Wind Turbine: 1 टन का एसी चलाना है, कितना बड़ा विंड टरबाइन जरूरी?
Wind Turbine: बिजली बिल से बचने के लिए छत पर छोटा विंड टरबाइन लगाकर 1 टन का एसी चलाया जा सकता है? क्या वाकई छत की हवा से एसी जैसा भारी लोड चल सकता है? पैसा लगाने से पहले जान लें हिसाब-किताब.

- बढ़ते बिजली बिलों के कारण घरेलू पवन टरबाइन चर्चा में हैं।
- एक टन एसी चलाने के लिए 2-3 किलोवाट टरबाइन, बैटरी बैंक आवश्यक।
- बड़े टरबाइन हेतु छत पर ऊंची निर्बाध हवा चाहिए, शहरों में मुश्किल।
- पूरे सेटअप का खर्च 1.80-2.50 लाख, हाइब्रिड सिस्टम अधिक प्रभावी।
Wind Turbine: गर्मियों के मौसम में घर का बिजली बिल देखकर अक्सर पसीने छूट जाते हैं और इसमें सबसे बड़ा हाथ एसी का होता है. यही वजह है कि बिजली के बढ़ते खर्च से बचने के लिए आजकल लोग सोलर पैनल की तरफ तेजी से भाग रहे हैं. मगर क्या आपने कभी छत पर छोटा विंड टरबाइन यानी पवन चक्की लगाने के बारे में सोचा है. सोशल मीडिया पर भी आजकल घरेलू विंड टरबाइन के कई वीडियो खूब वायरल होते हैं.
जिन्हें देखकर लोग इन्हें खरीदने का मन बना लेते हैं. लेकिन हवा से बिजली बनाकर क्या एसी जैसी भारी मशीन चलाई जा सकती है, यह देखने में जितना आसान लगता है हकीकत में इतना आसान है नहीं. अगर आप भी अपने 1 टन के एसी को विंड टरबाइन से चलाने की प्लानिंग कर रहे हैं तो पैसा लगाने से पहले इसके साइज, बिजली की खपत और खर्च का पूरा हिसाब-किताब जरूर समझ लें.
1 टन के एसी के लिए टरबाइन की कैपेसिटी
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 1 टन का एसी आखिर कितनी बिजली खाता है. आजकल बाजार में आने वाले 1 टन के 5 स्टार इन्वर्टर एसी करीब 900 से 1100 वॉट यानी लगभग 1 किलोवाट बिजली की खपत करते हैं. वहीं अगर आपका एसी पुराना या नॉन-इन्वर्टर है तो यह लोड बढ़कर 1200 से 1400 वॉट तक चला जाता है. इतना ही नहीं. जब एसी का कंप्रेसर स्टार्ट होता है तो उसे कुछ सेकंड के लिए अपनी क्षमता से दोगुनी ताकत यानी सर्ज पावर की जरूरत पड़ती है.
ऐसे में अगर आप सिर्फ 1 किलोवाट का छोटा विंड टरबाइन लगा लेंगे तो वह एसी का लोड बिल्कुल नहीं उठा पाएगा. अपने 1 टन के एसी को आराम से दिन में 8 से 10 घंटे चलाने के लिए आपको कम से कम 2 से 3 किलोवाट क्षमता वाले घरेलू विंड टरबाइन की जरूरत पड़ेगी. इसके साथ ही आपको एक हैवी ड्यूटी इन्वर्टर और कम से कम 4 से 5 किलोवाट का बैटरी बैंक भी लगाना होगा जिससे हवा कम होने पर भी एसी बिना रुके चलता रहे.

छत पर कितनी जगह घेरता है यह सिस्टम?
जब बात 2 से 3 किलोवाट के विंड टरबाइन की आती है. तो यह कोई टेबल फैन जैसा छोटा उपकरण नहीं होता. इस क्षमता के टरबाइन के ब्लेड यानी पंखों का घेरा करीब 10 से 12 फीट चौड़ा होता है. इसे छत पर किसी मजबूत लोहे के पोल यानी खंभे पर कम से कम 20 से 30 फीट की ऊंचाई पर लगाना पड़ता है जिससे इसे बिना किसी रुकावट के तेज हवा मिल सके.
विंड टरबाइन से बिजली बनाने के लिए लगातार 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवा चाहिए होती है. अगर आप किसी ऐसी जगह हैं जहां घनी आबादी वाली कॉलोनी हैं जहां आसपास ऊंची इमारतें हैं तो वहां हवा की स्पीड टूट जाती है और टरबाइन अपनी पूरी कैपेसिटी से बिजली नहीं बना पाता. इसके अलावा जब इतना बड़ा पंखा छत पर तेजी से घूमता है तो उससे हल्का कंपन और आवाज भी होती है, जिसके लिए छत की मजबूती का ध्यान रखना बहुत जरूरी है.

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कितना आएगा पूरा खर्च?
अगर इस पूरे सेटअप पर आने वाले खर्च की बात करें तो भारत में 2 से 3 किलोवाट का एक अच्छी क्वालिटी का घरेलू विंड टरबाइन, बैटरी बैंक, हाइब्रिड इन्वर्टर और इंस्टॉलेशन मिलाकर करीब 1.80 लाख से 2.50 लाख रुपये तक का खर्च बैठता है. खुले इलाकों, कोस्टल एरिया या पहाड़ी जगहों पर रहने वाले लोगों के लिए यह सौदा काफी फायदेमंद साबित होता है, क्योंकि वहां दिन और रात दोनों समय अच्छी हवा चलती है.
लेकिन मैदानी इलाकों के शहरों में सिर्फ विंड टरबाइन के भरोसे एसी चलाना थोड़ा रिस्की हो सकता है. इसलिए एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अकेले विंड टरबाइन लगाने के बजाय विंड और सोलर का हाइब्रिड सिस्टम लगाना ज्यादा फायदेमंद सौदा हो सकता है. इसमें आप 2 किलोवाट के सोलर पैनल के साथ 1 किलोवाट का छोटा विंड टरबाइन जोड़ सकते हैं.
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