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मेटा का यह एआई सिस्टम करेगा गजब! बिना बताए पढ़ लेगा दिमाग में चल रही बात

Meta Brain2Qwerty v2: मेटा ने एक नया एआई सिस्टम तैयार किया है. यह दिमाग में चल रहे विचारों को टेक्स्ट में कन्वर्ट कर सकता है. इसके लिए न तो सर्जरी की जरूरत पड़ेगी और न ही इंप्लांट करना होता है.

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  • मेटा ने Brain2Qwerty v2 AI सिस्टम लॉन्च किया है।
  • यह बिना सर्जरी दिमाग के विचारों को टेक्स्ट में बदलेगा।
  • लकवाग्रस्त व बोलने में असमर्थ लोगों के लिए उपयोगी होगा।
  • सिस्टम की शब्द सटीकता 61% तक है, काफी उच्च।

Meta Brain2Qwerty v2: मेटा ने एक ऐसा एआई सिस्टम तैयार किया है, जो आपके दिमाग में चल रहे विचारों को पढ़ पाएगा. इस सिस्टम को Brain2Qwerty v2 नाम दिया गया है और यह ब्रेन एक्टिविटी को टेक्स्ट में बदल देगा. यानी यह सिस्टम आपके बताए बिना भी आपके दिमाग में चल रहे विचारों को स्क्रीन पर टेक्स्ट फॉर्मेट में पेश कर सकता है. इसकी खास बात है कि इसे लगाने के लिए न तो सर्जरी की जरूरत है और न ही इसे इंप्लांट करना पड़ेगा. यह एआई सिस्टम लकवाग्रस्त या किसी दूसरी कंडीशन के कारण बोलने में असमर्थ लोगों के खूब काम आएगा. यह पिछले साल आए मेटा के Brain2Qwerty एआई सिस्टम का दूसरा वर्जन है.

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

मेटा ने बताया कि यह सिस्टम मैग्नेटोएनसेफेलोग्राफी (MEG) का यूज करता है. ऐसे सिस्टम के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती. यह सेंसर लगे एक हेलमेट की मदद से दिमाग में चल रही गतिविधियों यानी न्यूरल एक्टिविटीज से प्रोड्यूस हुए मैग्नेटिक फील्ड का मापता है. इसे आसान भाषा में समझा जाए तो यह सिस्टम हेयर ड्रायर की तरह दिखने वाले एक स्पेशल हेलमेट की मदद से काम करता है. इस हेलमेट में कई सेंसर लगे हुए हैं, जो ब्रेन एक्टिविटी के सिग्नल कैच करता है. यह इसलिए खास है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए सर्जरी या इंप्लांट की जरूरत नहीं पड़ती. इस कारण इसका यूज सेफ और सस्ता है.

नए वर्जन में और भी कई खासियत

मेटा के अनुसार, Brain2Qwerty v2 को 9 वॉलेंटियर के 22,000 से अधिक वाक्यों के साथ ट्रेनिंग दी गई है. इनमें से हर वॉलेंटियर ने 10 घंटे इस सिस्टम को पहनकर अपने दिमाग में चल रहे विचारों को टाइप किया था. पुराने वर्जन के मुकाबले नया वर्जन एंड-टू-एंड डीप लर्निंग का यूज कर दिमाग में चल रहे संकेतों से ही लैंग्वेज को डिकोड कर लेता है. यह सिस्टम खुद ही एआई की मदद से ब्रेन सिग्नल का पैटर्न पहचान सकता है. 

कितना सटीक है नया सिस्टम?

सटीकता की बात करें तो मेटा का दावा है कि इसकी पर वर्ड एक्यूरेसी 61 प्रतिशत है और बेस्ट परफॉर्मिंग पार्टिसिपेंट में यह 78 प्रतिशत तक पहुंच गई थी. इस तरीके के दूसरे सिस्टम की एक्यूरेसी सिर्फ 8 प्रतिशत तक होती है. सिस्टम को बेहतर और एफिशिएंट बनाने के लिए मेटा ने लार्ज लैंग्वेज मॉडल को भी फाइन-ट्यून किया है ताकि यह बातचीत में ग्रामेटिकल कॉन्टेक्स्ट को पूरा कर सके.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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