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PM Post Removed : PM की पोस्ट हटी तो उठा सवाल, Meta कैसे मॉडरेट करता है VVIP अकाउंट?

PM Post Removed : देश के प्रधानमंत्री की आधिकारिक पोस्ट अचानक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गायब होने के कारण उस प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

PM Post Removed : 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET-UG पेपर लीक को लेकर देशभर में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक रील पोस्ट की थी. कुछ समय बाद यह रील पेज से हट गई, लेकिन उसी दिन दोबारा दिखाई देने लगी. इस घटना के बाद Meta ने माफी मांगते हुए कहा कि पोस्ट हटना एक तकनीकी गलती थी. 

देश के प्रधानमंत्री की आधिकारिक पोस्ट अचानक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से गायब होने के कारण उस प्लेटफॉर्म की मॉडरेशन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.  इस घटना के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि आखिर Meta बड़े नेताओं और VVIP अकाउंट्स के कंटेंट को किस तरह मॉडरेट करता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि Meta कैसे VVIP अकाउंट मॉडरेट करता है. 

Meta बड़े नेताओं के अकाउंट कैसे मॉडरेट करता है?

Meta के सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार कंपनी हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स के लिए एक विशेष सिस्टम का इस्तेमाल करती है, जिसे पहले Cross-Check कहा जाता था.अप्रैल 2024 में इसका नाम बदलकर Sensitive Entity Secondary Review कर दिया गया. इस व्यवस्था के तहत नेताओं, सरकारी अधिकारियों, मंत्रालयों और Meta की भाषा में सिविक इन्फ्लुएंसर्स के अकाउंट्स पर आने वाले कंटेंट को सामान्य यूजर्स की तरह सीधे ऑटोमेटिक सिस्टम से नहीं हटाया जाता है. ऐसे मामलों को पहले इंसानी समीक्षा (Human Review) के लिए भेजा जाता है.  Meta का कहना है कि अगर किसी देश के एक मंत्रालय को इस विशेष समीक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाता है, तो उस सरकार के सभी मंत्रालयों को समान प्रक्रिया में रखा जाता है.

कितने अकाउंट इस सिस्टम में शामिल हैं?

Meta की पूर्व कर्मचारी फ्रांसेस हॉगन के 2021 में अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) को दिए गए दस्तावेजों के मुताबिक, एक समय दुनिया भर में लगभग 58 लाख (5.8 मिलियन) हाई-प्रोफाइल अकाउंट इस सूची में शामिल थे, हालांकि Meta ने इसके बाद इस संख्या का कोई नया आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है. 

Meta के Oversight Board ने क्या कहा?

Meta के स्वतंत्र Oversight Board ने दिसंबर 2022 में जारी अपनी सलाह में कहा था कि Cross-Check सिस्टम कंपनी के व्यावसायिक हितों को ज्यादा प्राथमिकता देता हुआ दिखाई देता है. बोर्ड के अनुसार इस सिस्टम में शामिल अकाउंट्स की पोस्ट पर अंतिम फैसला आने में कई बार काफी समय लग जाता है और इस दौरान वह कंटेंट ऑनलाइन बना रहता है. 

क्या है Newsworthiness Allowance?

Meta के पास Newsworthiness Allowance नाम की एक अलग व्यवस्था भी है. इसके तहत अगर किसी पोस्ट में नियमों का उल्लंघन हो रहा हो, लेकिन उसे सार्वजनिक हित का माना जाए, तो Meta उसे हटाने की बजाय ऑनलाइन रहने की अनुमति दे सकता है. Meta के आंकड़ों के अनुसार जून 2022 से जून 2023 के बीच दुनिया भर में ऐसे 69 मामलों में यह छूट दी गई थी. इनमें से 9 मामले (करीब 13 प्रतिशत) राजनेताओं की पोस्ट से जुड़े थे.

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Donald Trump के मामले के बाद बदले नियम

जनवरी 2021 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अकाउंट को अमेरिकी संसद हिंसा के बाद निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद Meta ने Public Figures Civil-Unrest Protocol लागू किया, जिसके तहत यह तय किया जाता है कि अशांति या हिंसा जैसी स्थिति में किसी बड़े नेता के अकाउंट पर क्या कार्रवाई की जाएगी. 

X और YouTube पर क्या व्यवस्था है?

Meta की तरह दूसरे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी प्रमुख नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों के लिए अलग व्यवस्था रखते हैं. X ने 2019 से Public Interest Exception लागू किया हुआ है. इसके तहत सरकारी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों या चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के ऐसे पोस्ट, जो नियमों का उल्लंघन करते हों, लेकिन सार्वजनिक हित में जरूरी माने जाएं, उन्हें चेतावनी के साथ प्लेटफॉर्म पर रखा जा सकता है.  वहीं YouTube में EDSA Exception लागू है. इसके तहत शिक्षा, डॉक्यूमेंट्री, वैज्ञानिक या कलात्मक महत्व वाले कंटेंट को कुछ मामलों में नियमों के बाद भी हटाया नहीं जाता है. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. फिलहाल वह एबीपी नेटवर्क के टेक सेक्शन में काम कर रही हैं, जहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने के साथ-साथ उनके लिए रिसर्च और कंटेंट तैयार करने की जिम्मेदारी संभालती हैं.

पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से इंटर्न के रूप में की. इसके बाद से वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. फीचर, टेक और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ उनकी रुचि स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में है.

मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की. वर्तमान में वह राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं.मानसी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखती हैं.

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