जहां Facebook हुआ फेल, वहां ChatGPT आया काम! 66 साल बाद मिले भाई-बहन
दशकों से परिवार की तलाश कर रहे अवतार सिंह को ChatGPT से मिला ऐसा सुराग, जिसने उन्हें अपनी मां के परिवार और बिछड़ी बहन तक पहुंचा दिया. जानें ChatGPT ने कैसे की मदद.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर आमतौर पर नौकरियों, गलत सूचनाओं और कॉपीराइट जैसे मामलों की चर्चा होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह किसी व्सक्ति को अपने बिछड़े परिवार से मिला सकता है? एक मामला ऐसा भी सामने आया है, जहां AI ने एक व्यक्ति को उसके बिछड़े परिवार तक पहुंचने में मदद की है. कनाडा में रहने वाले अवतार सिंह ने अपनी मां और उनसे जुड़े परिवार को खोजने के लिए दशकों तक प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली. आखिर में उन्होंने ChatGPT की मदद लेने का फैसला किया और कुछ ही घंटों में उन्हें ऐसा सुराग मिला, जिसने उन्हें उनके बिछड़े परिवार से मिला दिया.
Facebook भी नहीं ढूंढ पाया
अवतार सिंह का बचपन अमृतसर में बीता. 1960 के दशक में उन्हें धीरे-धीरे पता चला कि जिस महिला को वह अपनी मां समझते थे, वह वास्तव में उनकी दादी थीं. उनके पिता कनाडा चले गए थे और अवतार का पालन-पोषण दादा-दादी ने ही किया. बाद में उन्हें यह भी जानकारी मिली कि उनकी मां का नाम साविंदर था और वह किसी वजह से भारत से बाहर चली गई थी. उनके बारे में इतना ही पता था कि वह अफ्रीका और संभवतः ब्रिटेन में रहतू थी. अवतार ने अपनी मां को खोजने के लिए Google, Facebook और दूसरे माध्यमों की भी मदद ली. हांलाकि उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिली.
ChatGPT का लिया सहारा
मई 2026 में फ्रांस की यात्रा के दौरान उन्होंने पहली बार ChatGPT से इस मामले में मदद लेने का फैसला किया. अनतार ने AI को अपनी मां का नाम साविंदर, उनकी अनुमानित उम्र 87 से 97 वर्ष के बीच होने और भारत, अफ्रीका तथा ब्रिटेन से उनके संबंध जैसी सीमित जानकारियां दी. ChatGPT ने उपलब्ध ऑनलाइन जानकारी के आधार पर एक सुराग सामने रखा. ChatGPT उन्हें निक्की धामू द्वारा लिखे गए अपनी मां से जुड़े एक लेख तक ले गया. लेख में 1962 में धारीवाल के एक संस्थान से हासिल किया गया सिलाई का प्रमाणपत्र भी था. यह प्रमाणपत्र अवतार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि धारीवाल ही उनका जन्मस्थान था. इसके बाद उन्होंने लेख में दिए संपर्क के जरिए निक्की से संपर्क किया.
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66 साल बाद मिले अपनी बहन से
बातचीत के दौरान निक्की ने बताया कि उनकी मां की भारत में शादी और तलाक हुआ था और उनका एक बेटा भी था. इसके बाद निक्की ने अवतार से उनके बचपन के नाम ‘टिटू’ के बारे में पूछा. अवतार के लिए यह बेहद भावुक पल था. उन्हें समझ आ गया कि निक्की ही उनकी बहन है. कुछ ही दिनों बाद अवतार और उनकी पत्नी लंदन पहुंचे, जहां उन्होंने निक्की और परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की.
यह घटना AI की एक अहम उपयोग को सामने लाती है. AI का उपयोग करना व्यक्ति के ऊपर निर्भर करता है. अगर इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए, तो यह हमारे लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है. हांलाकि इसे इस्तेमाल करते हुए आज भी कई सावधानियां रखना होती है.





















