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Wind या Solar, कौन-सा एनर्जी सोर्स है ज्यादा एफिशिएंट? यहां जानें

Wind Vs Solar Energy: विंड और सोलर दोनों को ही एनर्जी का क्लीन सोर्स माना जाता है, लेकिन दोनों में से ज्यादा क्लीन और एफिशिएंट कौन-सा सोर्स है? इस आर्टिकल में इन दोनों का कंपेरिजन जानते हैं.

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  • पवन ऊर्जा सौर पैनलों से अधिक कुशल, रात में भी बिजली।
  • पवन टर्बाइन को अधिक जगह, लागत और शोर की समस्या।
  • सौर पैनल कम कुशल पर स्थापित करना और रखरखाव आसान।

Wind Vs Solar Energy: विंड और सोलर दोनों ही रिन्यूएबल एनर्जी के बड़े सोर्स हैं. दोनों ही अनलिमिटेड है और बिजली जनरेट करते समय कोई ग्रीनहाउस गैस पैदा नहीं करते. इनसे प्रदूषण नहीं होता, जो ग्लोबल वॉर्मिंग को बढ़ने से बचा सकता है. लागत के हिसाब से भी देखें तो अधिकतर जगहों पर सोलर और विंड एनर्जी फॉसिल फ्यूल के मुकाबले सस्ती पड़ती है. इस लिहाज से ये दोनों ही तेल और कोयले से ज्यादा फायदेमंद हैं, लेकिन सोलर एनर्जी और विंड में से ज्यादा एफिशिएंट कौन-सा सोर्स है? आज हम इन दोनों का कंपेरिजन कर इनके फायदे-नुकसान जानेंगे.

Wind Vs Solar Energy: किसकी एफिशिएंसी ज्यादा?

जब एफिशिएंसी की बात आती है तो विंड एनर्जी आगे है. विंड टरबाइन अपने पास से गुजरने वाली लगभग आधी हवा को बिजली में बदल देती है. यानी इसकी एफिशिएंसी लगभग 50 प्रतिशत है, जबकि सोलर पैनल इस मामले में पीछे रह जाते हैं. सोलर पैनल 20-25 प्रतिशत एफिशिएंसी के साथ आते हैं. यानी सोलर पैनल पर जितनी सनलाइट पड़ती है, उसमें से करीब 25 प्रतिशत को ही ये बिजली में कन्वर्ट कर पाते हैं. 


Wind या Solar, कौन-सा एनर्जी सोर्स है ज्यादा एफिशिएंट? यहां जानें

क्या हैं विंड एनर्जी के फायदे-नुकसान?

फायदे

  • एफिशिएंसी के अलावा अवेलिबिलिटी को लेकर भी विंड एनर्जी आगे है. आजकल ऐसी टर्बाइन आ गई है, जो एकदम धीमी रफ्तार से चल रही हवा से भी बिजली बना सकती हैं. जैसे-जैसे हवा की रफ्तार बढ़ती जाती है, इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन भी बढ़ता जाता है. रात के समय हवा चलने पर भी विंड टरबाइन बिजली बनाती रहती है. यह सोलर पैनल की तरह केवल दिन-दिन में काम नहीं करती.
  • पिछले कुछ समय से विंड टरबाइन का साइज बढ़ा है. वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के मुताबिक, विंड टरबाइन लगभग 60 प्रतिशत अधिक लंबी हो गई है. यह इसलिए जरूरी है क्योंकि ग्राउंड ऊंचाई बढ़ने के साथ-साथ हवा भी तेज होती जाती है. जमीन पर बिल्डिंग और पेड़ों आदि के कारण हवा का बहाव प्रभावित होता है, लेकिन ऊंचाई पर ऐसी कोई दिक्कत नहीं आती. इसलिए ज्यादा लंबी टरबाइन ज्यादा बिजली बनाती है.

नुकसान

विंड एनर्जी का एक बड़ा नुकसान यह है कि आप टरबाइन को हर जगह इंस्टॉल नहीं कर सकते. हालांकि, अभी घरों पर लगने वाली छोटी टरबाइन आ गई हैं, लेकिन इनका यूज अभी तक सीमित ही है. विंड टरबाइन के लिए खाली जगह की जरूरत होती है. दूसरा इनके चलने से काफी शोर होता है, जिस कारण इन्हें रेजिडेंशियल इलाकों से दूर लगाया जाता है. यही कारण है कि ये सोलर पैनल की तरह हर घर तक नहीं पहुंची हैं. विंड टरबाइन की कीमत भी इसे पॉपुलर होने से रोक रही है. बड़ी विंड टरबाइन के लिए आपको मोटा पैसा खर्च करना पडे़गा. 


Wind या Solar, कौन-सा एनर्जी सोर्स है ज्यादा एफिशिएंट? यहां जानें

सोलर एनर्जी के फायदे-नुकसान क्या हैं?

नुकसान

  • जैसा हम ऊपर बात कर चुके हैं, सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम होती है और ये रात के समय काम नहीं करते. बारिश के मौसम में बादल घिर जाने पर भी इनकी एफिशिएंसी कम हो जाती है. इसलिए इन्हें एनर्जी का एकदम भरोसेमंद सोर्स नहीं कहा जा सकता.
  • इसका दूसरा नुकसान ये है कि सोलर पैनल सिलिकॉन और दूसरे रेयर मेटल्स से बने होते हैं, जिनके लिए माइनिंग की जरूरत होती है. माइनिंग के कारण क्लाइमेट पर बुरा असर पड़ता है. अगर इसे ध्यान में रखा जाए तो यह विंड एनर्जी जैसा क्लीन एनर्जी सोर्स नहीं है.

फायदे

सोलर पैनल की एफिशिएंसी कम होने के बावजूद इन्हें ज्यादा लोग यूज कर रहे हैं. इंस्टॉलेशन और मेंटिनेंस आसान होना इसकी सबसे बड़ी वजह है. सोलर पैनल को लगाना एकदम आसान है और इसके लिए ज्यादा स्पेस की जरूरत भी नहीं पड़ती. आप घर की बालकनी या छत पर सोलर पैनल आसानी से इंस्टॉल कर सकते हैं. ऊपर से इनकी कीमत भी विंड टरबाइन के मुकाबले काफी कम होती है. एक बार इंस्टॉल करने के बाद पैनल को ज्यादा मेंटिनेंस की जरूरत नहीं होती और यह कई सालों तक सनलाइट को इलेक्ट्रिसिटी में कन्वर्ट करता रहेगा. इससे न कोई शोर होता है और इन ही बहुत खुले स्पेस की जरूरत पड़ती है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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