वाराणसी: BHU में धूमधाम से मनाई गई मदन मोहन मालवीय की जयंती, अभिभावक की तरह पूजते हैं छात्र
Varanasi News: काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में पं. मदन मोहन मालवीय के जन्मदिन के अवसर पर पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है और अनेक सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रम का भी आयोजन होता है.

पूरे विश्व में महामना के नाम से पूजे जाने वाले पंडित मदन मोहन मालवीय की 25 दिसंबर को जयंती थी. इस अवसर पर वाराणसी में कई बड़े भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए. आजादी की लड़ाई से लेकर शिक्षा के क्षेत्र में उनका अतुलनीय योगदान रहा है. आज भी लोग उन्हें अपने आदर्श के तौर पर पूजते हैं.
पंडित मदन मोहन मालवीय का जन्म 25 दिसंबर 1861 को प्रयागराज ( इलाहाबाद ) में हुआ था. उनके पिता का नाम बृजनाथ और माता का नाम श्रीमती मोना देवी था. 15 वर्ष की आयु में इन्होंने काव्य रचना आरंभ कर दी थी. उनकी प्रारंभिक से लेकर मुख्य शिक्षा इलाहाबाद में ही हुई. 16 वर्ष की आयु में इनका विवाह कुंदन देवी से हुआ.
साहित्य और राजनीति के क्षेत्र में अहम योगदान
पं मदन मोहन मालवीय कई पत्रिकाओं के संपादक रहे. एक अच्छे पत्रकार के साथ-साथ विधिक क्षेत्र साहित्य और कुशल राजनीतिक तौर पर भी इन्होंने समाज के लिए अपना एक एक पल समर्पित कर दिया. उनके जीवन से जुड़े अनेक किस्से हैं जो हर वर्ग के लोगों को प्रेरित करते हैं लेकिन अटल इरादों के साथ काशी हिंदू विश्वविद्यालय भारत को प्रदान करना इनके सबसे प्रमुख योगदान में से एक है.
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की नींव रखी
एक महान शिक्षाविद कुशल राजनीतिज्ञ और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ अनेक स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पं. मदन मोहन मालवीय 1904 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर दृढ़ संकल्पित हुए. और उन्होंने अपनी इच्छा शक्ति के बदौलत 4 फरवरी 1916 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की नींव रख दी.
ये यूनिवर्सिटी आज दुनिया की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में से एक और एशिया की सबसे बड़ी रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटी काशी हिंदू विश्वविद्यालय के तौर पर पहचानी जाती है. इनके द्वारा गंगा महासभा की भी स्थापना की गई थी. 12 नवंबर 1946 को 84 वर्ष की उम्र में इनका देहांत हुआ था. उन्हें मरणोपरांत 24 दिसंबर 2014 को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था.
25 दिसंबर को पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन
काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में पं. मदन मोहन मालवीय के जन्मदिन के अवसर पर पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है और अनेक सांस्कृतिक धार्मिक कार्यक्रम का भी आयोजन होता है. यहां के छात्रों में उनके प्रति हमेशा खास स्नेह देखा जाता है. आज भी छात्र उन्हें अपने अभिभावक के तौर पर पूजते हैं.
अध्ययन कर रहे छात्रों के अलावा जो भी छात्र यहां से देश दुनिया के कोने-कोने में अपनी सफलताओं का परचम लहराने के बाद भी अपनी सफलता का श्रेय महामना के सिद्धांतों को देना नहीं भूलते. इस 25 दिसंबर 2025 को भी परिसर से जुड़े सभी सदस्यों ने महामना को याद करते हुए उनके सपनों और संकल्प जैसा भारत बनाने का दृढ़ निश्चय किया.
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