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नॉर्मल फोन की जगह सैटेलाइट फोन का क्यों नहीं होता यूज? इसके पीछे हैं कई कारण

Satellite Phones Disadvantages: कनेक्टिविटी के मामले में सैटेलाइट फोन बड़े काम की चीज है. इसे जंगल से लेकर समुद्र तक कहीं भी यूज किया जा सकता है, लेकिन फिर भी यह पॉपुलर च्वॉइस नहीं बन सका है.

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  • सिग्नल में देरी, अत्यधिक महंगा उपयोग मुख्य कमियां हैं।
  • बड़े, भारी डिज़ाइन इन्हें लोकप्रिय होने से रोकते हैं।
  • सुरक्षा कारणों से भारत में सैटेलाइट फोन प्रतिबंधित हैं।

Satellite Phones Disadvantages: ऐप्पल, सैमसंग और गूगल समेत बड़ी कंपनियां अपने फ्लैगशिप स्मार्टफोन्स में सैटेलाइट कनेक्टिविटी का फीचर दे रही है. सैटेलाइट कनेक्टिविटी से मोबाइल नेटवर्क न होने पर भी कॉल और मैसेज किए जा सकते हैं. जब सैटेलाइट फोन में यह सुविधा पहले से मौजूद है तो लोग नॉर्मल फोन की जगह सैटेलाइट फोन यूज क्यों नहीं करते? इसके अलावा सैटेलाइट फोन हमारे बीच में स्मार्टफोन के आने से पहले से ही मौजूद है. फिर यह नॉर्मल फोन से कैसे पीछे रह गया? आज हम इसके कारण जानेंगे.

क्या होता है सैटेलाइट फोन?

जैसा नाम से ही जाहिर है, यह फोन सैटेलाइट से कनेक्ट रहता है. यानी इसे सिग्नल भेजने और रिसीव करने के लिए नॉर्मल फोन की तरह केबल और सेल टॉवर की जरूरत नहीं पड़ती. यह डायरेक्ट सैटेलाइट को सिग्नल भेजता है और वहीं से रिसीव करता है. इस कारण इसे उन जगहों पर ज्यादा यूज किया जाता है, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होता. 

फायदों के बाद भी लोग सैटेलाइट फोन क्यों नहीं यूज करते?

कनेक्टिविटी के मामले में सैटेलाइट फोन बड़े काम की चीज है, लेकिन इसकी कई कमियां भी हैं. इन्हीं कमियों के चलते यह नॉर्मल फोन की तरह पॉपुलर नहीं हुआ. सबसे पहले कमी कॉल लेग की है. भले ही सैटेलाइट फोन केबल और सेल टावर का यूज नहीं करता, लेकिन इसके सिग्नल को सैटेलाइट तक पहुंचने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है. इस कारण कॉल लेग होती है. यानी आपके बोलने के बाद रिसीवर तक आवाज पहुंचने में थोड़ा समय लगता है. इसकी दूसरी दिक्कत लागत को लेकर है. सैटेलाइट फोन से कॉल करना काफी महंगा पड़ता है. इसकी लागत प्रति मिनट 100 रुपये से भी ज्यादा रह सकती है, जो ज्यादातर यूजर्स के लिए बहुत महंगी है. 

ये हैं अन्य कारण

सैटेलाइट फोन की कमियां सिर्फ इसके महंगे होने तक ही सीमित नहीं है. इसका डिजाइन भी एक बड़ी बाधा है. सैटेलाइट फोन नॉर्मल फोन की तुलना में काफी बड़े और भारी होते हैं. अगर उन्हें नॉर्मल फोन की तरह हल्का और स्लिम बनाया जाए तो इनके एंटी छोटे करने पड़ेंगे. ऐसा होने पर इन्हें सैटेलाइट से कनेक्ट होने में दिक्कत आएगी और हो सकता है कि कुछ जगहों पर ये काम ही न करें.

सैटेलाइट फोन का यूज पड़ सकता है भारी

ऊपर दिए गए कारणों के अलावा दुनिया में कई जगहों पर सैटेलाइट फोन बैन है. भारत समेत कई देशों में अगर कोई सैटेलाइट फोन यूज करते हुए पकड़ा जाता है तो उसे जेल हो सकती है. भारत में सुरक्षा कारणों से सैटेलाइट फोन रखने पर पाबंदी लगी हुई है. 

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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