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iPhone यूजर्स के डेटा पर Apple को झटका, इस देश में बदलेगा नियम

iPhone के App Tracking Transparency सिस्टम पर जर्मनी में Apple को बड़ा झटका लगा है. जानें क्या बदलेगा, यूजर्स और Meta जैसी कंपनियों पर क्या असर होगा?

अगर आप iPhone इस्तेमाल करते हैं तो आपने कई बार किसी ऐप को खोलते समय एक पॉप-अप देखा होगा जिसमें पूछा जाता है कि क्या आप उस ऐप को दूसरी ऐप्स और वेबसाइट्स पर आपकी गतिविधि ट्रैक करने की अनुमति देना चाहते हैं. अब Apple को इसी सिस्टम में बदलाव करना पड़ेगा.

जर्मनी की प्रतिस्पर्धा नियामक संस्था Federal Cartel Office (FCO) ने Apple के App Tracking Transparency यानी ATT सिस्टम की कई साल से चल रही जांच पूरी कर ली है.

नियामक का कहना है कि डेटा इस्तेमाल करने की अनुमति मांगने के मामले में Apple के अपने ऐप्स और दूसरी कंपनियों के ऐप्स के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं हो रहा था.

आखिर विवाद क्या है?

मामला थोड़ा तकनीकी लगता है लेकिन इसे आसान तरीके से समझिए. Facebook या किसी दूसरे ऐप को अगर आपकी गतिविधियों से जुड़ा डेटा टारगेटेड विज्ञापन के लिए इस्तेमाल करना है तो उसे पहले आपकी अनुमति लेनी पड़ती है.

जर्मन नियामक के मुताबिक Apple के ATT सिस्टम में थर्ड-पार्टी ऐप्स के सामने आने वाले परमिशन मैसेज का तरीका ऐसा था जिससे यूजर के डेटा शेयर करने से इनकार करने की संभावना बढ़ सकती थी. दूसरी तरफ Apple के अपने ऐप्स को लेकर सहमति लेने का तरीका ज्यादा अनुकूल था. यही बात प्रतिस्पर्धा के लिहाज से सवालों के घेरे में आई.

अब iPhone पर क्या बदलेगा?

Apple ने जर्मन अथॉरिटी के सामने बदलाव करने पर सहमति जताई है. अब थर्ड-पार्टी ऐप्स के लिए दिखाई देने वाले consent pop-up की भाषा, डिजाइन और चिन्हों को ज्यादा निष्पक्ष बनाया जाएगा यानी पॉप-अप में ऐसे शब्द या डिजाइन नहीं होने चाहिए जो यूजर को किसी खास विकल्प की तरफ धकेलते दिखाई दें.

Apple को ये बदलाव लागू करने के लिए चार महीने का समय मिलेगा. कंपनी की ये प्रतिबद्धताएं सात साल तक लागू रहेंगी और इनकी निगरानी एक स्वतंत्र ट्रस्टी करेगा. बदलाव यूरोपीय संघ के लगभग सभी देशों में लागू होंगे.

Meta जैसी कंपनियों के लिए क्यों अहम है फैसला?

इस पूरे विवाद में Meta जैसी कंपनियों की दिलचस्पी भी समझना जरूरी है. Facebook और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है.

यूजर अगर अपनी गतिविधियों से जुड़े डेटा के इस्तेमाल की अनुमति देता है तो कंपनियां उसकी रुचि के मुताबिक ज्यादा सटीक विज्ञापन दिखा सकती हैं. ऐसे targeted ads आम विज्ञापनों के मुकाबले ज्यादा कमाई करा सकते हैं.

इसलिए Apple का ATT सिस्टम लागू होने के बाद से ही डिजिटल विज्ञापन कंपनियां इसे लेकर सवाल उठाती रही हैं.

Apple क्या कह रहा है?

Apple का कहना है कि उसका मौजूदा ATT prompt यूजर्स को उनके डेटा पर साफ और आसान नियंत्रण देता है. कंपनी के मुताबिक जर्मन डेटा प्रोटेक्शन अधिकारियों ने भी इस व्यवस्था को लेकर सकारात्मक राय दी है.

हालांकि Apple ने FCO की मांग पर prompt के टेक्स्ट और फॉर्मेट में बदलाव करने पर सहमति जताई है. कंपनी का कहना है कि इन बदलावों के बाद भी वह यूरोप में ATT की सुविधा जारी रख सकेगी.

पहले भी Apple पर हो चुकी है कार्रवाई

ATT को लेकर यूरोप में Apple पहली बार सवालों के घेरे में नहीं आया है. फ्रांस Apple पर 150 मिलियन यूरो और इटली 98.6 मिलियन यूरो का जुर्माना लगा चुके हैं यानी बहस सिर्फ इतनी नहीं है कि iPhone पर आपका डेटा सुरक्षित है या नहीं.

बड़ा सवाल यह भी है कि जब डेटा की अनुमति मांगी जाए तो क्या Apple अपने ऐप्स और दूसरी कंपनियों के ऐप्स के लिए एक जैसे नियम रखता है?

अब जर्मनी के फैसले के बाद Apple को इसी अंतर को कम करने के लिए अपने सिस्टम में बदलाव करना होगा.

ये भी पढ़ें: iPhone यूजर्स सावधान! Apple ने जारी किया बेहद जरूरी Security Update

About the author वरुण भसीन

वरुण भसीन एबीपी न्यूज़ में प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट हैं. पिछले 9 साल से पत्रकारिता कर रहे हैं. वे एयरलाइंस, रेलवे और सड़क-परिवहन से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इससे पहले वे कई संस्थानों में काम कर चुके हैं. वरुण न्यूज जगत से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री फिल्में भी बनाते आए हैं. वरुण ने MBM यूनिविर्सिटी जोधपुर से पढ़ाई की है. संपर्क करने के लिए मेल आईडी है- varunb@abpnetwork.com

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