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क्या होती है Vibe Coding? क्यों बढ़ती लोकप्रियता बन सकती है सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी कमजोरी

What is Vibe Coding: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की दुनिया तेजी से बदल रही है. अब कोड लिखने के लिए हर लाइन को खुद टाइप करना जरूरी नहीं रहा.

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What is Vibe Coding: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की दुनिया तेजी से बदल रही है. अब कोड लिखने के लिए हर लाइन को खुद टाइप करना जरूरी नहीं रहा. इसी बदलाव के बीच एक नया ट्रेंड सामने आया है जिसे Vibe Coding कहा जा रहा है. सुनने में यह जितना आसान और मजेदार लगता है हकीकत में उतना ही खतरनाक भी हो सकता है.

Vibe Coding आखिर है क्या?

Vibe Coding का मतलब है AI टूल्स को साधारण भाषा में निर्देश देकर कोड लिखवाना. इसमें डेवलपर खुद लॉजिक या स्ट्रक्चर पर ज्यादा ध्यान नहीं देता बल्कि AI से कहता है “एक ऐसा ऐप बना दो जो यूजर लॉगिन संभाले” या “एक वेबसाइट डिजाइन कर दो जो फास्ट लोड हो.” इसके बाद AI अपने आप पूरा कोड तैयार कर देता है.

इस प्रक्रिया में डेवलपर को लगता है कि काम तेजी से हो रहा है और प्रोडक्ट जल्दी तैयार हो गया लेकिन असल में कोड के अंदर क्या चल रहा है इसकी समझ काफी हद तक खत्म हो जाती है.

क्यों तेजी से बढ़ रहा है ये ट्रेंड?

Vibe Coding इसलिए लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि यह समय और मेहनत दोनों बचाता है. नए प्रोग्रामर बिना ज्यादा तकनीकी ज्ञान के भी काम करने लगते हैं. स्टार्टअप्स और छोटी कंपनियों को लगता है कि वे कम खर्च में जल्दी सॉफ्टवेयर बना सकती हैं. AI टूल्स की आसान उपलब्धता ने इस चलन को और हवा दे दी है.

मॉडर्न सॉफ्टवेयर के लिए कहां से पैदा होता है खतरा?

सबसे बड़ा खतरा है कोड की समझ का अभाव. जब डेवलपर खुद कोड नहीं लिखता, तो उसमें छुपी गलतियों, सिक्योरिटी होल्स और परफॉर्मेंस इश्यूज़ को पकड़ना मुश्किल हो जाता है. AI कई बार ऐसा कोड बना देता है जो देखने में सही लगता है लेकिन बड़े स्केल पर फेल हो सकता है.

इसके अलावा, सिक्योरिटी एक बड़ा मुद्दा बन जाता है. Vibe Coding से बने ऐप्स में डेटा लीक, कमजोर ऑथेंटिकेशन और अनजाने बैकडोर जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं जिनका पता तब चलता है जब नुकसान हो चुका होता है.

क्या डेवलपर्स की स्किल्स कमजोर पड़ रही हैं?

एक और चिंता यह है कि Vibe Coding पर ज्यादा निर्भरता से डेवलपर्स की मूल प्रोग्रामिंग स्किल्स कमजोर हो सकती हैं. लॉजिक बनाना, बग ढूंढना और सिस्टम को समझना ये सभी क्षमताएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं. आने वाले समय में ऐसे इंजीनियर्स बढ़ सकते हैं जो AI चलाना जानते हों लेकिन सॉफ्टवेयर की बुनियादी समझ न रखते हों.

क्या इसका सही इस्तेमाल संभव है?

Vibe Coding पूरी तरह गलत नहीं है अगर इसे सहायक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए. AI से कोड जनरेट कराने के बाद उसकी अच्छी तरह समीक्षा करना, टेस्टिंग करना और जरूरत के मुताबिक सुधार करना बेहद जरूरी है. इंसानी समझ और AI की ताकत का संतुलन ही इसका सही समाधान है.

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