पत्नी या वोडाफोन का पिल्ला... मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले से यूजर्स क्यों खफा?
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, पत्नी से हर हाल में पति के पीछे चलने की उम्मीद नहीं की जा सकती. जानें फिर क्यों कोर्ट के द्वारा ‘वोडाफोन पग’ वाली टिप्पणी पर हुआ विवाद.

मद्रास हाईकोर्ट की एक टिप्पणी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. मामला को केवल एक तलाक से जुड़ा था, लेकिन सुर्खियों में कोर्ट के द्वारा दिया गया एक उदाहरण आ गया. असल में कोर्ट ने पत्नी की तुलना वोडाफोन के पुराने विज्ञापन में दिखने वाले ‘पग’ यानी कुत्ते से कर दी. अदालत ने कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि पति जहां भी जाए, उसके पीछे उसी तरह चलती रहे जैसे वोडाफोन के चर्चित विज्ञापन में पग अपने मालिक के पीछे जाता था.
आखिर क्या था पूरा मामला?
दरअसल मामला तमिलनाडु के शिवगंगा की फैमिली कोर्ट से जुड़ा है. जहां पति-पत्नी की शादी सितंबर 1992 में हुई थी और उनके चार बच्चे हैं. पति नौकरी के सिलसिले में शिवगंगा से मुंबई चला गया था, जबकि पत्नी उसके साथ नहीं गई. दोनों लंबे समय से अलग रह रहे थे. जब मामला हाईकोर्ट पहुंचा, तब यह दूरी करीब 16 साल की हो चुकी थी और पति की उम्र 67 वर्ष है. पति ने पत्नी पर अवैध संबंध का आरोप लगाते हुए तलाक मांगा था. हालांकि फैमिली कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी. ट्रायल कोर्ट का तर्क था कि पति ने खुद पत्नी को अपने साथ नहीं रखा और इस तरह वह अपनी ही गलती का फायदा उठाकर तलाक नहीं मांग सकता.
हाईकोर्ट ने क्यों स्वीकार किया तलाक का फैसला?
जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस एम.डी. सुमति की डिवीजन बेंच ने इस सोच को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि हर परिस्थिति में पति-पत्नी का साथ रहना व्यावहारिक नहीं होता. उदाहरण के तौर पर कोर्ट ने सैनिक की नौकरी का हवाला दिया—आर्मी बैरक में हर बार परिवार के साथ वैवाहिक घर बनाना संभव नहीं होता. इसी तरह पत्नी खुद नौकरी कर रही हो तो उसका अपना करियर और जिम्मेदारियां भी हो सकती हैं. इसी मामले में अदालत ने वोडाफोन के उस मशहूर विज्ञापन का जिक्र किया, जिसमें पग हर जगह अपने मालिक के पीछे चलता दिखाई देता था. यानी कोर्ट का मूल संदेश यह था कि शादी का मतलब यह नहीं कि पति या पत्नी अपनी नौकरी, करियर और व्यक्तिगत परिस्थितियों को छोड़कर हर जगह एक-दूसरे के साथ चलें.
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फिर यूजर्स क्यों हुए नाराज?
लोग कानूनी नतीजे से ज्यादा उसकी भाषा को लेकर नाराज है. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि जब अदालत विवाह में समानता और व्यावहारिकता की बात कर रही थी, तब पत्नी के लिए पालतू जानवर का उदाहरण देने की जरूरत क्यों पड़ी? सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता चारु माथुर ने भी इसी बिंदु पर आपत्ति जताई. उनका कहना था कि पत्नी विवाह में बराबर की भागीदार है, किसी की पालतू नहीं.
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