उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, 2022 के रेप के मामले को किया खारिज
Uttarakhand News: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 2022 के रेप के मामले पर सुनवाई करते हुए खारिज कर दिया है. और अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि आपसी सहमति से बने रिश्ते को बलात्कार नहीं माना जा सकता .

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने ऐसे मामले को खारिज कर दिया है जिसमें एक विवाहित महिला ने 18 वर्षीय युवक पर शादी का झांसा देकर बलात्कार करने का आरोप लगाया था, इस मामले में अदालत ने साफ कहा कि यह मामला झूठे वादे पर बलात्कार नहीं बल्कि एक ऐसा रिश्ता था जो आपसी सहमति से बना और बाद में बिगड़ गया.
यह घटना 2022 में दर्ज हुई थी जब महिला लगभग 28 वर्ष की थी महिला ने उत्तराखंड के काशीपुर थाने में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई थी जिसमें महिला ने दावा किया था कि युवक ने उससे शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाएं और बाद में उसके वीडियो को सोशल मीडिया पर भी वायरल करने की धमकी दी थी.
मामले पर कोर्ट ने क्या कहा?
इस मामले में नैनीताल हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की पीठ ने सुनवाई की कोर्ट ने पाया कि जिस वक्त यह कथित घटना हुई यानी 2020 में तब महिला पहले से शादीशुदा थी और उसकी शादी 2024 तक चलती रही इसलिए कोई भी विवाह का दावा अपने आप में कानूनी रूप से माननीय नहीं होता है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला को अपने शादीशुदा जीवन की पूरी जानकारी थी यानी यह नहीं कहा जा सकता कि उसे किसी झूठे भरोसे में रखा गया.
कोर्ट में मुकदमे के दौरान यह भी सामने आया कि युवक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था एक युवक स्टूडेंट था जो काशीपुर में किराए के मकान में रह रहा था वहीं महिला अपने 9 साल के बेटे के साथ पास के ही एक मकान में रहती थी दोनों के बीच रिश्तों की शुरुआत तब हुई जब महिला ने युवक की बहन से अपने बेटे को ट्यूशन पढ़ाने के लिए कहा था.
बचाव पक्ष ने पेश की दलील
इस मामले में बचाव पक्ष के वकील ने कोर्ट के सामने अपनी दलील पेश की जिसमें उसने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के समय आरोपी की उम्र 20 साल थी जो उस वक्त वैवाहिक उम्र से 1 साल कम थी इसलिए दोनों के बीच शादी की कोई भी संभावना नहीं थी. इसके साथ ही महिला पहले से शादीशुदा थी एक बच्चे की मां भी थी इसलिए यह कहना कि विवाह का कोई भी दावा किया गया होगा यह एक तरह से कमजोर बात है.
महिला की ओर से किया गया यह दावा
वहींं महिला की ओर से भी दावा किया गया कि उन्होंने 9 अक्टूबर 2021 को युवक से शादी कर ली थी और उसके सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरें कोर्ट में पेश की. हलांकि युवक के वकील ने तर्क दिया कि यह सारी तस्वीरें सोशल मीडिया पर बनाई गई सामग्री का हिस्सा है, जिन्हें बाद में हटा दिया गया था .
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही की शादी का यह दावा उस पुलिस रिपोर्ट और जांच में कभी सामने नहीं आया जो महिला ने युवक के खिलाफ लिखवाई थी, बचाव पक्ष में यह भी कहा कि इस केस में पुलिस जांच अधूरी थी और निचली अदालत में बिना न्यायिक विवेक के युवक को समन भेजा हालांकि राज्य पक्ष का कहना था कि जांच अधिकारी ने पूरे तथ्यों की जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया था.
हाईकोर्ट ने सुनाया यह फैसला
इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कहा कि एक ऐसा रिश्ता था जो आपसी सहमति से शुरू हुआ था और बाद में बिगड़ गया, इस झूठे वादे पर बलात्कार नहीं माना जा सकता है.
इस तरह के मामले न केवल अदालतों का समय बर्बाद कर रहे हैं बल्कि ऐसे व्यक्ति की छवि को भी धूमिल करते हैं जिस पर एक गंभीर अपराध का आरोप लगाया गया है. बता दें की इस फैसले के साथ ही हाईकोर्ट ने युवक के खिलाफ चल रही सभी आपराधिक कार्यवाहियां रद्द कर दी हैं.
यह फैसला आने वाले समय के लिए लोगों के लिए एक नजीर बन गया है जहां कहीं ऐसे मामले आज भी अदालत में लंबित पड़े हैं जिनमें शादी का झांसा देकर बलात्कार जैसी गंभीर मामले दर्ज कराए गए हैं.
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