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क्या अब भी वैल्यू फॉर मनी है MacBook Neo, जानें 100 डॉलर महंगा होने के बाद कितना फायदेमंद?

Macbook Neo: कीमत में इजाफा होने के बाद यह सवाल फिर से पूछा जाने लगा है कि क्या ऐप्पल का सबसे सस्ता लैपटॉप मैकबुक नियो खरीदना अब भी फायदे का सौदा है? आज इसका जवाब जानेंगे.

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  • मैकबुक नियो की शुरुआती कीमत ₹69,900 से बढ़कर ₹79,900 हुई।
  • यह बेसिक उपयोग, वेब ब्राउज़िंग और कोडिंग हेतु उपयुक्त।
  • उच्च-स्तरीय गेमिंग, वीडियो एडिटिंग हेतु यह अनुपयुक्त है।
  • रैम अपग्रेड संभव नहीं, उच्च प्रदर्शन हेतु एयर बेहतर।

Macbook Neo: ऐप्पल का सबसे सस्ता लैपटॉप Macbook Neo ज्यादा दिन तक सस्ता नहीं रह सका है. मार्च में इस लैपटॉप को 69,900 रुपये की शुरुआती कीमत पर लॉन्च किया गया था, लेकिन अब इसकी कीमतों में भारी इजाफा हुआ है. अभी इस लैपटॉप की शुरुआती कीमत 79,900 रुपये हो गई है और अगर आप टचआईडी वाला 512GB वर्जन लेना चाहते हैं तो 89,900 रुपये चुकाने पड़ेंगे. ऐसे में कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या कीमत बढ़ने के बाद भी क्या मैकबुक नियो वैल्यू फॉर मनी है या नहीं. आइए इस सवाल का जवाब जानते हैं.

सबसे पहले जानें स्पेसिफिकेशंस

Macbook Neo में 13 इंच की LED स्क्रीन लगी हुई है. कीमत कम रखने के लिए ऐप्पल ने इसमें मैकबुक की जगह आईफोन में यूज होने वाला प्रोसेसर यूज किया है. यह A18 Pro चिपसेट के साथ लॉन्च हुआ था. 8GB रैम वाले इस लैपटॉप में बेस स्टोरेज 256GB है. बाकी स्पेसिफिकेशंस की बात करें तो इसमें 1080p का FaceTime HD कैमरा, डुअल माइक्रोफोन और डुअल साइड स्पीकर लगे हैं, जो स्पेटियल और डॉल्बी एटमॉस को सपोर्ट करते हैं. इसमें ऐप्पल का मैजिक कीबोर्ड, बड़ा मल्टीटच ट्रैकपैड और टचआईडी भी दी गई है और इसका वजन केवल 1.23 किलोग्राम है. यह लैपटॉप बेसिक कंप्यूटिंग के लिए शानदार स्पीड, जबरदस्त ग्राफिक परफॉर्मेंस, शार्पर और कलरफुल डिस्प्ले, प्रीमियम और मजबूत एल्युमिनियम बिल्ड के साथ आता है.

क्या अब भी वैल्यू फॉर मनी है Macbook Neo?

इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे किन कामों में यूज करने वाले हैं. अगर आप स्टूडेंट है या वेब ब्राउजिंग, स्ट्रीमिंग जैसे बेसिक टास्क के लिए इसे यूज करने वाले हैं तो यह अब भी एक शानदार च्वॉइस है. लगभग 15 घंटे के बैटरी बैकअप के साथ आने वाले यह मैकबुक कोडिंग जैसे काम भी कर सकता है. इसके अलावा अगर आपके पास आईफोन, एयरपॉड्स जैसे ऐप्पल प्रोडक्ट्स हैं और आप इकोसिस्टम तैयार करना चाहते हैं तो यह लैपटॉप अच्छी च्वॉइस हो सकती है. इसी तरह विंडो से मैकबुक पर स्विच करने वाले यूजर्स के लिए भी यह एक अच्छा एंट्री प्वाइंट साबित हो सकता है. 

किन लोगों को देखना चाहिए दूसरा ऑप्शन?

अगर आप गेमिंग, वीडियो एडिटिंग और दूसरे हाई-एंड टास्क के लिए मैकबुक नियो खरीद रहे हैं तो फैसले पर विचार करना चाहिए. इसमें लगी 8GB रैम आपका काम मुश्किल बना सकती है. इसके अलावा आप थोड़ा और पैसा खर्च कर दमदार विंडो सेटअप खरीद सकते हैं. इसके अलावा अगर आप लैपटॉप को 5 साल से ज्यादा यूज करने वाले हैं या रैम अपग्रेड करना चाहते हैं तो मैकबुक नियो आपके लिए नहीं है. इसमें रैम को अपग्रेड नहीं किया जा सकता. इसकी बजाय आप मैकबुक एयर की तरफ जा सकते हैं, जो इससे दोगुनी रैम के साथ आता है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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