उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर बड़ा दावा, आंकड़े देखकर उड़ जाएंगे आपके होश
UP Waqf Board Property List: उत्तर प्रदेश में वक्फ की संपत्तिय़ों को लेकर अब तक का सबसे बड़ा दावा सामने आया है. इन आंकड़ों के बारे में जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे.

UP Waqf Board Property List: उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर बड़ा दावा किया गया है. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने राज्य में 2,22,555 संपत्तियों पर अपना हक बताया है, जबकि शिया वक्फ बोर्ड ने 15,386 संपत्तियों को अपनी संपत्ति बताया है. राजधानी लखनऊ में भी वक्फ संपत्तियों की संख्या हजारों में है. यहां सुन्नी वक्फ बोर्ड 5,379 संपत्तियों और शिया वक्फ बोर्ड 3,603 संपत्तियों पर मालिकाना हक होने का दावा करता है.
क्या हैं वक्फ संपत्तियां?
वक्फ संपत्तियां वे जमीनें, मकान या अन्य परिसंपत्तियां होती हैं, जो किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा धार्मिक, सामाजिक या जनहित के उद्देश्य से वक्फ बोर्ड के अधीन कर दी जाती हैं. ये संपत्तियां आमतौर पर मस्जिदों, कब्रिस्तानों, मदरसों, धर्मार्थ अस्पतालों और अन्य धार्मिक या सार्वजनिक उपयोग के लिए होती हैं. भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत इनका प्रबंधन व देखरेख होती है.
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उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की स्थिति
उत्तर प्रदेश में वक्फ संपत्तियों की संख्या काफी अधिक है और इसे देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा माना जाता है. लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, सहारनपुर जैसे शहरों में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियां हैं.
वक्फ संपत्तियों को लेकर विवाद भी
वक्फ संपत्तियों पर समय-समय पर विवाद भी होते रहे हैं. कई मामलों में सरकारी एजेंसियों और निजी व्यक्तियों द्वारा इन पर अतिक्रमण की शिकायतें आती रही हैं. कुछ संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामले भी सामने आते रहते हैं. लखनऊ में कई ऐतिहासिक वक्फ संपत्तियों पर कानूनी विवाद भी चल रहे हैं.
सरकार कर रही सख्त निगरानी
उत्तर प्रदेश सरकार ने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन के लिए कई कदम उठाए हैं. हाल ही में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का डिजिटलीकरण करने की योजना भी बनी है, जिससे इनके सही आंकड़े सामने आ सकें और अवैध कब्जों पर रोक लगाई जा सके.
सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग हो और ये धार्मिक व जनहित के कार्यों में आएं. इसके लिए वक्फ अधिनियम को प्रभावी तरीके से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है.
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Source: IOCL























