उत्तराखंड: विनय त्यागी की कस्टडी में मौत पर बहन ने उठाए सवाल, '700 करोड़ के राज' के चलते मर्डर!
Haridwar News: सीमा त्यागी का आरोप है कि देहरादून से करीब 750 करोड़ रुपये की चोरी हुई थी, जिसमें भारी मात्रा में नकदी, ज्वैलरी और बेनामी संपत्तियों के अहम कागजात शामिल थे.

उत्तराखंड के लक्सर में कुख्यात हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी की पुलिस कस्टडी में मौत के बाद मामला अब सिर्फ एक अपराधी की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह 700 से 750 करोड़ रुपये की कथित चोरी, प्रवर्तन निदेशालय (ED), पुलिस की भूमिका और बड़े आपराधिक नेटवर्क की परतें खोलता नजर आ रहा है. विनय त्यागी की बहन सीमा त्यागी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों ने इस पूरे प्रकरण को और सनसनीखेज बना दिया है.
सीमा त्यागी का आरोप है कि देहरादून से करीब 750 करोड़ रुपये की चोरी हुई थी, जिसमें भारी मात्रा में नकदी, ज्वैलरी और बेनामी संपत्तियों के अहम कागजात शामिल थे. यह संपत्ति गाजियाबाद के एक बड़े ठेकेदार और बिजनेसमैन सुभाष त्यागी की बताई जा रही है. दावा किया जा रहा है कि सुभाष त्यागी को गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली थी कि उनके यहां ED की रेड होने वाली है. इसी डर से उन्होंने अपनी नगदी, जेवरात और बेनामी संपत्तियों के कागजात देहरादून में अपने एक डॉक्टर मित्र के घर भिजवा दिए.
बताया जाता है कि यह सारा माल एक गाड़ी में भरकर देहरादून भेजा गया, जहां उसे सुरक्षित रखने की योजना थी. कुल संपत्ति का आंकड़ा 700 करोड़ से अधिक बताया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी एजेंसी ने नहीं की है.
पार्टी से शुरू हुई साजिश
कहानी में मोड़ तब आया जब इसी डॉक्टर के यहां एक पार्टी आयोजित हुई, जिसमें विनय त्यागी भी गेस्ट के रूप में मौजूद था. शराब का दौर चला और नशे की हालत में डॉक्टर ने कथित तौर पर सारा राज विनय त्यागी को बता दिया- कि उसके घर में करोड़ों की नकदी, जेवरात और बेहद कीमती कागजात छिपाए गए हैं.
यहीं से हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी का ‘खुराफाती दिमाग’ सक्रिय हुआ. पहले से हत्या, अपहरण और डकैती जैसे गंभीर अपराधों में लिप्त विनय ने तुरंत अपने साथियों को फोन कर देहरादून बुला लिया. आरोप है कि रात में गाड़ी का शीशा तोड़कर वह तमाम संपत्ति और कागजात निकाल लिए गए और विनय त्यागी फरार हो गया.
एफआईआर और अधूरी बरामदगी
सुबह जब डॉक्टर को होश आया तो उसने पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि एफआईआर महज चार लाख रुपये की चोरी की दर्ज कराई गई. इससे संदेह और गहराता है कि असली रकम और कागजात को जानबूझकर छुपाया गया.
इसके बाद पुलिस ने विनय त्यागी की तलाश तेज की. सूत्रों का दावा है कि पुलिस ने अधिकांश नकदी तो बरामद कर ली, लेकिन कुछ ऐसे कागजात हाथ नहीं लगे, जिनकी कीमत कथित तौर पर बरामद धनराशि से भी कहीं ज्यादा थी. यहीं से विनय त्यागी पर दबाव बढ़ने लगा.
पुलिस कस्टडी और मौत
सीमा त्यागी का आरोप है कि विनय त्यागी इस पूरे मामले में ED या किसी दूसरी केंद्रीय एजेंसी के सामने सच उगलने वाला था. इसी वजह से उसे पेशी के दौरान रास्ते में ही मारने की साजिश रची गई. लक्सर में पुलिस कस्टडी के दौरान हुए हमले में विनय त्यागी गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में एम्स ऋषिकेश में उसकी मौत हो गई. बहन का आरोप है कि इस साजिश में उत्तराखंड पुलिस की भूमिका संदिग्ध है.
मेरठ से दुबई तक का आपराधिक सफर
विनय त्यागी का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा रहा है. उसका मेरठ से पुराना नाता था और वह कुछ समय जागृति विहार में किराए के मकान में रहा. 2015 में मेरठ में दो युवकों के अपहरण और हत्या के मामले में उसका नाम पहली बार बड़े स्तर पर सामने आया. इसी केस में उसके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ.
धीरे-धीरे विनय त्यागी बदन सिंह बद्दो और नीरज भाटी जैसे कुख्यात अपराधियों के गैंग से जुड़ गया. उस पर हत्या, अपहरण और डकैती के करीब 58 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे. मेरठ के थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र के एक मुकदमे में वह लंबे समय तक वांछित रहा.
पुलिस दबाव बढ़ने पर वह कुछ समय दुबई में भी रहा और वेस्ट यूपी में अपने नेटवर्क को फैलाने की कोशिश करता रहा. चोरी-छिपे भारत लौटकर वह दिल्ली में किराए के फ्लैट में रहने लगा, जहां से जून 2024 में मेरठ एसओजी ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.
‘खामोशी की नींद’
अब विनय त्यागी की मौत के बाद सवाल यह है कि क्या वह सिर्फ एक अपराधी था या फिर किसी बड़े खेल का मोहरा? चर्चाओं में कहा जा रहा है कि उसके पास ऐसे कागजात और जानकारियां थीं, जो कई बड़े चेहरों के लिए खतरा बन सकती थीं.
जितने मुंह, उतनी बातें- लेकिन एक बात साफ होती जा रही है कि विनय त्यागी की खामोशी से कई लोगों ने राहत की सांस ली है. क्या यह एक सुनियोजित हत्या थी? क्या 700–750 करोड़ की यह कहानी कभी आधिकारिक जांच में सामने आएगी? और क्या पुलिस व एजेंसियां इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगी? फिलहाल, विनय त्यागी की मौत ने उत्तराखंड से लेकर वेस्ट यूपी तक सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल जरूर मचा दी है, लेकिन सच अब भी परतों के नीचे दबा हुआ है.
29 साल 57 मुकदमों के बाद हुआ अंत
1996 में पहला जुर्म किया
Source: IOCL





















