Gmail में आया जनरेटिव AI! मेल लिखेगा भी और पढ़ेगा भी, अब यूजर्स की प्राइवेसी पर उठे बड़े सवाल
Gmail AI: करीब दो साल पहले Google ने सर्च रिजल्ट्स में AI से तैयार जवाब दिखाकर आम लोगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रूबरू कराया था.

Gmail AI: करीब दो साल पहले Google ने सर्च रिजल्ट्स में AI से तैयार जवाब दिखाकर आम लोगों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रूबरू कराया था. अब कंपनी ने वही रणनीति Gmail पर लागू कर दी है. दुनियाभर में करोड़ों लोग जिस ईमेल सर्विस का रोज इस्तेमाल करते हैं, उसमें अब जनरेटिव AI को जोड़ा जा रहा है. मकसद है इनबॉक्स को स्मार्ट बनाना और ईमेल लिखने-पढ़ने में लगने वाला समय कम करना लेकिन इसके साथ ही यूजर्स की प्राइवेसी को लेकर नए सवाल भी खड़े हो गए हैं.
Gmail में AI की नई एंट्री, क्या बदलेगा ईमेल का अनुभव?
Google ने इस महीने Gmail के लिए कई नए AI आधारित टूल्स रोलआउट करने शुरू किए हैं. इनमें से कुछ फीचर्स सभी यूजर्स के लिए मुफ्त हैं, जबकि कुछ के लिए सब्सक्रिप्शन लेना होगा. Gemini नाम का Google का AI असिस्टेंट अब आपके ईमेल्स को समझकर उन्हें ढूंढने, सारांश बनाने और जवाब लिखने में मदद करेगा.
अब यूजर सर्च बॉक्स में कीवर्ड डालने के बजाय सवाल लिख सकता है, जैसे कि “पिछले महीने मिले जॉब रिक्रूटर का नाम क्या था?” इसके अलावा, कंपनी एक नए AI इनबॉक्स पर भी काम कर रही है जो ईमेल्स में मौजूद बातचीत के आधार पर खुद-ब-खुद आपकी टू-डू लिस्ट तैयार करेगा.
AI इनबॉक्स
आज के समय में ईमेल इनबॉक्स संभालना किसी सिरदर्द से कम नहीं है. जरूरी मेल्स के बीच प्रमोशनल और बेकार मैसेज इतने भर जाते हैं कि जरूरी काम छूट जाते हैं. Google का नया AI इनबॉक्स इसी समस्या का हल बनने की कोशिश करता है.
AI इनबॉक्स आपके हालिया ईमेल्स को पढ़कर यह समझता है कि आज आपको किन कामों पर ध्यान देना है. यह बातचीत का सार निकालता है और जरूरी एक्शन आइटम्स सामने रख देता है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी स्कूल से एडमिशन को लेकर मेल आया है या डॉक्टर ने कोई फॉर्म भरने को कहा है तो AI इनबॉक्स आपको सीधे वही याद दिलाएगा बाकी शोर-शराबे को हटाकर.
फ्री और पेड AI टूल्स में क्या है खास?
Google ने कुछ ऐसे AI फीचर्स भी मुफ्त कर दिए हैं, जो पहले सिर्फ सब्सक्रिप्शन यूजर्स को मिलते थे. इनमें आपकी पुरानी ईमेल स्टाइल के आधार पर सुझाए गए जवाब, लंबे ईमेल थ्रेड्स का ऑटोमैटिक सार और “Help Me Write” जैसे फीचर शामिल हैं जिनसे सिर्फ एक निर्देश लिखकर पूरा ईमेल तैयार किया जा सकता है.
वहीं, पेड प्लान में एडवांस सर्च, बेहतर प्रूफरीडिंग और ज्यादा सटीक AI ओवरव्यू जैसे फीचर्स मिलते हैं. खासतौर पर सवाल पूछकर ईमेल खोजने वाला फीचर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जिनका इनबॉक्स हजारों मेल्स से भरा रहता है.
क्या Gemini आपके ईमेल पढ़ रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि Gmail में AI आने का मतलब क्या Google आपके ईमेल पढ़ रहा है? कंपनी का कहना है कि Gemini सिस्टम ईमेल्स को सिर्फ प्रोसेस करता है, इंसान उन्हें नहीं पढ़ते. Google के मुताबिक, Gmail का डेटा न तो AI को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और न ही कर्मचारियों द्वारा मैन्युअली रिव्यू किया जाएगा.
हालांकि, प्राइवेसी एक्सपर्ट्स मानते हैं कि तकनीकी रूप से किसी कंपनी के पास डेटा तक पहुंच की संभावना हमेशा बनी रहती है. Google ने यह भी साफ किया है कि कानूनी आदेश मिलने पर यूजर डेटा कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है जैसा कि पहले भी होता रहा है.
प्राइवेसी एक्सपर्ट्स की चेतावनी
डिजिटल प्राइवेसी से जुड़े जानकारों का कहना है कि ईमेल को कभी भी पूरी तरह निजी नहीं मानना चाहिए. जैसे-जैसे हम Gmail और Gemini के जरिए ज्यादा जानकारी साझा करेंगे, उतना ही ज्यादा डेटा सिस्टम में स्टोर होगा. इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर वही जानकारी एक्सेस की जा सकती है.
क्या इन फीचर्स को बंद किया जा सकता है?
अभी AI इनबॉक्स को छोड़कर बाकी सभी AI फीचर्स Gmail में डिफॉल्ट रूप से चालू हैं. अगर कोई यूजर इन्हें इस्तेमाल नहीं करना चाहता, तो अकाउंट सेटिंग्स में जाकर “Smart features” को बंद कर सकता है.
आखिरकार फैसला यूजर के हाथ में है. Gmail का AI अनुभव इनबॉक्स को आसान और स्मार्ट जरूर बनाता है लेकिन इसके बदले आपको Google के साथ और ज्यादा डेटा साझा करना होगा. यही वजह है कि Gmail में AI का यह नया दौर जितना सुविधाजनक है उतना ही संवेदनशील भी.
यह भी पढ़ें:
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL






















