Demand of Gen Z Electricians: AI कंपनियां Gen Z इलेक्ट्रिशियन को दे रही 2.7 करोड़ रुपये तक की सैलरी? जानिए क्या है वजह
Demand of Gen Z Electricians: AI डेटा सेंटर तेजी से बनने के कारण इलेक्ट्रिशियनों की मांग बढ़ गई है. इसी वजह से AI कंपनियां Gen Z युवाओं को करोड़ों रुपये तक की सैलरी देने को तैयार हैं.

Demand of Gen Z Electricians: आजकल हर जगह AI चर्चा में है, और इसने नौकरियों की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. इस साल अकेले Amazon, Meta, Oracle और TCS जैसी बड़ी कंपनियों से मिलाकर करीब 1 लाख 20 हजार से ज्यादा टेक कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है. लेकिन इसी बीच सिलिकॉन वैली में एक ऐसी नौकरी है जो चुपचाप बहुत मुनाफे वाली बन गई है, और वह है इलेक्ट्रिशियन की नौकरी. डर्टी जॉब्स TV शो के फाउंडर माइक रो का कहना है कि AI कंपनियां अब Gen Z के युवा इलेक्ट्रिशियनों को करोड़ों रुपये की सैलरी देने को तैयार हैं. आइए जानते हैं आखिर ऐसा क्यों हो रहा है.
कितनी सैलरी मिल रही है इलेक्ट्रिशियनों को?
माइक रो ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उन्होंने दो महीने पहले टेक्सास के प्लानो शहर में एक डेटा सेंटर में कुछ इलेक्ट्रिशियनों से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा, "मैंने जिन इलेक्ट्रिशियनों से बात की, वे सभी 30 साल से कम उम्र के थे और उन्हें सालाना 2 लाख 40 हजार डॉलर यानी करीब 2.3 करोड़ रुपये से लेकर 2 लाख 80 हजार डॉलर यानी करीब 2.7 करोड़ रुपये तक की सैलरी मिल रही थी.
यह भी पढ़ेंः क्या आपका OLED TV जरूरत से ज्यादा हो रहा है गर्म? ये हो सकता है कारण, जानिए क्या करें
आखिर AI कंपनियों को इलेक्ट्रिशियन की इतनी जरूरत क्यों है?
दरअसल, AI मॉडल्स को चलाने के लिए बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है, खासकर ऐसे AI डेटा सेंटर की जिनमें हजारों GPU लगे होते हैं. AI की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कंपनियां लगातार नए-नए डेटा सेंटर बना रही हैं और इसी वजह से डेटा सेंटर बनाने वाली जगहों पर इलेक्ट्रिशियन, वेल्डर और कंस्ट्रक्शन मैनेजर की भारी मांग हो गई है.
Fortune की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को सामान्य कंस्ट्रक्शन काम से करीब 32 प्रतिशत ज्यादा सैलरी मिल रही है, जो सालाना करीब 81,800 डॉलर यानी करीब 78 लाख रुपये अतिरिक्त बैठती है. एक अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेटा सेंटर बनाने का काम अब दुनियाभर में सबसे ज्यादा मजदूरों की कमी झेल रहा कंस्ट्रक्शन सेक्टर बन गया है. सिर्फ AI डेटा सेंटर ही नहीं, बल्कि प्लंबर, मैकेनिक और टेक्नीशियन जैसी बाकी हाथ से काम करने वाली नौकरियों की मांग भी अभी काफी ज्यादा बनी हुई है.
यह भी पढ़ेंः सावधान! Dehumidifier इस्तेमाल करने वालों के लिए बड़ी चेतावनी, ऐसा करने से हो सकता है बड़ा हादसा






















