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ये AI कंपनी दिमाग पढ़ने के बदले देगी पैसे! जानिए क्या है पूरा मामला

Artificial Intelligence: इस कंपनी का नाम Conduit है और इसका मकसद किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी लगने वाली टेलीपैथी टेक्नोलॉजी को तैयार करना है.

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  • Meta और Neuralink भी ऐसे ही ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस पर काम कर रहे।

Artificial Intelligence: टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस काफी तेजी से विस्तार कर रहा है. अब लोग एआई चैटबॉट्स की मदद से अपने ज्यादातर काम कर रहे हैं. इतना ही नहीं, अब एआई लोगों से बेहतर तरीके से काम करने में भी सक्षम है. इसी कड़ी में बता दें कि अब एआई कंपनियां इंसानों के दिमाग और मशीन के बीच सीधा कनेक्शन बनाने की दिशा में भी तेजी से काम कर रही हैं. बता दें कि एक AI स्टार्टअप ऐसा सिस्टम तैयार करने की कोशिश कर रहा है जो इंसान के दिमाग को समझकर उन्हें टेक्स्ट में बदल सकेगा.

इस कंपनी ने किया कमाल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस कंपनी का नाम Conduit है और इसका मकसद किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी लगने वाली टेलीपैथी टेक्नोलॉजी को तैयार करना है. इस कंपनी की सबसे बड़ी खास बात ये है कि कंपनी को अब इंसानों के दिमाग का डेटा चाहिए. इसीलिए कंपनी लोगों के दिमाग के डेटा के बदले उन्हें पैसे ऑफर कर रही है.


ये AI कंपनी दिमाग पढ़ने के बदले देगी पैसे! जानिए क्या है पूरा मामला

AI से करनी होगी बात

जानकारी के अनुसार, इस रिसर्च में हिस्सा लेने वाले लोगों को सिर्फ चुपचाप बैठना नहीं है. उन्हें AI सिस्टम के साथ बातचीत भी करनी होती है. कुछ सेशन में इंसान AI से सुनता और बोलता है जबकि कुछ एक्टिविटी में पढ़ने और टाइप करने का काम भी शामिल है.

कंपनी का मकसद ऐसे सेशन से ज्यादा से ज्यादा न्यूरल डेटा जुटाना है. इसके लिए इंसानों को दो घंटे के अंदर ज्यादा से ज्यादा बोलने या टाइप करने के लिए कहा जाता है. हालांकि इसमें एक खास शर्त भी है. जो लोग इसमें भाग ले रहे हैं उन्हें कीबोर्ड पर बिना अपनी उंगलियों को देखे टाइप करना आना चाहिए. इससे रिसर्च के दौरान टाइपिंग और दिमागी एक्टिविटी के बीच संबंध को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है.

इस्तेमाल होगा ये खास हेलमेट

जानकारी के मुताबिक, Conduit अपने एक AI मॉडल पर काम कर रही है जिसको ट्रेन करने के लिए उसे इंसान के दिमाग से मिलने वाले न्यूरल डेटा की जरूरत पड़ रही है. इसीलिए कंपनी ऐसे लोगों को रिसर्च के लिए चुन रही है जो अपने दिमाग के डेटा और रिकॉर्ड्स को इस्तेमाल के लिए देने के लिए तैयार हों.

आपको बता दें कि जो भी लोग इस रिसर्च में शामिल होंगे उन्हें करीब 2 घंटों के लिए एक खास हेलमेट पहनना होगा. इस हेलमेट में इलेक्ट्रोड लगे होते हैं जो दिमाग में हो रही एक्टिविटी को रिकॉर्ड करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे सेटअप का वजन करीब चार पाउंड यानी लगभग 1.8 किलोग्राम है.

बता दें कि इस दो घंटों के बदले कंपनी जो लोग इस रिसर्च मे शामिल हैं उन्हें 55 डॉलर तक यानी करीब 5,200 रुपये पेमेंट कर रही है. कंपनी का कहना है कि एक व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा 32 सेशन में ही हिस्सा ले सकता है.

पहली बार नहीं हो रही ये रिसर्च

जानकारी के अनुसार, इंसान के दिमाग को मशीन से समझने का सपना आज का नहीं है. करीब एक सदी पहले भी कुछ लोगों ने ऐसी टेक्नोलॉजी बनाने का दावा किया था. 1908 में Columbia University के प्रोफेसर Frederick Peterson ने एक ऐसे डिवाइस की बात की थी जिसे उन्होंने psychometer बताया था और दावा किया था कि इससे इंसाने के दिमाग में चल रही चीजों को पढ़ा जा सकता है.

हालांकि उस समय ऐसी टेक्नोलॉजी के दावे वैज्ञानिक रूप से सही साबित नहीं हो पाए थे. लेकिन आज स्थिति बिलकुल अलग है. एडवांस न्यूरोसाइंस, मशीन लर्निंग और पैटर्न रिकग्निशन की मदद से वैज्ञानिक अब दिमाग से मिलने वाले मैसेज को समझने में पहले के मुकाबले काफी आगे बढ़ चुके हैं.


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Meta और Neuralink भी कर रहे हैं एक्सपेरिमेंट

आपको बता दें कि इस क्षेत्र में Conduit ही सिर्फ एक कंपनी नहीं है. दरअसल, Meta भी ऐसे सिस्टम पर काम कर चुकी है जो ब्रेन स्कैन से मिलने वाले मैसेज को टेक्स्ट में बदलने की दिशा में काम करते हैं. कंपनी की Brain2Qwerty टेक्नोलॉजी को इस क्षेत्र में शुरुआती कदमों में से एक माना गया है. इसका इस्तेमाल उन लोगों की मदद के लिए किया जा सकता है जो न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के कारण नॉर्मल तरीके से बातचीत नहीं कर पाते हैं.

वहीं Elon Musk की कंपनी Neuralink के ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस से जुड़े एक्सपेरिमेंट्स में भी ऐसे परफॉर्मेंस सामने आ चुके हैं, जहां यूजर्स दिमागी मैसेज के जरिए कंप्यूटर पर कर्सर कंट्रोल करने, टाइप करने और गेम खेलने जैसी एक्टिविटी कर पाए हैं.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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