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1. बंद पड़ी पॉलिसी पर बोनस का झांसा
ठग पॉलिसीधारक को फोन करके बता सकते हैं कि उसकी पुरानी या निष्क्रिय पॉलिसी पर बोनस या कोई आर्थिक लाभ मिला है. रकम हासिल करने के लिए वे पॉलिसी दोबारा शुरू कराने या किसी शुल्क के भुगतान की मांग कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में तुरंत पैसा देने के बजाय कंपनी से खुद संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए.
2. नियामक या सरकारी अधिकारी बनकर कॉल
इस तरह के फ्रॉड में ठग खुद को बीमा नियामक या सरकारी विभाग का अधिकारी बताते हैं. वे पॉलिसी रिकॉर्ड के सत्यापन या किसी बकाया रकम का हवाला देकर ग्राहक से जानकारी या भुगतान मांग सकते हैं. आधिकारिक नाम या नंबर देखकर भी भरोसा नहीं करना चाहिए.
3. इंश्योरेंस कंपनी का कर्मचारी बनकर ठगी
ठग बीमा कंपनी का प्रतिनिधि बनकर पॉलिसी में समस्या होने की बात कह सकते हैं. कई बार वे पॉलिसी से पैसा वापस दिलाने या बेहतर रिटर्न के लिए दूसरी योजना में जाने का लालच भी देते हैं. इसके बाद फर्जी लिंक, फॉर्म या पेमेंट रिक्वेस्ट भेजी जाती है.
4. इंश्योरेंस से जुड़े लोन या फायदे का लालच
व्हाट्सऐप, SMS, ईमेल या सोशल मीडिया के जरिए पॉलिसी के आधार पर लोन या किसी खास लाभ की पेशकश की जा सकती है. ठग असली बीमा कंपनी या बैंक का नाम और लोगो इस्तेमाल करके भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं. इसके बाद प्रोसेसिंग फीस या दस्तावेज मांगे जा सकते हैं.
5. फर्जी वेबसाइट और पेमेंट लिंक
कुछ ठगी में ग्राहक को ऐसी वेबसाइट या लिंक भेजा जाता है जो देखने में असली इंश्योरेंस कंपनी की साइट जैसा लगता है. लिंक खोलने के बाद लॉगिन डिटेल, कार्ड की जानकारी, बैंकिंग डिटेल या OTP मांगा जा सकता है. ऐसी जानकारी देने से खाते में मौजूद रकम भी खतरे में पड़ सकती है.
ग्राहक कैसे रहें सुरक्षित?
इंश्योरेंस से जुड़े काम के लिए कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप सीधे खोलें. किसी अनजान लिंक से भुगतान न करें और OTP, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें. अगर कोई बोनस,लोन या पॉलिसी से जुड़े लाभ के बदले तुरंत पैसे मांगता है, तो पहले कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर से इसकी पुष्टि करें.
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