एक्सप्लोरर

नॉर्वे में स्मार्ट ग्लास होंगे बैन! जानिए क्यों उठाया जा रहा यह कदम?

नॉर्वे में AI इनेबल्ड स्मार्ट ग्लासेज पर बैन की तैयारी की जा रही है. जिससे पब्लिक प्लेसेज पर आम आदमी की प्राइवेसी को खतरा न हो. क्या भारत में भी ऐसा होना चाहिए? जान लें पूरी खबर.

Show Quick Read
Key points generated by AI, verified by newsroom
  • स्मार्ट ग्लास से निजता खतरा, नॉर्वे सार्वजनिक उपयोग रोकेगा.
  • सार्वजनिक जगहों पर छिपे कैमरे निजता भंग कर रहे.
  • संवेदनशील जगहों पर स्मार्ट ग्लास उपयोग प्रतिबंधित रहेगा.
  • भारत को भी निजता हेतु ऐसे सख्त नियम चाहिए.

आज के दौर में तकनीक इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है कि साइंस फिक्शन फिल्मों जैसी चीजें हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बनती जा रही हैं. बाजार में ऐसे स्टाइलिश चश्मे आ चुके हैं जो दिखने में तो आम चश्मे जैसे लगते हैं. लेकिन उनके अंदर छिपा छोटा सा कैमरा और AI किसी की भी चुपचाप वीडियो रिकॉर्डिंग कर सकता है. स्मार्ट ग्लास दिखने में आम चश्मे जैसे होते हैं. लेकिन इनमें कैमरा, माइक्रोफोन और AI जैसे फीचर्स हो सकते हैं. 

जो आम इंसान की पर्सनल प्राइवेसी के लिए खतरा साबित हो रहा है. इसी बड़े खतरे को देखते हुए नॉर्वे की डेटा प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. नॉर्वे में इन AI स्मार्ट ग्लासेज के पब्लिक इस्तेमाल पर रोक लगाने की तैयारी चल रही है. सरकार का मानना है कि हर नागरिक को यह हक और भरोसा होना चाहिए कि कोई सार्वजनिक पार्क, जिम, या अस्पताल में उसकी मर्जी के बिना वीडियो या तस्वीरें न खींच रहा हो. 

आम इंसान की प्राइवेसी के लिए खतरा

आज के दौर में Meta जैसे बड़े ब्रांड्स के स्मार्ट ग्लासेज मार्केट में खूब देखने को मिल रहे हैं. जिनमें कैमरे और माइक के साथ तगड़े AI फीचर्स दिए जाते हैं. कंपनियां भले ही यह दावा करती हैं कि रिकॉर्डिंग के दौरान चश्मे पर एक छोटी सी एलईडी लाइट जलती है जिससे सामने वाले को पता चल जाए लेकिन भीड़भाड़ वाली जगहों पर उस छोटी सी लाइट को नोटिस करना लगभग नामुमकिन होता है. 

नॉर्वे के अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि लोग पार्क, शॉपिंग मॉल, बीच या सड़कों पर बेखौफ घूमते हैं और कोई दूसरा इंसान सामान्य दिखने वाले चश्मे से उनकी हर हरकत को रिकॉर्ड करके इंटरनेट पर लीक कर सकता है. जो कि लोगों की पर्सनल प्राइवेसी पर सीधा हमला है. क्योंकि बिना की सहमति के किसी की पर्सनल ज़िंदगी के पलों को कैमरे में कैद करना कानूनन और नैतिक रूप से बेहद गलत है.


नॉर्वे में स्मार्ट ग्लास होंगे बैन! जानिए क्यों उठाया जा रहा यह कदम?

किन जगहों पर लग सकती है रोक?

नॉर्वे सरकार इस समस्या से निपटने के लिए नियमों को बेहद सख्त बनाने पर विचार कर रही है. जिसके तहत कुछ चुनिंदा जगहों और बड़े पब्लिक प्लेसेज पर इन स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी लग सकती है. इस बैन के दायरे में स्कूल, बच्चों से जुड़े संस्थान, अस्पताल, डॉक्टर के क्लिनिक, जिम के चेंजिंग रूम और स्विमिंग पूल जैसी जगहें खासतौर पर शामिल हैं. जहां प्राइवेसी भंग होने का रिस्क सबसे ज्यादा होता है.

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी तरह से इन गैजेट्स को बैन कर दिया जाएगा. बल्कि सरकार का मकसद यह देखना है कि बिना रोक-टोक के बढ़ रहे इन कैमरों के आम लोगों पर क्या निगेटिव इंपैक्ट पड़ रहा है. इसके लिए प्राइवेसी और कानून से जुड़े विशेषज्ञ मिलकर इस टेक्नालाॅजी के नफे-नुकसान की स्टडी कर रहे हैं जिससे भविष्य के लिए और कड़े नियम तैयार किए जा सकें.


नॉर्वे में स्मार्ट ग्लास होंगे बैन! जानिए क्यों उठाया जा रहा यह कदम?

यह भी पढ़ें: क्यों एंड्रॉयड और IOS पर ही चलते हैं सभी फोन, दूसरी कंपनी क्यों नहीं डालती इसमें हाथ?

क्या भारत जैसे देशों को भी ऐसे कानून की जरूरत है?

जब नॉर्वे जैसे विकसित देश में स्मार्ट ग्लासों को लेकर इतनी सख्ती बरती जा रही है,. तो सवाल यह उठता है कि क्या भारत जैसे घनी आबादी वाले देशों को भी ऐसे कड़े नियमों की सख्त जरूरत है? भारत में टेक प्रोडक्ट्स और गैजेट्स का मार्केट बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है और लोग बिना किसी हिचकिचाहट के नए ट्रेंड्स को अपना रहे हैं. ऐसे में बिना किसी मजबूत प्राइवेसी कानून के लोग ऐसे खुफिया कैमरों वाले चश्मे पहनकर पब्लिक प्लेसेज जगहों, दफ्तरों या भीड़भाड़ वाले इलाकों में घूमने से आम आदमी की सेफ्टी और प्राइवेसी खतरे में पड़ रही है. 

हालांकि तकनीक के अपने फायदे भी हैं जैसे दिव्यांगों की मदद या रियल-टाइम ट्रांसलेशन लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पर्सनल फ्रीडम की कीमत पर किसी को भी दूसरों की प्राइवेसी में दखल देने की छूट दे दी जाए. देखना होगा नार्वे सरकार के इस फैसले के बाद भारत सरकार इस बारे में क्या कदम उठाती है.

यह भी पढ़ें: iPhone हो गया है Slow, तो नया लेना पड़ेगा या पुराने वाले को भी ठीक कर सकते हैं? जान लें

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

किस तरह के ऐप्स ज्यादा डाउनलोड कर रहे लोग? चौंका देंगी ये डिटेल्स
किस तरह के ऐप्स ज्यादा डाउनलोड कर रहे लोग? चौंका देंगी ये डिटेल्स
केबल लगाने से कहीं ज्यादा काम करता है Type-C पोर्ट, जानें कैसे
केबल लगाने से कहीं ज्यादा काम करता है Type-C पोर्ट, जानें कैसे
दुनिया के साथ 6G की रेस में भारत, Jio ने जताई शुरुआती रोलआउट की उम्मीद
दुनिया के साथ 6G की रेस में भारत, Jio ने जताई शुरुआती रोलआउट की उम्मीद
महंगी चिप्स का iPhone 18 Pro पर असर, Apple ने 15% घटाए ऑर्डर
महंगी चिप्स का iPhone 18 Pro पर असर, Apple ने 15% घटाए ऑर्डर
Advertisement

वीडियोज

CJP का 'चलो दिल्ली' मार्च...पूरी तरह फ्लॉप!
फसल तबाह...कौन देगा सहारा? महाराष्ट्र से राजस्थान...परेशान किसान
'वोट चोरी' पर सियासत...हल है हिरासत!
सख्ती का असर...'जंतर-मंतर 2.0' बेअसर!
SIR पर लड़ाई...मीर जाफर तक कैसे आई? बड़ा विश्लेषण
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 5 की मौत; 10 घर-20 दुकानों को किया आग के हवाले
मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, 5 की मौत; 10 घर-20 दुकानों को किया आग के हवाले
जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट सफल रहा? प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
जंतर-मंतर का प्रोटेस्ट सफल रहा? प्रशांत किशोर का बड़ा बयान
रणजी ट्रॉफी में कुल कितनी टीमें हिस्सा लेती हैं? इस बार क्या है नया; जानें A टू Z डिटेल्स
रणजी ट्रॉफी में कुल कितनी टीमें हिस्सा लेती हैं? इस बार क्या है नया; जानें A टू Z डिटेल्स
'एक बार तो जेल जाना है...', मुंबई प्रोटेस्ट में एक्टर इमरान खान हुए डिटेन, साथ में दिखीं गर्लफ्रेंड
'एक बार तो जेल जाना है...', मुंबई प्रोटेस्ट में एक्टर इमरान खान हुए डिटेन, साथ में दिखीं गर्लफ्रेंड
CJP का चौंकाने वाला दावा, '10 घंटे हो गए, कहां हैं अभिजीत दीपके?'
CJP का चौंकाने वाला दावा, '10 घंटे हो गए, कहां हैं अभिजीत दीपके?'
'संदेह नहीं सबूत', चुनाव आयोग के बचाव में उतरे 124 नौकरशाह, लिखा ओपन लेटर
'संदेह नहीं सबूत', चुनाव आयोग के बचाव में उतरे 124 नौकरशाह, लिखा ओपन लेटर
धमाके से दहला सऊदी का रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दो दिन पहले अटैक में 3 की हुई थी मौत
धमाके से दहला सऊदी का रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दो दिन पहले अटैक में 3 की हुई थी मौत
दुनिया के टॉप 25 बिजनेस स्कूल में भारत के 4 संस्थान, इन कॉलेजों ने बनाई जगह
दुनिया के टॉप 25 बिजनेस स्कूल में भारत के 4 संस्थान, इन कॉलेजों ने बनाई जगह
Embed widget