नए फोन में कितनी होनी चाहिए रैम? खरीदते समय अपनी जरूरत के हिसाब से ऐसे लगाएं पता
नया फोन खरीदते समय रैम पर ध्यान देना जरूरी है. ज्यादा रैम का मतलब है कि आपका फोन आसानी से मल्टीटास्किंग कर सकेगा और सारे टास्क बिना किसी झंझट के पूरे किए जा सकेंगे.

अगर आप नया फोन लेने जा रहे हैं तो बाकी फीचर्स के साथ रैम यानी रैंडम एक्सेस मेमोरी का ध्यान रखना भी जरूरी है. अधिकतर लोग इस पर ध्यान नहीं देते और बाद में फोन के स्लो होने या मल्टीटास्किंग न कर पाने जैसी शिकायतें करते हैं. बता दें कि फोन में रैम जितनी ज्यादा होगी, आपके लिए मल्टीटास्किंग करना उतना ही आसान हो जाता है. आइए जानते हैं कि रैम फोन में क्या काम करती है और आपको अपनी जरूरत के हिसाब से कितनी रैम वाला फोन लेना चाहिए.
क्या होती है रैम?
RAM फोन में शॉर्ट-टर्म मेमोरी की तरह काम करती है. यह वॉलेटाइल मेमोरी होती है, जो फोन में ओपन ऐप्लिकेशन्स और प्रोसेस को रन करती है. इसका मतलब है कि जब आप कोई ऐप ओपन करते हैं या दूसरी ऐप पर जाते हैं तो RAM के कारण यह सबकुछ स्मूद तरीके से हो जाता है. फोन में ज्यादा रैम होने का मतलब है कि आप एक साथ कई टास्क कंप्लीट कर सकते हैं और फोन हैंग नहीं होगा.
फोन में कितनी होनी चाहिए रैम?
- अगर आप बेसिक फंक्शन जैसे कॉलिंग, वेबस ब्राउजिंग और सोशल मीडिया यूज के लिए फोन ले रहे हैं तो 4GB तक रैम वाला फोन लिया जा सकता है.
- बेसिक फंक्शन के अलावा अगर आपको बेसिक गेमिंग जैसे टास्क करने हैं तो 6GB रैम पर्याप्त रहेगी.
- बेसिक फंक्शन के साथ अगर आप एडवांस गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और डॉक्यूमेंट एडिटिंग आदि के लिए फोन चाहिए तो उसमें 8GB रैम होनी चाहिए.
- अगर आप हाई-एंड गेमिंग, हाई क्वालिटी में कंटेट स्ट्रीमिंग और वीडियो एडिटिंग जैसे टास्क के लिए फोन ले रहे हैं तो 12GB रैम वाला फोन चुनें. आजकल कई कंपनियां अपने स्मार्टफोन में 12GB रैम देने लगी हैं.
- अगर आपको वीडियो एडिटिंग, हाई क्वालिटी वीडियो रिकॉर्डिंग, हैवी गेमिंग और स्प्लिट स्क्रीन टास्क आदि के लिए फोन चाहिए तो 16GB रैम के साथ जाया जा सकता है. 16GB रैम वाले फोन के लिए आपको जेब पर काफी जोर डालना होगा.
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