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Search Results बदलने की तैयारी में Google! Publishers के लिए क्यों बज रही खतरे की घंटी?

Google Search Results: रिपोर्ट्स के मुताबिक Google ने Chrome Canary में एक ऐसे फीचर का टेस्ट किया जो यूजर द्वारा एड्रेस बार में डाली गई क्वेरी का जवाब सीधे AI के माध्यम से दे सकता था.

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  • Google का नया AI सर्च, पब्लिशर्स की चिंताएँ बढ़ाई।
  • यह प्रयोग वेबसाइट ट्रैफिक, विज्ञापन आय घटा सकता है।
  • विशेषज्ञों ने AI जवाबों की सटीकता पर सवाल उठाए हैं।
  • भारत में AI सर्च पर नीतिगत नियमन अपेक्षित है।

Google Search Results: Google और डिजिटल पब्लिशर्स के बीच लंबे समय से चल रही बहस एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह है Google का नया AI आधारित सर्च एक्सपेरिमेंट, जिसने समाचार वेबसाइटों, ब्लॉगर्स और कंटेंट क्रिएटर्स की चिंताओं को बढ़ा दिया है. माना जा रहा है कि अगर Google भविष्य में AI को सर्च का मुख्य हिस्सा बना देता है तो लाखों वेबसाइटों का ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है.

Chrome में AI आधारित सर्च का परीक्षण

रिपोर्ट्स के मुताबिक Google ने Chrome Canary में एक ऐसे फीचर का टेस्ट किया जो यूजर द्वारा एड्रेस बार में डाली गई क्वेरी का जवाब सीधे AI के माध्यम से दे सकता था. इस फीचर का नाम Fulfill Search Queries in AI Mode बताया गया.

इस एक्सपेरिमेंट का उद्देश्य पुराने सर्च रिजल्ट्स की जगह AI आधारित जवाबों को प्राथमिकता देना था. यानी यूजर को वेबसाइटों की लंबी सूची दिखाने के बजाय सीधे AI द्वारा तैयार किया गया जवाब दिखाई देता जिसमें केवल कुछ सीमित सोर्स लिंक शामिल होते.

हालांकि बाद में Google ने स्पष्ट किया कि यह केवल आंतरिक परीक्षण था और फिलहाल इसे बड़े स्तर पर लॉन्च करने की कोई योजना नहीं है.

पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स क्यों हैं चिंतित?

अब तक Google Search में किसी भी सवाल के जवाब के साथ कई वेबसाइटों के लिंक दिखाई देते हैं. AI Summary मौजूद होने के बावजूद यूजर्स अधिक जानकारी के लिए संबंधित वेबसाइट पर जाते हैं.

लेकिन AI Mode की स्थिति अलग है. यहां Google खुद ही पूरा उत्तर उपलब्ध कराने की कोशिश करता है. ऐसे में यूजर को मूल वेबसाइट पर जाने की आवश्यकता कम महसूस हो सकती है.

यही कारण है कि मीडिया संस्थान, ब्लॉगर्स और स्वतंत्र कंटेंट निर्माता इस बदलाव को लेकर चिंतित हैं. उनका मानना है कि यदि लोगों ने वेबसाइटों पर क्लिक करना कम कर दिया तो उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा.

विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन मॉडल पर पड़ सकता है असर

अधिकांश समाचार वेबसाइटें और ब्लॉग विज्ञापनों तथा सब्सक्रिप्शन से कमाई करते हैं. जब वेबसाइट पर आने वाले विजिटर्स की संख्या घटती है तो विज्ञापन से होने वाली आय भी कम हो जाती है.

इसके अलावा पेड सब्सक्रिप्शन लेने वाले पाठकों की संख्या में भी गिरावट आ सकती है. इससे स्वतंत्र पत्रकारिता और क्वालिटी कंटेंट जनरेशन के लिए जरूरी आर्थिक सहायता प्रभावित हो सकती है.

AI के जवाब हमेशा सही हों यह जरूरी नहीं

विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक लगातार बेहतर हो रही है लेकिन अभी भी यह पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं है. कई बार AI किसी रिपोर्ट का अधूरा या गलत समरी पेश कर सकता है.

यदि यूजर केवल AI द्वारा दिए गए संक्षिप्त उत्तरों पर निर्भर रहने लगते हैं तो उनके सामने गलत या अधूरी जानकारी पहुंचने का जोखिम बढ़ सकता है. यही वजह है कि कई विशेषज्ञों का मानना है कि AI को अभी पुराने सर्च का पूरा विकल्प नहीं बनाया जा सकता.

आगे क्या हो सकता है?

यह बहस केवल ट्रैफिक या कमाई तक सीमित नहीं है बल्कि मूल कंटेंट की अहमियत और उसकी विश्वसनीयता से भी जुड़ी हुई है. दुनिया भर के पब्लिशर्स लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि AI उन्हीं के कंटेंट का इस्तेमाल करके जवाब तैयार करेगा तो उन्हें उसका उचित लाभ कैसे मिलेगा.

यदि भविष्य में Google यूजर्स को सीधे AI चैट या AI उत्तरों की ओर ले जाने लगता है तो समाचार वेबसाइटों, रिव्यू पोर्टलों और अन्य कंटेंट प्लेटफॉर्म्स को भारी नुकसान हो सकता है.

भारत में क्या बन सकते हैं नए नियम?

ऑस्ट्रेलिया, स्पेन और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में पब्लिशर्स के अधिकारों को मजबूत करने और टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करने को लेकर कई प्रस्ताव सामने आ चुके हैं. हालांकि भारत में अभी तक इस तरह का कोई बड़ा कानूनी ढांचा लागू नहीं हुआ है.

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि AI आधारित सर्च और मूल कंटेंट निर्माताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए भारत किस तरह की नीति अपनाता है.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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