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eSIM या Physical SIM? आपकी एक गलती से खाली हो सकता है बैंक अकाउंट, जानिए किसमें ज्यादा खतरा

eSIM Vs Physical SIM: eSIM यानी Embedded SIM एक डिजिटल SIM तकनीक है जो फोन के अंदर ही लगी होती है.

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  • स्मार्टफोन से जुड़ी सेवाओं के कारण सिम धोखाधड़ी बढ़ रही है।
  • ईसिम सुरक्षा में बेहतर, फिर भी ठगों ने नए तरीके निकाले।
  • फर्जी 5G अपग्रेड, बैंक/TRAI अधिकारी बनकर ईसिम ठगी।
  • किसी भी अनजान कॉल पर निजी जानकारी साझा करने से बचें।

eSIM Vs Physical SIM: स्मार्टफोन आज सिर्फ बातचीत का साधन नहीं रह गया है बल्कि बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया और कई जरूरी सेवाओं की पहचान भी आपके मोबाइल नंबर से जुड़ी होती है. ऐसे में यदि कोई साइबर अपराधी आपके SIM कार्ड पर कंट्रोल हासिल कर ले तो वह आपके OTP, बैंक अकाउंट और निजी जानकारी तक पहुंच सकता है.

हाल के वर्षों में भारत में SIM से जुड़े फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं. कई मामलों में लोगों ने लाखों रुपये गंवा दिए क्योंकि ठगों ने eSIM एक्टिवेशन या SIM स्वैपिंग के नाम पर उन्हें जाल में फंसा लिया. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि eSIM और Physical SIM में क्या अंतर है और इनमें कौन ज्यादा सुरक्षित है.

eSIM क्या है?

eSIM यानी Embedded SIM एक डिजिटल SIM तकनीक है जो फोन के अंदर ही लगी होती है. इसमें किसी प्लास्टिक कार्ड को लगाने या निकालने की जरूरत नहीं पड़ती.

नई eSIM प्रोफाइल को सक्रिय करने के लिए आमतौर पर QR कोड स्कैन करना या ऑपरेटर द्वारा दिया गया एक्टिवेशन कोड दर्ज करना होता है. क्योंकि यह फोन के मदरबोर्ड में मौजूद रहती है इसलिए इसे चुराना या निकालना संभव नहीं होता.

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि eSIM पूरी तरह सुरक्षित है. यदि कोई ठग आपके मोबाइल नंबर को किसी दूसरे डिवाइस में ट्रांसफर करवा दे तो वह भी खतरा बन सकता है.

Physical SIM क्या है?

Physical SIM वह छोटा कार्ड होता है जिसे हम फोन में लगाते हैं. इसमें एक माइक्रोचिप होती है जो आपके मोबाइल नंबर और नेटवर्क की पहचान को स्टोर करती है.

जब यह SIM फोन में डाली जाती है तब कॉलिंग, मैसेजिंग, इंटरनेट और अन्य मोबाइल सेवाएं काम करती हैं. इसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि इसे फोन से निकालकर किसी दूसरे डिवाइस में आसानी से लगाया जा सकता है.

eSIM और Physical SIM में सुरक्षा का अंतर

चोरी का जोखिम

Physical SIM को फोन से निकालकर चुराया जा सकता है जबकि eSIM डिवाइस के अंदर ही रहती है और इसे हटाया नहीं जा सकता.

क्लोनिंग का खतरा

कुछ विशेष उपकरणों की मदद से Physical SIM की क्लोनिंग संभव है. दूसरी तरफ eSIM की फिजिकल कॉपी बनाना आसान नहीं होता.

SIM स्वैपिंग

Physical SIM के मामले में ठग डुप्लिकेट SIM जारी करवाने की कोशिश कर सकते हैं. वहीं eSIM में उन्हें आपके नंबर को किसी अन्य डिवाइस में ट्रांसफर करवाना पड़ता है.

OTP तक पहुंच

यदि Physical SIM चोरी हो जाए तो अपराधी सीधे OTP प्राप्त कर सकता है. eSIM के मामले में उसे पहले अकाउंट स्तर पर एक्सेस हासिल करना पड़ता है.

धोखाधड़ी का पता लगना

Physical SIM चोरी होने पर नेटवर्क तुरंत बंद हो जाता है जिससे शक हो जाता है. लेकिन eSIM से जुड़ी धोखाधड़ी कई बार देर से सामने आती है.

भारत में eSIM का कैसे फायदा उठा रहे हैं साइबर ठग?

फर्जी 5G अपग्रेड स्कैम

यह आजकल सबसे आम तरीकों में से एक है. ठग खुद को टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं और कहते हैं कि आपकी 4G SIM को 5G में अपग्रेड करना जरूरी है.

जैसे ही व्यक्ति उनकी बातों में आता है, वे eSIM ट्रांसफर प्रक्रिया शुरू कर देते हैं. इसके बाद पीड़ित का नेटवर्क बंद हो जाता है और ठग OTP हासिल कर बैंक खातों से पैसे निकाल लेते हैं.

eSIM को Physical SIM में बदलने का झांसा

कुछ मामलों में अपराधी बैंक अधिकारी बनकर संपर्क करते हैं और दावा करते हैं कि सुरक्षा कारणों से eSIM को Physical SIM में बदलना जरूरी है. इस बहाने वे संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं.

TRAI अधिकारी बनकर धोखाधड़ी

इस स्कैम में ठग खुद को TRAI या किसी सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि बताते हैं. वे कहते हैं कि आपका नंबर बंद होने वाला है या KYC में समस्या है.

घबराहट पैदा करके वे आधार नंबर, OTP, बैंकिंग जानकारी और अन्य निजी डेटा मांगते हैं जिसका बाद में दुरुपयोग किया जाता है.

खुद को कैसे सुरक्षित रखें?

  • किसी भी कॉल पर OTP, PIN या बैंकिंग जानकारी साझा न करें.
  • 4G से 5G अपग्रेड के लिए आने वाली अनजान कॉल्स पर भरोसा न करें.
  • SIM से जुड़ा कोई भी बदलाव केवल आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या ग्राहक सेवा केंद्र के माध्यम से करें.
  • यदि अचानक नेटवर्क बंद हो जाए तो तुरंत अपने टेलीकॉम ऑपरेटर से संपर्क करें.
  • बैंक अकाउंट में संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत कार्ड और नेट बैंकिंग सेवाएं ब्लॉक कराएं.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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