Digi Yatra Travel Issue : Digi Yatra भी खा गया धोखा! जुड़वां भाइयों को नहीं पहचान पाया फेस स्कैन, एयरपोर्ट पर अटकी एंट्री
Digi Yatra Travel Issue : फेस रिकग्निशन तकनीक पर काम करने वाली यह ऐप कई बार जुड़वां भाई-बहनों के चेहरे में अंतर नहीं कर पा रही है. इसके कारण मैनुअल जांच से गुजरना पड़ रहा है.

Digi Yatra Travel Issue : एयरपोर्ट पर तेज और आसान एंट्री देने के लिए बनाई गई Digi Yatra ऐप अब कुछ यात्रियों के लिए परेशानी की वजह बन रही है. खासकर एक जैसे दिखने वाले जुड़वां (Identical Twins) लोगों को इस सिस्टम में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. फेस रिकग्निशन तकनीक पर काम करने वाली यह ऐप कई बार जुड़वां भाई-बहनों के चेहरे में अंतर नहीं कर पा रही है. इसके कारण दोनों में से एक यात्री को फास्ट-ट्रैक एंट्री की जगह मैनुअल जांच से गुजरना पड़ रहा है.
हाल ही में अहमदाबाद के दो जुड़वां भाइयों ने इस समस्या को लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय से समाधान की मांग की है. ऐसे में आइए जानते हैं कि जुड़वां भाइयों की एंट्री एयरपोर्ट पर कैसे अटक गई.
जुड़वां भाइयों की एंट्री एयरपोर्ट पर कैसे अटक गई?
अहमदाबाद के रहने वाले जुड़वां भाई संजीव छाजेड़ और राजीव छाजेड़ अक्सर हवाई यात्रा करते हैं. उनका कहना है कि जब भी दोनों साथ में यात्रा करते हैं, Digi Yatra का फेस रिकग्निशन सिस्टम उन्हें सही तरीके से पहचान नहीं पाता है. ऐसे में दोनों में से किसी एक की फास्ट-ट्रैक एंट्री रुक जाती है और उसे पहचान की मैनुअल जांच करानी पड़ती है. इस समस्या को लेकर दोनों भाइयों ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर स्थायी समाधान की मांग की है.
Digi Yatra में कहां आ रही है दिक्कत?
संजीव छाजेड़ के मुताबिक, Digi Yatra का सिस्टम उनके चेहरे को Duplicate या Repeated Processing Attempt की तरह पहचान रहा है. उनका मानना है कि दोनों भाइयों के चेहरे काफी मिलते-जुलते होने की वजह से फेस रिकग्निशन एल्गोरिद्म सही पहचान नहीं कर पा रहा. उन्होंने मंत्रालय से अनुरोध किया है कि यह जांच की जाए कि क्या Identical Twins के लिए फेस रिकग्निशन सिस्टम में अतिरिक्त सुरक्षा या अलग पहचान प्रक्रिया की जरूरत है.
कब सामने आई समस्या?
संजीव ने बताया कि 10 जुलाई को वह अहमदाबाद से दिल्ली के लिए इंडिगो की फ्लाइट से यात्रा कर रहे थे. Digi Yatra के जरिए चेक-इन करते समय उनके मोबाइल पर Too Many Access का मैसेज दिखाई दिया. वहीं उनके भाई राजीव को भी यही एरर मिला. इसके बाद एयरपोर्ट के सुरक्षा जांच केंद्र पर भी दोनों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा.
यह भी पढ़ें - jagannath Rath Yatra: पुरी में उमड़ा आस्था का सैलाब, एक रात रुकने का किराया ₹50,000 के पार!
फास्ट-ट्रैक की जगह करनी पड़ी मैनुअल जांच
दोनों भाइयों का कहना है कि Digi Yatra में पहले से रजिस्ट्रेशन होने के बाद भी एयरपोर्ट स्टाफ ने दोनों में से एक भाई को अलग लाइन में भेजकर पहचान की मैनुअल जांच कराई. संजीव के मुताबिक, Digi Yatra का उद्देश्य लंबी लाइनों से बचाना और समय बचाना है. लेकिन अगर हर बार साथ यात्रा करने पर किसी एक को लाइन छोड़कर अलग से जांच करानी पड़े, तो इस सुविधा का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है. हालांकि अभी तक एयरपोर्ट ऑपरेटर के पास इस तरह की कोई शिकायत आधिकारिक तौर पर नहीं पहुंची है. उनका कहना है कि यह मामला मंत्रालय के स्तर पर ही जांच किया जा सकता है.
दूसरे जुड़वां भी झेल रहे हैं यही परेशानी
अहमदाबाद की 24 साल की जुड़वां बहनें केया पटेल और हिया पटेल ने भी बताया कि जब वे दोनों साथ में यात्रा करती हैं, तब Digi Yatra में अक्सर यही समस्या सामने आती है. उनकी मां तृप्ति पटेल के अनुसार, उनकी बेटियां अब कई बार Digi Yatra का इस्तेमाल ही नहीं करती है. लगभग हर बार दोनों में से किसी एक को सिस्टम रोक देता है और फिर मैनुअल लाइन में जाना पड़ता है. केया और हिया का कहना है कि जब वे अलग-अलग यात्रा करती हैं, तब Digi Yatra में कोई समस्या नहीं होती है. उनका मानना है कि दिक्कत तब आती है, जब दोनों एक साथ फेस रिकग्निशन गेट से गुजरने की कोशिश करती हैं. ऐसे में सिस्टम दोनों के चेहरे को सही तरीके से अलग-अलग पहचान नहीं पाता है. उन्होंने भी अधिकारियों से इस तकनीकी समस्या की जांच करने और फेस रिकग्निशन सिस्टम को बेहतर बनाने की मांग की है.
यह भी पढ़ें - Bihar Heli Tourism: बिहार में हेली टूरिज्म शुरू, सिर्फ ₹2100 में पटना तो ₹6000 में होगी कैमूर की हवाई सैर






















