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Smartwatch Privacy: क्या आपकी Smartwatch भी कर रही है जासूसी? ऐसे चोरी हो सकता है पर्सनल डेटा

Smartwatch Privacy: कई रिपोर्ट्स और रिसर्च में यह चिंता जताई गई है कि स्मार्टवॉच से इकट्ठा होने वाला हेल्थ और लोकेशन डेटा कई बार क्लाउड पर स्टोर होता है, जिससे डेटा चोरी हो सकता है.

Smartwatch Privacy : आज लाखों लोग फिटनेस और हेल्थ ट्रैकिंग के लिए स्मार्टवॉच का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन जितनी तेजी से इन डिवाइस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. कई रिपोर्ट्स और रिसर्च में यह चिंता जताई गई है कि स्मार्टवॉच से इकट्ठा होने वाला हेल्थ और लोकेशन डेटा कई बार क्लाउड पर स्टोर होता है और कुछ परिस्थितियों में थर्ड-पार्टी तक भी पहुंच सकता है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आपकी स्मार्टवॉच सिर्फ आपकी हेल्थ पर नजर रख रही है या आपकी निजी जानकारी भी कहीं और पहुंच रही है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि क्या आपकी Smartwatch भी जासूसी कर रही है और इससे कैसे आपका पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है. 

स्मार्टवॉच कई तरह का डेटा करती है रिकॉर्ड

आज की स्मार्टवॉच पहले की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस हो चुकी हैं. इनमें कई तरह के सेंसर लगे होते हैं, जो यूजर की अलग-अलग हेल्थ और एक्टिविटी से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करते हैं. इन डिवाइस के जरिए हार्ट रेट, ब्लड ऑक्सीजन लेवल, नींद का पैटर्न, स्ट्रेस लेवल, स्किन टेम्परेचर, शरीर की एक्टिविटी, GPS लोकेशन, ब्लूटूथ और वाई-फाई जैसी जानकारियां रिकॉर्ड हो सकती हैं. सभी स्मार्टवॉच में एक जैसे फीचर नहीं होते हैं, लेकिन ज्यादातर डिवाइस कई ज्यादा और बड़े लेवल पर पर्सनल जानकारी इकट्ठा करती हैं. 

क्या आपकी Smartwatch भी जासूसी कर रही है?

स्मार्टवॉच आपकी सेहत और फिटनेस पर नजर रखने के लिए कई जानकारियां रिकॉर्ड करती है. यह डेटा कई बार क्लाउड पर स्टोर होता है और कंपनी की प्राइवेसी पॉलिसी के अनुसार कुछ परिस्थितियों में सर्विस प्रोवाइडर्स या कानूनी एजेंसियों के साथ शेयर भी किया जा सकता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्मार्टवॉच आपकी जासूसी कर रही है, लेकिन अगर यूजर बिना पढ़े सभी परमिशन दे देता है, तो उसकी पर्सनल जानकारी जरूरत से ज्यादा शेयर हो सकती है. ऐसे में प्राइवेसी सेटिंग्स, डेटा शेयरिंग और ऐप परमिशन की नियमित जांच करना बेहद जरूरी है. 

यह भी पढ़ें - Explained: AI डेटा सेंटर की बढ़ती तलब! एक सवाल पूछने पर जितना पानी उड़ता है, उतने से कितने लोगों की प्यास बुझ सकती है?

हेल्थ डेटा क्यों माना जाता है जरूरी?

स्मार्टवॉच सिर्फ आपकी फिटनेस नहीं बताती, बल्कि आपकी लाइफस्टाइल की पूरी तस्वीर भी सामने ला सकती है. इसमें आपकी नींद का समय,डेली एक्टिविटी, हार्ट रेट, एक्सरसाइज, लोकेशन हिस्ट्री और कई मामलों में महिलाओं का पिरियड्स जैसी जानकारी भी रिकॉर्ड हो सकती है. यही कारण है कि इस तरह के डेटा को बेहद जरूरी और संवेदनशील माना जाता है. 

इससे कैसे आपका पर्सनल डेटा चोरी हो सकता है?

अगर स्मार्टवॉच की प्राइवेसी सेटिंग्स सही तरीके से मैनेज नहीं की जाएं या जरूरत से ज्यादा परमिशन दे दी जाए, तो आपका हेल्थ डेटा, लोकेशन हिस्ट्री, डेली रूटीन, नींद का पैटर्न और दूसरी पर्सनल जानकारी क्लाउड पर स्टोर होकर अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर्स तक पहुंच सकती है. वहीं अगर डिवाइस या उससे जुड़ा अकाउंट साइबर हमले का शिकार हो जाए, तो हैकर्स ब्लूटूथ, वाई-फाई या कमजोर सुरक्षा का फायदा उठाकर इस डेटा तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं. ऐसे में मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट और जरूरी ऐप्स को ही परमिशन देना आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है. 
 
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

1. अगर आप स्मार्टवॉच इस्तेमाल करते हैं, तो  समय-समय पर स्मार्टवॉच की Privacy Settings और Data Sharing ऑप्शनों की जांच करें. 

2. Location Tracking और बिना जरूरत परमिशन को जरूरत के अनुसार ही चालू रखें. 

3. जिन सेंसर की जरूरत न हो, उनका एक्सेस बंद कर दें. 

4. पुराने हेल्थ डेटा को समय-समय पर क्लाउड से हटाते रहें. 

5. किसी भी अनजान Bluetooth Request को एक्सेप्ट न करें. 

6. स्मार्टवॉच का सॉफ्टवेयर हमेशा अपडेट रखें. 

7. अगर बैटरी अचानक बहुत तेजी से खत्म होने लगे या डिवाइस असामान्य व्यवहार करे, तो उसे जांचें और जरूरत पड़ने पर रीसेट करें. 

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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