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प्लेन क्रैश में जान गंवाने पर कितना मुआवजा और इंश्योरेंस मिलता है, जान लें नियम

Ahmedabad Air India Plane Crash: प्लेन हादसे में जान गंवाने वाले यात्रियों को मुआवजा और इंश्योरेंस दोनों मिलते हैं. क्या तय किए गए हैं इसके लिए नियम? जानें अहमदाबाद हादसे में कितना मिलेगा मुआवजा.

Ahmedabad Air India Plane Crash: गुजरात के अहमदाबाद में एक भीषण विमान हादसा सामने आया है. अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया. पायलट और क्रू मेंबर के समेत इस फ्लाइट में कुल 242 लोग सवार थे.  जानकारी के मुताबिक 133 यात्रियों के शव बरामद किए जा चुके हैं. दुर्घटना स्थल पर राहत और बचाव का काम जारी है.

अनुमान है कि जान गंवाने वाले यात्रियों की संख्या में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है. किसी प्लेन क्रैश में अगर कोई इंसान जान गंवा देता है. तो उसे मुआवजा दिया जाता है. क्या सिर्फ एयरलाइंस कंपनी उन्हें मुआवजा देती है या सरकार भी देती है. इसके अलावा अगर उनका कोई इंश्योरेंस होता है. तो उसका कवर भी उन्हें मिलता है? चलिए आपको बताते हैं क्या होते हैं इसके लिए नियम. 

मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत मिलता है मुआवजा

अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया प्लेन हादसे में 130 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. और फिलहाल इस आंकड़े में इजाफा देखने को मिल सकता है. आपको बता दें विमान हादसे में जान गंवाने वाले सभी यात्रियों को एयरलाइन कंपनी की ओर से मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है. इस हादसे में भी एयरलाइन कंपनी की ओर से मुआवजा दिया जाएगा.

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दुनिया भर में हवाई यात्रियों और उनके सामान से संबंधित नुकसान के मामले में एयरलाइन की जवाबदेही तय करने के लिए साल 1999 में मॉन्ट्रियल कन्वेंशन हुआ था.  इस  अंतरराष्ट्रीय संधि पर भारत ने भी साइन किए थे. साल 2009 में भारत ने मॉन्ट्रियल कन्वेंशन अपनाया था. जिसके तहत भारत से उड़ने वाली कोई भी अंतरराष्ट्रीय उड़ान इस कन्वेंशन के तहत आती है. 

एयरलाइन कंपनियां देती हैं इतना मुआवजा

मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत विमान हादसे में किसी यात्री की मौत हो जाने पर उसे एयरलाइंस की तरफ 1,28,821 एसडीआर यानी स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स का मुआवाज देना होगा. यानी तकरीबन 1.4 करोड़ भारतीय रुपये दिए जाएंगे. आपको बता दें  स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स यानी एसडीआर आईएफ यानी इंटरनेशनल मोनेटरी फंड की ओर से इस्तेमाल की जाने वाली आर्टिफिशियल करेंसी एक तरह से कहें तो ग्लोबल करंसी कन्वर्टर है.

मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के नियमों के हिसाब से बात की जाए तो इस विवान हादसे में जान गंवाने वाले सभी यात्रियों को 1.4 करोड़ भारतीय रुपये दिए जाएंगे. आपको बता दें मुआवजे की रकम बढ़ाई भी जा सकती है. बता दें इसमें गंभीर रूप से घायलों को भी मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है. 

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अलग से इंश्योरेंस का भी मिलता है पैसा

बहुत से ऐसे लोग भी होते हैं. जो यात्रा के दौरान पहले से ही ट्रैवल इंश्योरेंस लेकर चलते हैं. ऐसे में अगर किसी की यात्री की प्लेन क्रैश में मौत हो जाती है. तो फिर उसे ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत एक्सीडेंटल डेथ कवरेज में 25 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक मिलते है. तो वहीं गंभीर रूप से घायल होने पर 5-10 लाख रुपये मिलते है. तो हॉस्पिटल में एडमिट होने के लिए भी डेली अलाउंस मिलता है.  

क्या सरकार भी देती है मुआवजा?

अहमदाबाद प्लेन क्रैश हादसे में बहुत से लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा है क्या सरकार इस हादसे में पीड़ितों को मुआवजा देगी. तो आपको बता दें सीधे तौर पर विमान हादसों में सरकार की तरफ से मुआवजा नहीं दिया जाता. ऐसे हादसों में मुआवजे की जिम्मेदारी पूरी तरह से एयरलाइन कंपनी की होती है. लेकिन अगर कोई मामला बहुत बड़े स्तर का है. जिसे राष्ट्रीय आपदा के तहत देखा जा सकता है तो सरकार पीड़ितों के लिए और जान कमाने वालों के लिए मुआवजा का ऐलान कर सकती है. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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