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बिहार में चुनाव समय पर हो या ना हो, राज्य में अब यही है इलेक्शन का मुद्दा

चुनाव कराने को लेकर राजनीतिक दलों में अलग-अलग राय है. जहां कुछ दल समय पर चुनाव कराने के पक्ष में हैं तो वहीं कुछ चुनाव टाल देने की मांग कर रहे हैं.

पटना: बिहार में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. चुनाव आयोग के मुताबिक अक्टूबर-नवंबर में चुनाव होंगे. लेकिन कोरोना महामारी के बीच चुनाव किस तरह संपन्न हो यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है. कोरोना की मौजूदा स्थिति को देखते हुए विधानसभा चुनाव कराने को लेकर सूबे की राजनीतिक पार्टियों की अलग-अलग राय है. किसी का मानना है कि चुनाव टाल दिया जाए, वहीं कुछ पार्टियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर चुनाव करवाया जाए.

इस संबंध में बिहार सरकार के मंत्री और जेडीयू नेता नीरज कुमार का कहना है कि कोविड-19 एक वैश्विक आपदा है और कोरोना मरीज बढ़े हैं, लेकिन यह भी सही है कि ठीक होने की राष्ट्रीय दर 62.42% है और बिहार की यह दर 71.54% है. चुनाव आयोग को संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनाव कराने का अधिकार प्राप्त है. ऐसी स्थिति में चुनाव आयोग खुद मतदानकर्मियों, पदाधिकारियों और आम लोग जो मतदाता हैं वो संक्रमण से बचे इस संबंध में कार्यनीति तय करेगा.

नीरज कुमार ने कहा कि हमारी पार्टी के संसदीय दल के नेता राज्यसभा और लोकसभा के सभी सदस्यों ने सर्वदलीय बैठक में अपनी राय व्यक्त की है कि बिहार में एक दिन के अंदर चुनाव हो और चुनाव की जो प्रक्रिया हो उसमें बड़े नेता कैसे प्रचार प्रसार करेंगे इसके लिए चुनाव आयोग नीति तय करे. क्योंकि यह क्षेत्राधिकार चुनाव आयोग का है. लेकिन यह महत्वपूर्ण विषय है कि देश में एक संवैधानिक व्यवस्था है, जिसमें पांच साल की अवधि पूरा होने पर चुनाव कराने की प्रक्रिया है, तो कोविड-19 के दौर में चुनाव आयोग को यह तय करना है कि कैसे संक्रमण से बचाते हुए अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करें. चुनाव आयोग तो एक संस्था है और उसका जो भी निर्णय होगा वो सबके लिए मान्य होगा.

राज्य में कोरोना टेस्टिंग के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि टेस्टिंग के संबंध में औपचारिक रूप से स्वास्थ्य विभाग ही जानकारी देगा, रोजाना समीक्षा बैठक के बाद सूचना और जन संपर्क विभाग के सचिव मीडिया को सारे तथ्यों की जानकारी देते हैं. लेकिन महत्वपूर्ण विषय यह है कि कोविड-19 से संक्रमण का खतरा है और राज्य सरकार उससे निपटने के लिए हर संभव कदम उठा रही है.

क्या कहना  है बीजपी का? इधर, बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि अभी जुलाई है और चुनाव अक्टूबर से लेकर नवंबर तक प्रस्तावित हैं, तो ऐसे में चुनाव आयोग क्या निर्णय लेगा यह कहना कठिन है. एक राजनीतिक दल के तौर पर बीजेपी संगठन और विचारधारा के बुनियाद पर सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे काम करती है. हमने वर्चुअल ऑनलाइन तरीके से लोगों से जुड़ना शुरू किया है और लॉकडाउन के समय में हम सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क, सैनेटाइजर से लेकर सभी चीजों का उपयोग कर रहे हैं. गमछा तक रख रहे हैं. यह चुनाव आयोग के दायरे की बात है और कब, कहां और कैसे चुनाव होगा यह चुनाव आयोग को तय करना है, चुनाव आयोग के क्षेत्राधिकार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए और इस पर राजनीतिक दल या कोई नेता टिप्पणी ना करें तो बेहतर है.

निखिल आनंद ने कहा कि सरकार कोरोना से संबंधित तमाम आंकड़े को सार्वजनिक कर रही है. लेकिन हमारा मानना है कि बिहार एक मोस्ट पॉपुलेटेड जगह है और यहां कोरोना के ज्यादा आंकड़े आ रहे हैं, तो उससे बहुत घबराने की जरूरत नहीं है. हमारी ठीक होने की दर 71 फीसदी से ज्यादा है, कोरोना के मरीज 4 फीसदी से भी कम आ रहे हैं. इसलिए विपक्ष के लोगों से भी अपील करूंगा कि तमाम लोग राजनीति के जगह जन सहयोग करें, सरकार को सहयोग करें और कोरोना जैसी बड़ी चुनौती से निपटने में अपनी भूमिका निभाएं.

कांग्रेस ने कहा- बिहार में हालात गंभीर कांग्रेस नेता प्रेमचंद मिश्रा ने कहा कि कोरोना को लेकर बिहार में हालात गंभीर हो गए हैं और जिस तरह से संक्रमित मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हो रही है, उससे लगता है कि कोरोना बिहार में बेकाबू हो चुका है और हालात यह है कि अगर यही स्थिति रही तो यह आगे कम्युनिटी ट्रांसमिशन का रूप ले लेगी. इस स्थिति में विधानसभा का चुनाव होना मुझे सही नहीं लगता है. चुनाव आयोग के लिए संभव होगा और अगर सत्ता पक्ष के लोगों को हड़बड़ी है.

मिश्रा ने कहा कि चुनाव कराया तो इससे भारी जान-माल का नुकसान होगा और स्थिति काफी भयावह हो सकती है. आरजेडी या एनडीए की पार्टी एलजेपी ने भी चुनाव टालने की मांग की है. ऐसे में चुनाव आयोग को इस पर एक बार खुले दिल से सोचने की जरूरत है और वो सर्वदलीय बैठक का आयोजन करे और सभी पार्टियों की राय लें, क्योंकि परिस्थितियां काफी गंभीर हो गई हैं और कहीं से भी ये संकेत नहीं मिल रहा कि हम संक्रमण को रोकने में कितने हद तक कामयाब हुए हैं, कांग्रेस की नजर में स्थिति बिगड़ती जा रही है और यह स्थिति कहीं से भी चुनाव कराने के लिए उपयुक्त नहीं है.

कोरोना टेस्टिंग के संबंध में उन्होंने कहा कि बाकी राज्यों की तुलना में बिहार 19वें नंबर पर है. बड़े राज्यों की अगर हम बात करें तो प्रति 10 लाख की आबादी में मात्र 21 सौ लोगों की ही टेस्टिंग हो पा रही है. यहां टेस्टिंग की क्षमता तो है नहीं,  नीतीश जी जबसे लॉकडाउन हुआ है बयानबाजी करते रहे हैं लेकिन उससे सुधार नहीं हुआ है. हालत यह है कि सरकार एक तरह से एक्सपोज हो गई है. खुद नीति आयोग के CEO ने जो सूची जारी की है उसमें बताया गया है कि टेस्टिंग में बिहार 19वें नंबर पर है, तो जब टेस्टिंग ही नहीं होगी और आपके पास मेडिकल के सुविधा भी नहीं है तो ऐसे हालत में आप ये मानकर चलें कि बिहार में कोरोना बेकाबू है और सरकार इस दिशा में कुछ भी कर पाने की स्थिति में नहीं है.

'आरजेडी का मानना है कि चुनाव टाल देने चाहिए ' आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि हमारा स्पष्ट मानना है और हमारे नेता तेजस्वी यादव ने भी बार-बार कहा है कि अभी चुनाव को टाल देना चाहिए. जिस तरह से कोरोना संक्रमण का विस्फोट बिहार में हुआ है, ऐसे में चुनाव कराने की सोच जनता के जिंदगी के साथ खिलवाड़ से कम नहीं है. जेडीयू चुनाव के लिए परेशान है. वह तो सत्ता की भूखी है, अभी सत्ता की भूख उनकी जगी हुई है तो उनको चुनाव दिख रहा है पर हमारे नेता अभी बिहार की जनता की चिंता कर रहे हैं.

मृत्युंजय ने कहा कि अभी राज्य में कोरोना विस्फोट का खतरा बना हुआ है, ऐसे में कैसे चुनाव करा सकते हैं. अब तो एनडीए के भीतर ही आवाज उठने लगे हैं, एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी अभी चुनाव के पक्ष में नहीं हैं. अगर चुनाव आयोग का यह निर्णय है कि चुनाव कराना है तो हमारे पार्टी का स्पष्ट मानना है कि आयोग परंपरागत तरीके से चुनाव कराए. अगर जनता के बीच में संवाद नहीं होगा तो कैसे चुनाव संभव है और ये डिजिटल और वर्चुअल के फेर में हैं. जबकि हम एक्चुअल चुनाव की मांग कर रहे हैं.

मृत्युंजय ने कहा कि जो लोकतंत्र की हमारी परंपरा है, उसके अनुसार चुनाव कराएं लेकिन बीजेपी-जेडीयू के लोग बेचैन हैं, वो चाहते हैं कि शॉर्टकट तरिके से चुनाव कराकर सत्ता में आएं. इनको बिहार की जनता की चिंता नहीं यह तो कोरोना टेस्टिंग भी ज्यादा नहीं करा पा रहे हैं. एक दिन में दो सौ से तीन सौ लोग पॉजिटिव पाए जा रहे हैं और यह ऐसे में चुनाव चाहते हैं. आपके पास क्या व्यवस्था है अभी हालात और बिगड़े हैं और जो अंदेशा है आने वाले समय में हालात और बिगड़ेंगे.

आरजेडी नेता ने कहा कि पूरे बिहार में लॉकडाउन होना चाहिए और सख्ती से इसका पालन कराना चाहिए. यह सरकार की लापरवाही की नतीजा है, जो जनता को भुगतना पड़ रहा है. यह सरकार की नाकामी है कि आज मुख्यमंत्री आवास तक कोरोना पहुंच गया है, सचिवालय से लेकर उपमुख्यमंत्री के कार्यालय तक पहुंच गया है, तो इसमें कहीं न कहीं सरकार की चूक है, सरकार इसके लिए जिम्मेदार है और वो अपने जिम्मेदारी और जवाबदेही से नहीं भाग सकती है.

मृत्युंजय ने कहा कि हमारे नेता ने बार-बार कहा है कि आप टेस्टिंग बढ़ाएं, तभी पता चलेगा. जहां 12 करोड़ की आबादी है वहां आप जांच क्या कर रहे हैं? अस्पताल में क्या सुविधा दे रहे हैं? सरकार तो पूरी तरह से चुनाव में व्यस्त हो गई है. रोज डिजिटल और वर्चुअल रैली कर रहे हैं, इनको जनता की चिंता नहीं और यहां जनता परेशान हैं. इस संकट काल में जनता चौतरफा मार झेल रही है. कोरोना का खतरा है ही ऊपर से महंगाई भी चरम पर है. दूसरी ओर पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट है. जो बाहर से हमारे लोग आए हैं उनके लिए रोजगार का संकट है तो ऐसे हालात में आप लाशों के ढेर पर चुनाव कराने की कैसे सोच सकते हैं.

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