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WhatsApp या Email पर आया लीगल नोटिस? घबराएं नहीं! जानिए क्यों यह असली हो सकता है और सही जवाब कैसे दें

How to respond Legal Message: अगर हाल ही में आपको WhatsApp या ईमेल पर किसी कानूनी मामले से जुड़ा समन मिला है और आप इसे फर्जी समझकर नजरअंदाज करने का सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए.

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  • गलत जानकारी देने पर शिकायतकर्ता पर होगी कार्रवाई।

How to respond Legal Message: अगर हाल ही में आपको WhatsApp या ईमेल पर किसी कानूनी मामले से जुड़ा समन मिला है और आप इसे फर्जी समझकर नजरअंदाज करने का सोच रहे हैं तो सावधान हो जाइए. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आधिकारिक रूप से यह व्यवस्था लागू कर दी है कि चेक बाउंस मामलों में समन अब डिजिटल माध्यमों से भी भेजे जा सकते हैं. यानी WhatsApp और ईमेल के जरिए आया नोटिस पूरी तरह कानूनी और मान्य हो सकता है.

क्या बदला है कोर्ट की प्रक्रिया में

उत्तराखंड हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक, अब चेक बाउंस मामलों में समन देने के लिए सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहा जाएगा. उत्तराखंड इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेस रूल्स 2025 के तहत ईमेल, मोबाइल नंबर और WhatsApp जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए भी समन भेजा जा सकेगा. इसका मकसद प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है.

शिकायत दर्ज करते समय क्या जरूरी होगा

अब जब कोई व्यक्ति चेक बाउंस की शिकायत दर्ज कराएगा, तो उसे आरोपी का ईमेल आईडी और WhatsApp नंबर देना अनिवार्य होगा. इसके साथ एक शपथ पत्र भी देना होगा जिसमें यह पुष्टि की जाएगी कि दी गई जानकारी सही और प्रमाणिक है. कोर्ट इस जानकारी के आधार पर ही डिजिटल समन जारी करेगी.

केस प्रोसेसिंग होगी ज्यादा आसान

नई व्यवस्था के तहत हर शिकायत के साथ तय फॉर्मेट में एक संक्षिप्त विवरण लगाया जाएगा जिसे कोर्ट स्टाफ ज्यूडिशियल कंप्यूटर सिस्टम में दर्ज करेगा. खास बात यह है कि आरोपी को समन भेजने से पहले अब BNNS की धारा 223 के तहत किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत नहीं होगी, जिससे मामलों की सुनवाई में देरी कम होगी.

टेक्नोलॉजी से होगी ऑटोमैटिक निगरानी

कोर्ट के सॉफ्टवेयर में एक नया ड्राफ्ट टेम्पलेट जोड़ा गया है जो केस में “cause of action” से जुड़ी लिमिटेशन अवधि की गणना अपने आप करेगा. इससे तकनीकी गलतियों की संभावना कम होगी और मामलों की ट्रैकिंग ज्यादा सटीक हो सकेगी.

ऑनलाइन भुगतान से मिल सकता है जल्दी समाधान

इस नई व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह है कि अब आरोपी को ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा भी दी जा रही है. समन में सीधे भुगतान का लिंक होगा, जहां आरोपी CNR नंबर या केस डिटेल डालकर चेक की रकम जमा कर सकता है. अगर भुगतान सफल रहता है तो कोर्ट केस को आपसी समझौते के आधार पर बंद करने का अधिकार इस्तेमाल कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का असर

हाईकोर्ट के ये निर्देश सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद जारी किए गए हैं जिसमें कहा गया था कि देशभर में चेक बाउंस के लाखों लंबित मामले न्याय व्यवस्था पर भारी दबाव डाल रहे हैं. डिजिटल समन और ऑनलाइन सेटलमेंट को इसी समस्या का समाधान माना जा रहा है.

गलत जानकारी देने पर सख्त कार्रवाई

कोर्ट ने साफ चेतावनी दी है कि अगर शिकायत दर्ज करते समय जानबूझकर गलत ईमेल या WhatsApp जानकारी दी जाती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इसलिए इस नई व्यवस्था में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है.

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