Cyber Security में Google का बड़ा धमाका, Claude Mythos को टक्कर देने के लिए लाई नया मॉडल
Google AI Threat Defense: गूगल ने एक नया साइबर सिक्योरिटी मॉडल लॉन्च किया है. इसे Claude Mythos और Daybreak के मुकाबले का माना जा रहा है. हालांकि, इसके काम करने का तरीका थोड़ा अलग है.

- यह AI एजेंट से लेगेसी कोड को दोबारा लिखकर मॉडर्न बनाएगा।
Google AI Threat Defense: अमेरिकी एआई कंपनी Anthropic ने पिछले महीने Claude Mythos मॉडल को लॉन्च किया था. यह इतना पावरफुल मॉडल है कि किसी भी सॉफ्टवेयर को हैक कर सकता है. इस खतरे को देखते हुए कंपनी ने इसे पब्लिक के लिए रोलआउट नहीं किया है. इसे टक्कर देने के लिए कुछ ही दिन पहले OpenAI ने Daybreak मॉडल लॉन्च किया था और अब गूगल भी इस रेस में कूद गई है. गूगल ने नया साइबर सिक्योरिटी मॉडल Google AI Threat Defense इंट्रोड्यूस किया है. गूगल का कहना है कि यह टूल एआई-ड्रिवन थ्रेट्स को लगातार मॉनिटर करता है और उन थ्रेट्स को असर दिखाने से पहले ही रोक लेता है.
तुरंत फिक्स कर सकता है सॉफ्टवेयर की कमियां
गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में बताया कि इस टूल की मदद से कंपनियां साइबर अटैक के अनुमानित तरीकों का पता लगाकर सबसे खतरनाक थ्रेट्स को प्रायोरटाइज कर सकती हैं और किसी भी खामी को तुरंत फिक्स कर पाएगी. इस तरह सॉफ्टवेयर की खामियों का कोई दुरुपयोग नहीं कर पाएगा.
Claude Mythos और Daybreak से अलग है गूगल का नया मॉडल
गूगल ने बताया कि एआई साइबर सिक्योरिटी सिस्टम के साथ एक बड़ी दिक्कत है कि वो सिक्योरिटी टीमों के पास हजारों एआई जनरेटेड अलर्ट भेजते रहते हैं. Claude Mythos और Daybreak लगातार खामियों का पता करते हुए अलर्ट भेजते हैं, लेकिन इनमें से हर खामी असल में बड़ा खतरा पैदा नहीं कर सकती. गूगल अब इसी दिक्कत को दूर करने का प्रयास कर रही है. यह प्लेटफॉर्म कोड स्कैनिंग को क्लाउड-सिक्योरिटी प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट कर चेक करेगा कि क्या किसी खामी का इंटरनेट या लाइव नेटवर्क कॉन्फिगरेशन के जरिए दुरुपयोग किया जा सकता है या नहीं. अगर इस प्लेटफॉर्म को कोई बड़ी खामी मिलती है, लेकिन उसका बाकी सिस्टम पर असर नहीं होगा तो यह उसकी प्रायोरिटी को कम कर देगा. इससे डेवलपर्स और सिक्योरिटी टीम को एक्टिव थ्रेट्स पर काम करने का पर्याप्त समय मिल सकेगा.
इस मामले में भी अलग तरीके से काम करेगा गूगल का मॉडल
इस प्लेटफॉर्म में एक बड़ा अंतर बग फिक्स को लेकर है. OpenAI का सिस्टम बग के हिसाब से पैचेज सजेस्ट करता है, लेकिन गूगल का प्लेटफॉर्म अलग तरीके से काम करेगा. यह प्लेटफॉर्म ह्मयून सुपरविजन के अंडर एआई एजेंट से लेगेसी कोड को दोबारा राइट करवाकर इसे मॉडर्न प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में बदल देगा. साथ ही यह प्लेटफॉर्म डिप्लॉयमेंट से पहले यह टेस्ट कर लेगा कि किसी बग को फिक्स करने के लिए रिलीज किए जा रहे पैचेज काम करेंगे या नहीं.
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Source: IOCL


























